इन पांच पॉइंट्स से OP Rajbhar ने Akhilesh Yadav पर बोला जोरदार हमला, PDA को लेकर उठाए ये बड़े सवाल

OP Rajbhar News: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और योगी आदित्यनाथ सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर (OP Rajbhar) लगातार समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) पर हमलावर हैं।

Update:2026-06-02 18:10 IST

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OP Rajbhar News: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता जा रहा है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और योगी आदित्यनाथ सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर (OP Rajbhar) लगातार समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) पर हमलावर हैं। अब उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं और समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले को भी निशाने पर लिया है।

PDA नेताओं के मामलों पर उठाए सवाल

ओमप्रकाश राजभर (OP Rajbhar) ने समाजवादी पार्टी से जुड़े पिछड़े वर्ग के नेताओं की पिटाई और हत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों पर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले की बात समाजवादी पार्टी करती है, क्या इन घटनाओं के बाद भी वह उसी दावे पर कायम रह सकती है।

सपा समर्थकों पर लगाया अत्याचार का आरोप

यहां मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव और उनके समर्थकों पर दलितों, गैर यादव पिछड़ी जातियों और गरीबों के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि अगर अखिलेश यादव को लगता है कि वह या उनके नेताओं की धमकियों से डर जाएंगे तो यह उनकी गलतफहमी है।

उन्होंने कहा कि गरीबों, बहुजनों, आम नागरिकों और गैर यादव ओबीसी वर्ग के खिलाफ समाजवादी पार्टी के वोटर पिछले पांच दिनों में पांच बड़ी वारदातें कर चुके हैं और उनसे चुप रहने की अपेक्षा की जा रही है, लेकिन ऐसा संभव नहीं है।

पूछा- क्या यही है आपका पीडीए?

ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में कई घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के विधायक महाराजी प्रजापति के साथ मारपीट हुई। चंदौली में महिला सपा जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल के साथ मारपीट की घटना हुई। रामजन्म राजभर की हत्या हुई। धनराज मौर्य और सूर्या चौहान के मामलों का भी जिक्र किया गया। इसके अलावा लखनऊ में संदीप सिंह की निर्मम हत्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं, यह सभी जानते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी लोग अखिलेश यादव के ही शागिर्द हैं और शायद इसी वजह से उनकी जुबान इन घटनाओं पर अब तक नहीं खुली। राजभर ने कहा कि न तो घायलों का हालचाल पूछा गया और न ही मृतकों के परिवारों के लिए सांत्वना के शब्द कहे गए।

अखलाक मामले का भी किया जिक्र

अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए ओमप्रकाश राजभर ने वर्ष 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में हुई मोहम्मद अखलाक की हत्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और समाजवादी पार्टी की सरकार थी।

राजभर ने कहा कि अखलाक की मौत के बाद 45 लाख रुपये और ग्रेटर नोएडा में चार-चार फ्लैट दिए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा घटनाओं और निर्मम हत्याओं को देखकर अखिलेश यादव का दिल नहीं दुखता। उन्होंने कहा कि इस तरह के रवैये के कारण बहुजन और गैर यादव पिछड़ा समाज उनसे दूर हो चुका है।

बोले- ओमप्रकाश राजभर डरने वाला नहीं

ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में कहा कि नेताओं की धमकियों से वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले भी अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि उनके पास हुनर है और उन्होंने टेम्पो चलाकर भी दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। भविष्य में भी जरूरत पड़ी तो टेम्पो चलाकर संघर्ष करने का माद्दा रखते हैं।

अखिलेश यादव पर साधा व्यक्तिगत निशाना

राजभर (OP Rajbhar) ने कहा कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक नवाब परिवार से आते हैं और उन्होंने आम लोगों की तरह संघर्ष नहीं देखा। उन्होंने कहा कि दर्द, ठोकरें, पुलिस की गालियां, दारोगा के थप्पड़, अपमान और मारपीट का दर्द वही लोग समझ सकते हैं जो ऑटो, टेम्पो, रेहड़ी और खोमचा चलाकर जीवन यापन करते हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव केवल ट्विटर, एसी और पीसी वाले नेता हैं। उन्होंने कहा कि अगर कुछ और नहीं कर सकते तो कम से कम इस मुद्दे पर एसी में बैठकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ही कर दें।

चुनावी राजनीति के केंद्र में पिछड़ा वर्ग

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च के दौरान विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग राज्य की राजनीति का सबसे अहम केंद्र बन चुका है। समाजवादी पार्टी ने पिछड़ी जातियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को जोड़ने के लिए पीडीए फॉर्मूले को अपनी रणनीति का आधार बनाया है।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के अन्य सहयोगी दल भी इसी सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। चाहे मंत्रिमंडल विस्तार की बात हो या संगठनात्मक बदलाव, सत्ता पक्ष के फैसलों में पिछड़े वर्गों और जातीय समीकरणों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

कथनी और करनी पर सवाल

हाल के समय में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कुछ दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं के साथ कथित तौर पर हुई प्रताड़ना की घटनाओं को लेकर ओमप्रकाश राजभर लगातार हमलावर हैं। वह इन मामलों को सामने रखकर न केवल अखिलेश यादव को घेर रहे हैं, बल्कि समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहे हैं।

राजभर की कोशिश यह दिखाने की है कि समाजवादी पार्टी जिस सामाजिक न्याय और पीडीए की बात करती है, उसकी कथनी और करनी में अंतर है। विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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