SGPGI की बड़ी उपलब्धि: प्रसव के तुरंत बाद गर्भवती महिला की ओपन हार्ट सर्जरी
SGPGI Lucknow: एसजीपीजीआई लखनऊ के डॉक्टरों ने जटिल मामले में सिजेरियन डिलीवरी के बाद गर्भवती महिला की ओपन हार्ट सर्जरी कर मां और नवजात दोनों की जान बचाई। यह उपलब्धि चिकित्सा टीमवर्क का शानदार उदाहरण है।
SGPGI
SGPGI Lucknow: चिकित्सा विज्ञान और टीमवर्क का एक दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करते हुए संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के चिकित्सकों ने एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु दोनों की जान बचाने में सफलता हासिल की है। डॉक्टरों ने पहले सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित प्रसव कराया और उसके तुरंत बाद महिला की ओपन हार्ट सर्जरी कर हृदय के दो खराब वाल्व बदल दिए। जटिल और जोखिमपूर्ण मानी जाने वाली इन दोनों प्रक्रियाओं के सफल होने के बाद मां और नवजात बेटी दोनों स्वस्थ हैं।
संस्थान के चिकित्सकों के अनुसार यह उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला और देश में गिने-चुने मामलों में शामिल है, जहां प्रसव और हृदय की ओपन सर्जरी एक ही चिकित्सकीय योजना के तहत लगातार की गई।
32वें सप्ताह में बिगड़ी तबीयत
मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ (एमआरएच) विभाग के अनुसार गर्भावस्था के 32वें सप्ताह में महिला को सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ, तेज धड़कन और हृदय संबंधी गंभीर लक्षणों के कारण एसजीपीजीआई लाया गया। विस्तृत जांच में पता चला कि वह गंभीर रूमैटिक हार्ट डिजीज से पीड़ित है और उसके हृदय के दो वाल्व गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य प्रसव या सर्जरी, दोनों ही मां और शिशु के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण थीं।
डॉक्टरों ने बनाई संयुक्त उपचार रणनीति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, कार्डियोलॉजी, कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जरी (CVTS) तथा एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से उपचार की रणनीति तैयार की। 21 जुलाई को पहले सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से लगभग 2.1 किलोग्राम वजन की बच्ची का सुरक्षित जन्म कराया गया। इसके तुरंत बाद बिना समय गंवाए महिला को ओपन हार्ट सर्जरी के लिए तैयार किया गया और उसके हृदय के दोनों क्षतिग्रस्त वाल्व सफलतापूर्वक बदल दिए गए।
कुछ घंटों में स्थिति हुई स्थिर
डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति तेजी से सुधरी और कुछ ही घंटों में उसकी शारीरिक स्थिति स्थिर हो गई। नवजात बच्ची भी पूरी तरह स्वस्थ है। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर लिया गया निर्णय, विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के बीच समन्वय और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं ने इस जटिल मामले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रूमैटिक हार्ट डिजीज क्यों होती है खतरनाक?
रूमैटिक हार्ट डिजीज प्रायः बचपन में होने वाले अनुपचारित स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण के बाद विकसित होती है। यह बीमारी धीरे-धीरे हृदय के वाल्वों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। गर्भावस्था के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण ऐसी मरीजों में हृदय विफलता, प्रसव संबंधी जटिलताओं और मां-बच्चे दोनों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे मामलों में उपचार के लिए अत्यधिक अनुभवी बहु-विषयक (Multidisciplinary) चिकित्सा टीम की आवश्यकता होती है।
संस्थान ने टीम को दी बधाई
एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आर. के. धीमन ने इस जटिल चिकित्सा उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान की विशेषज्ञता, समन्वित चिकित्सा व्यवस्था और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इन विभागों ने निभाई अहम भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण उपचार में एमआरएच विभाग, कार्डियोलॉजी, सीवीटीएस और एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों, सर्जनों, एनेस्थेटिस्टों और रेजिडेंट डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने भाग लिया। सभी विभागों के समन्वित प्रयास से मां और नवजात दोनों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि गंभीर और जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों में बहु-विषयक विशेषज्ञता, समय पर निर्णय और आधुनिक चिकित्सा तकनीक असंभव दिखने वाली चुनौतियों को भी सफलतापूर्वक पार कर सकती है।