Kaushambi: NH-19 पर हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? कौशाम्बी में रेडियम सुरक्षा अब जरूरी
Kaushambi News: कौशाम्बी में NH-19 पर लगातार हो रहे सड़क हादसों के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्या केवल सस्पेंशन से हादसे रुकेंगे या रेडियम और जागरूकता ही बनेगा असली समाधान?
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Kaushambi News: जनपद में बीते दिनों हुए दर्दनाक सड़क हादसों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। अक्सर देखा जाता है कि जब हाईवे पर कोई बड़ी दुर्घटना होती है और चीख-पुकार मचती है, तब जाकर जिले के आला अधिकारियों की नींद टूटती है। इसके बाद शुरू होता है कार्रवाई का वही पुराना खेल, जिसे जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है।
खानापूर्ति के नाम पर किसी ईमानदार सिपाही, दरोगा या थाना प्रभारी को सस्पेंड या लाइन हाजिर कर दिया जाता है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी पर गाज गिरा देने से हाईवे पर मौत का तांडव रुक जाएगा? असली समाधान कार्रवाई के नाम पर बलि देने में नहीं, बल्कि बचाव और जागरूकता में छिपा है।सिस्टम को अब यह समझना होगा कि हादसे का इंतजार करने से बेहतर है कि हादसों के कारणों को खत्म किया जाए। नेशनल हाईवे-19 से लेकर जिले की हर छोटी-बड़ी सड़क पर सघन चेकिंग अभियान चलाने की जरूरत है। पुलिस और NHAI को चाहिए कि वे केवल कागजों की जांच न करें, बल्कि सड़क पर ही ट्रैक्टर-ट्रॉली और बड़े वाहनों को रोककर उनके पीछे चमकदार रेडियम रिफ्लेक्टर लगवाना सुनिश्चित करें।
जब हर वाहन के पीछे रेडियम की चमक होगी, तो अंधेरे में पीछे से आने वाले चालक को दूर से ही खतरा दिखाई देगा। इससे न केवल हादसे कम होने की संभावना बढ़ेगी, बल्कि सैकड़ों बेगुनाह लोगों की जान बचाने की उम्मीद भी जागेगी।सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ सड़क पर खड़े एक सिपाही की नहीं होती। जब बड़े अधिकारी अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं करते और मातहतों को स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं देते, तो उसका खामियाजा उन ईमानदार सिपाहियों, दरोगाओं और थाना प्रभारियों को भुगतना पड़ता है, जो दिन-रात फील्ड में काम करते हैं।
सस्पेंशन और लाइन हाजिर की प्रक्रिया से विभाग की छवि धूमिल होती है, साथ ही उन पुलिसकर्मियों का मनोबल भी टूटता है, जो ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे हैं। क्या जिले के जिम्मेदार अधिकारियों का यह फर्ज नहीं बनता कि वे हादसे होने से पहले ही अपने अधीनस्थ अधिकारियों को साथ लेकर सड़कों और चौराहों पर जागरूकता अभियान चलवाएं?क्या प्रशासन तभी सक्रिय होगा, जब NH-19 पर एक और लाश गिरेगी? पूरे जिले के हर वाहन में रेडियम लगवाना अब शौक नहीं, बल्कि अनिवार्य जरूरत है। दिखावे की कार्रवाई बंद होनी चाहिए। हादसे के बाद दो-चार दिन की चेकिंग और थाना प्रभारी या दरोगा पर गाज गिराने के बजाय, इसे एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बनाया जाए।
जागरूकता ही जीत है। ट्रैक्टर मालिकों और भारी वाहन चालकों को जागरूक किया जाए कि उनकी एक छोटी-सी लापरवाही किसी का सुहाग उजाड़ सकती है।कौशाम्बी की जनता को अब सस्पेंशन वाला नाटक नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़क चाहिए। जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान को चाहिए कि वे एक सख्त नीति बनाएं, जिससे जिले की हर सड़क पर चलने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे रेडियम चमकता नजर आए।ईमानदार सिपाही या दरोगा को दंडित करने के बजाय, उन्हें इस जीवन-रक्षक अभियान में लगाकर ही पूरे जिले में हादसों को रोका जा सकता है। याद रहे, रेडियम की एक छोटी-सी पट्टी की कीमत किसी की अनमोल जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती।