टोल फ्री होने के बावजूद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर नहीं बढ़ा ट्रैफिक, सड़क धंसने से घटा भरोसा

Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने की घटनाओं के बाद यात्रियों का भरोसा कम हुआ है। टोल फ्री होने के बावजूद वाहनों की संख्या घटी है।

Update:2026-08-07 18:03 IST

Lucknow Kanpur Expressway

Lucknow Kanpur Expressway: अत्याधुनिक सुविधाओं और तेज रफ्तार यात्रा के दावे के साथ शुरू किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (एनई-6) पर यात्रियों का भरोसा लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने और निर्माण संबंधी खामियां सामने आने के बाद वाहन चालकों ने इससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। स्थिति यह है कि टोल शुल्क अस्थायी रूप से समाप्त किए जाने के बावजूद वाहनों की संख्या बढ़ने के बजाय घट गई है। पिछले कुछ दिनों में एक्सप्रेसवे का उपयोग करने वाले वाहनों की संख्या में पांच हजार से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (एनएच-27) पर यातायात का दबाव फिर बढ़ने लगा है।

उम्मीदें बड़ी थीं, लेकिन भरोसा डगमगाया

13 जुलाई को लोकार्पित इस एक्सप्रेसवे को 14 जुलाई से आम यातायात के लिए खोल दिया गया था। उद्घाटन के समय इसे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिज़ाइन स्पीड वाला आधुनिक मार्ग बताया गया था। उम्मीद की जा रही थी कि बड़ी संख्या में वाहन पुराने हाईवे से हटकर इस नए एक्सप्रेसवे का उपयोग करेंगे, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

शुरुआती दिनों में ऐसा हुआ भी। नवाबगंज टोल प्लाजा के आंकड़ों के अनुसार एक्सप्रेसवे खुलने से पहले एनएच-27 पर प्रतिदिन लगभग 32 से 34 हजार वाहन गुजरते थे। एक्सप्रेसवे शुरू होने के पहले ही दिन करीब 13 हजार वाहन नए मार्ग पर स्थानांतरित हो गए, जिससे पुराने हाईवे पर ट्रैफिक घटकर लगभग 20 हजार वाहन प्रतिदिन रह गया।

धंसती सड़क ने बढ़ाई चिंता

26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-64 के पास पहली बार सड़क धंसने की घटना सामने आई। इसके बाद कुछ ही दिनों में कई अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की तकनीकी खामियां सामने आईं। लगातार ऐसी घटनाएं होने से वाहन चालकों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई।

यात्रियों का कहना है कि जिस मार्ग पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सुरक्षित यात्रा का दावा किया गया था, वहां अब वे 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी वाहन चलाने में असहज महसूस करते हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें हर समय आशंका बनी रहती है कि कहीं वाहन अचानक धंसे हुए हिस्से या क्षतिग्रस्त सड़क पर न पहुंच जाए।

टोल फ्री का असर भी नहीं दिखा

सुरक्षा संबंधी चिंताओं का असर यातायात के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन चलने वाले वाहनों की संख्या पहले 11 से 14 हजार के बीच थी, लेकिन हाल के दिनों में यह घटकर करीब 10 हजार रह गई। वहीं, टोल शुल्क हटाने के बाद भी यातायात में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

इसके विपरीत, एनएच-27 पर एक बार फिर भारी ट्रैफिक लौटने लगा है। नवाबगंज टोल प्लाजा के आंकड़ों के अनुसार 2 से 5 अगस्त के बीच प्रतिदिन 22 से 24 हजार वाहन इस मार्ग से गुजरे, जिनमें भारी वाहनों की संख्या भी उल्लेखनीय रही।

मरम्मत के लिए भारी वाहनों पर रोक

एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के चलते प्रशासन ने लखनऊ से कानपुर की दिशा में भारी वाहनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी। बनी टोल प्लाजा पर बैरिकेडिंग कर ट्रकों को रोका गया, हालांकि कुछ अन्य प्रवेश बिंदुओं से भारी वाहन एक्सप्रेसवे पर पहुंचते भी देखे गए। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद ही सामान्य यातायात पूरी तरह बहाल किया जाएगा।

पांच मीटर तक धंसा सड़क का हिस्सा

लखनऊ से कानपुर जाने वाले मार्ग पर किलोमीटर-63 के पास तेज रफ्तार लेन का लगभग पांच मीटर लंबा हिस्सा धंस गया। इसके अलावा किलोमीटर-64 पर बने लगभग 200 मीटर लंबे पुल के क्षतिग्रस्त भाग को हटाकर दोबारा तैयार किया जा रहा है। निर्माण एजेंसियां पुल और उसके दोनों ओर की सड़क की मरम्मत में जुटी हैं।

एलिवेटेड रोड पर भी सामने आई निर्माण संबंधी खामी

एक्सप्रेसवे से जुड़े निर्माण कार्यों पर सवाल यहीं नहीं थमे हैं। बंथरा बाजार क्षेत्र में बने एलिवेटेड रोड के गर्डरों के जोड़ ठीक से सील नहीं किए जाने के कारण बारिश का पानी सीधे नीचे सड़क पर गिर रहा है। इससे दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गर्डरों के जोड़ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं भरे गए। परिणामस्वरूप वर्षा का पानी लगातार रिसकर नीचे गिरता है, जिससे सड़क फिसलन भरी हो जाती है और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एक्सप्रेसवे की सफलता केवल उसकी गति या चौड़ाई से नहीं, बल्कि उसकी निर्माण गुणवत्ता, दीर्घकालिक मजबूती और यात्रियों के विश्वास से तय होती है। ऐसे में बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियां न केवल परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मरम्मत और गुणवत्ता सुधार के बाद क्या यह एक्सप्रेसवे दोबारा लोगों का भरोसा जीत पाएगा।

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