दावेदारों की बढ़ी धड़कन, जनता के मुद्दे भी तैयार! हरदोई सदर में टिकट की जंग से चुनावी संग्राम तक

Hardoi News: हरदोई सदर विधानसभा सीट पर चुनाव से पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है। अखिलेश पाठक और डॉ. अनुराग शुक्ला की सपा में दावेदारी से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

Update:2026-08-18 21:15 IST

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Hardoi News: विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन हरदोई सदर की सियासत ने अभी से करवट लेना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए अखिलेश पाठक जहां सदर विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं सोमवार को डॉ. अनुराग शुक्ला के सपा में शामिल होने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। डॉ. शुक्ला ने भी सदर सीट से अपनी दावेदारी पेश की है। ऐसे में अब निगाहें समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर हैं कि वह दोनों में से किस चेहरे पर भरोसा जताती है।

दो ब्राह्मण चेहरों के सपा में आने से बदले समीकरण

अखिलेश पाठक और डॉ. अनुराग शुक्ला के सपा में आने को हरदोई सदर के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों के ब्राह्मण चेहरा होने से अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या सपा इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ भाजपा के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा से कुछ ब्राह्मण चेहरों की दूरी और उनका सपा की ओर जाना आने वाले चुनाव में भाजपा के लिए चिंता का विषय बन सकता है, हालांकि इसका वास्तविक असर चुनाव के समय मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा।सदर सीट पर सपा का प्रत्याशी सामने आने के बाद उसका सीधा मुकाबला भाजपा के मौजूदा विधायक और आबकारी राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल से होने की संभावना है। नितिन अग्रवाल लंबे समय से हरदोई की राजनीति में सक्रिय हैं और कई चुनावों से विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सामने अपनी सीट बचाए रखने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष सत्ता विरोधी मुद्दों को लेकर मैदान तैयार करने की कोशिश करेगा।

ट्रैफिक से जलभराव तक कई मुद्दे

हरदोई सदर में इस बार चुनावी बहस केवल राजनीतिक समीकरणों तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय समस्याओं के इर्द-गिर्द भी घूम सकती है। शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में ट्रैफिक व्यवस्था शामिल है। कई प्रमुख चौराहों पर आए दिन जाम की स्थिति बनती है। अवैध रूप से संचालित बस और टैक्सी स्टैंड भी लंबे समय से चर्चा का विषय हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है।जलभराव भी शहर के लोगों के लिए पुरानी परेशानी बना हुआ है। नगर पालिका क्षेत्र की कई गलियों की स्थिति लंबे समय से खराब है। स्थानीय लोगों की ओर से सीवर व्यवस्था की मांग भी लगातार उठती रही है, ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से राहत मिल सके। इसके अलावा शहर में अतिक्रमण और रोजगार के सीमित अवसर भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं।

मंगली पुरवा क्रॉसिंग और रेलवे स्टेशन पर भी नजर

मंगली पुरवा रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर की मांग भी इस चुनाव में जोर पकड़ सकती है। क्रॉसिंग बंद होने के दौरान लोगों को लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। वहीं हरदोई रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और यात्री सुविधाओं का सवाल भी राजनीतिक चर्चा में शामिल होने लगा है।रेल यात्रियों की ओर से लगातार प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाई जा रही है। सांसद जयप्रकाश रावत की ओर से भी इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर सवाल यह है कि अन्य जनपदों की तरह हरदोई के जनप्रतिनिधि भी रेल मंत्री के सामने ट्रेनों के ठहराव और स्टेशन से जुड़ी मांगों को मजबूती से क्यों नहीं रखते।

स्टेशन के पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हुए कार्यों को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा है। स्टेशन की प्रस्तावित डिजाइन में बदलाव और यात्री सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक मुद्दे का रूप ले सकते हैं।फिलहाल सदर विधानसभा में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। सपा किसे मैदान में उतारती है, यह आने वाले समय में तय होगा। लेकिन इतना जरूर है कि हरदोई में मुकाबला केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों पर भी काफी हद तक निर्भर रहने वाला है। अंततः जनता ही तय करेगी कि इस बार सदर की सियासत किस करवट जाती है।

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