Hardoi News: जो नाम सुनकर लोग चौंकते हैं, वही लौझड़ अब बनेगी हरदोई की शान

Hardoi News: एक जनपद एक व्यंजन योजना में हरदोई की लौझड़, सब्जी-पूड़ी और पारंपरिक लड्डू को मिली पहचान, स्थानीय कारोबार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा।

Update:2026-06-14 22:08 IST

जो नाम सुनकर लोग चौंकते हैं, वही लौझड़ अब बनेगी हरदोई की शान (Photo- Newstrack)

Hardoi News: हरदोई की पहचान अब केवल अपने हैंडलूम वस्त्र उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार की नई पहल के तहत जिले को उसकी पारंपरिक खाद्य विरासत के लिए भी विशेष पहचान मिलने जा रही है। “एक जनपद एक व्यंजन” योजना में हरदोई के प्रसिद्ध व्यंजनों और मिठाइयों को शामिल किए जाने से स्थानीय कारोबारियों और मिठाई निर्माताओं में उत्साह का माहौल है।अब तक हरदोई का नाम “एक जनपद एक उत्पाद” योजना में हदकरधा हैंडलूम वस्त्र के लिए जाना जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत जिले के पारंपरिक स्वाद को भी मंच मिलने वाला है।

हरदोई की प्रसिद्ध सब्जी-पूड़ी, पारंपरिक लड्डू और चर्चित मिठाई ‘लौझड़’ को जिले की विशेष पहचान के रूप में चुना गया है।लौझड़ नाम सुनते ही कई लोगों के मन में अलग-अलग अर्थ आ सकते हैं, लेकिन हरदोई में यह नाम एक लोकप्रिय मिठाई के रूप में जाना जाता है। वर्षों से स्थानीय बाजारों और आयोजनों में इसकी विशेष मांग रहती है। अब सरकार की पहल से इस पारंपरिक मिठाई को प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।

गुणवत्ता मानकों के साथ बाजार में उतारा जाए

प्रदेश सरकार की “एक जनपद एक व्यंजन” योजना का उद्देश्य केवल पारंपरिक व्यंजनों को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि उन्हें संगठित ढंग से बाजार उपलब्ध कराना भी है। योजना के तहत विभिन्न जिलों के चयनित व्यंजनों की मानक रेसिपी तैयार की जाएगी। इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम) का सहयोग लिया जाएगा।

सरकार की योजना है कि इन व्यंजनों को आधुनिक पैकेजिंग, क्यूआर कोड, पोषण संबंधी जानकारी और गुणवत्ता मानकों के साथ बाजार में उतारा जाए। इससे स्थानीय उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से हरदोई के पारंपरिक स्वाद को नई पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय हलवाई, छोटे उद्यमी और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।

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