रिटायरमेंट से कुछ महीने पहले रिश्वत का दांव पड़ा भारी, 20 हजार लेते कानूनगो को विजिलेंस ने दबोचा
Hardoi News: हरदोई सदर तहसील में एंटी करप्शन विजिलेंस टीम ने राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) कमल किशोर सिंह को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। नक्शा दुरुस्तीकरण से जुड़े मामले में रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद टीम ने कार्रवाई की।
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Hardoi News: जिला मुख्यालय स्थित सदर तहसील में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब लखनऊ से पहुंची एंटी करप्शन विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए राजस्व निरीक्षक यानी कानूनगो कमल किशोर सिंह को कथित तौर पर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई की खबर फैलते ही तहसील परिसर में हड़कंप मच गया।बताया जा रहा है कि कानूनगो के पास अहिरोरी और बढ़ायल क्षेत्र का राजस्व संबंधी कामकाज था। आरोप है कि नक्शा दुरुस्तीकरण से जुड़े एक मामले को निपटाने के एवज में पीड़ित से 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। रिश्वत मांगे जाने से परेशान पीड़ित ने इसकी शिकायत लखनऊ की एंटी करप्शन टीम से की। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की जांच कर आरोपों की पुष्टि की और इसके बाद कार्रवाई की रणनीति तैयार की।
तहसील परिसर के बाहर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति को रकम देने के लिए कहा
शुक्रवार दोपहर करीब 12:45 बजे विजिलेंस टीम शिकायतकर्ता को साथ लेकर सदर तहसील पहुंची। टीम ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी। आरोप के मुताबिक रिश्वत की रकम लेने के दौरान कानूनगो ने सीधे पैसे लेने के बजाय तहसील परिसर के बाहर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति को रकम देने के लिए कहा। हालांकि शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर रकम कानूनगो को ही थमा दी और रुपये उनकी जेब में रख दिए।जैसे ही तय संकेत मिला, पहले से आसपास मौजूद विजिलेंस टीम के सदस्यों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कानूनगो को पकड़ लिया। टीम ने रिश्वत की रकम भी अपने कब्जे में ले ली।
कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को लेकर टीम सुरसा थाने पहुंची, जहां उसके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।विजिलेंस की कार्रवाई की सूचना मिलते ही तहसील के कर्मचारियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि कमल किशोर सिंह जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इससे पहले वह शाहाबाद और हरदोई शहर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी तैनात रह चुके हैं।कार्रवाई की जानकारी मिलने पर आरोपी के कुछ साथी कर्मचारी भी उसकी स्थिति जानने के लिए शहर कोतवाली पहुंचे, लेकिन वहां आरोपी के नहीं मिलने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा। बाद में पता चला कि विजिलेंस टीम उसे सुरसा थाने ले गई है। एंटी करप्शन की इस कार्रवाई के बाद तहसील में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।