Kannauj Perfume Park 2026: UP का यह शहर बनेगा ग्लोबल फ्रेगरेंस हब, तेजी से चल रहा है मेगा प्रोजेक्ट

Kannauj Perfume Park 2026: 350 करोड़ रुपये के ठठिया परफ्यूम पार्क से कन्नौज का इत्र उद्योग नई ऊंचाइयों पर पहुंचने की तैयारी में है। इससे रोजगार, निवेश और निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Update:2026-06-11 14:35 IST

Kannauj Perfume Park 2026: मानसून के मौसम में जब बारिश की पहली बूंदें सूखी धरती को छूती हैं और हवा में सौंधी खुशबू घुल जाती है, तो उस एहसास को दुनिया के किसी कोने में कैद करना आसान नहीं होता। लेकिन उत्तर प्रदेश का कन्नौज सदियों से यही काम करता आया है। यह शहर केवल इत्र नहीं बनाता, बल्कि परंपराओं और प्रकृति की खुशबू को संजोता है। सम्राट हर्षवर्धन के काल से लेकर मुगल दौर तक कन्नौज की इत्र कला ने कई स्वर्णिम अध्याय देखे हैं। आज भी यहां प्राचीन 'डेग-भपका' पद्धति से फूलों और प्राकृतिक तत्वों का अर्क तैयार किया जाता है, जबकि मिट्टी का इत्र दुनिया भर में इसकी सबसे अनूठी पहचान बना हुआ है। लगभग 350 इत्र इकाइयों और 60 से अधिक देशों तक पहुंच रखने वाला कन्नौज अब ठठिया में बन रहे आधुनिक परफ्यूम पार्क के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की तैयारी में है। 'परफ्यूम कैपिटल ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर यह शहर पारंपरिक इत्र उद्योग को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। ठठिया में बन रहा लगभग 350 करोड़ रुपये का परफ्यूम पार्क न केवल कन्नौज के इत्र कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच कन्नौज तेजी से औद्योगिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

सदियों पुरानी कला, आज भी बरकरार है पहचान

कन्नौज में इत्र निर्माण की परंपरा कई सौ वर्षों पुरानी है। यहां आज भी पारंपरिक 'देग-भापका' तकनीक से इत्र तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में फूलों और प्राकृतिक तत्वों की खुशबू को चंदन के तेल में समाहित किया जाता है। मिट्टी की सौंधी महक से तैयार होने वाला 'मिट्टी का इत्र' कन्नौज की सबसे अनोखी पहचान माना जाता है। प्राकृतिक और रसायन-मुक्त उत्पादन पद्धति कन्नौज के इत्र को वैश्विक बाजार में अलग पहचान दिलाती है। यही वजह है कि यहां बने उत्पाद खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका तक निर्यात किए जाते हैं।

ठठिया परफ्यूम पार्क से बदलेगी उद्योग की तस्वीर

कन्नौज के इत्र कारोबार को नई गति देने के लिए ठठिया क्षेत्र में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक परफ्यूम पार्क विकसित किया जा रहा है। पार्क में इत्र और सुगंधित उत्पादों से जुड़ी इकाइयों के लिए औद्योगिक प्लॉट विकसित किए गए हैं, जिनमें कई का आवंटन हो चुका है। फैक्ट्रियों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। पार्क के शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय उद्यमियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे कन्नौज के पारंपरिक उद्योग को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने में मदद मिलेगी।

रोजगार और निवेश के नए अवसर

परफ्यूम पार्क को जिले की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे। इत्र निर्माण, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और निर्यात से जुड़े नए अवसर स्थानीय युवाओं के लिए उपलब्ध होंगे।

इसके अलावा छोटे और मझोले उद्यमों को भी बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।

इतिहास की धरोहर भी है कन्नौज

कन्नौज केवल इत्र के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है। सातवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में यह भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता था।

राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित सप्तमात्रिका, अर्धनारीश्वर और अन्य दुर्लभ मूर्तियां उस समृद्ध इतिहास की झलक दिखाती हैं। यहां की कई कलाकृतियां अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी प्रदर्शित हो चुकी हैं।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ी रफ्तार

कन्नौज के विकास में सड़क और परिवहन नेटवर्क की बड़ी भूमिका है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गाजियाबाद ग्रीनफील्ड हाईवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने जिले को प्रमुख शहरों से तेजी से जोड़ा है।

गुरसहायगंज-फर्रुखाबाद मार्ग के चौड़ीकरण से व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। बेहतर सड़क संपर्क का फायदा किसानों, व्यापारियों और इत्र उद्योग से जुड़े उद्यमियों को सीधे तौर पर मिल रहा है।

पर्यटन में भी बढ़ रही पहचान

इत्र के साथ-साथ कन्नौज अब पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। लाख बहोसी पक्षी विहार हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है, जिससे प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का रुझान बढ़ रहा है।

वहीं गंगा नदी में डॉल्फिन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मेंहदी घाट से दाईपुर घाट तक डॉल्फिन टूरिज्म प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है। प्रदेश का यह पहला ऐसा प्रयास होगा, जिससे ईको-टूरिज्म को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।पारंपरिक इत्र उद्योग के लिए पहचाना जाने वाला कन्नौज आज अपने ऐतिहासिक विरासत के महत्व के साथ ही साथ उद्योग, पर्यटन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनूठा संगम बनता जा रहा है।

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