UP Panchayat Election पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब चुनाव तक ग्राम प्रधान ही चलाएंगे पंचायत
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आज सोमवार यानी 25 मई तक ही था। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी ग्राम पंचायतों में उनका ही दखल रहेगा।
UP Panchayat Election
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच योगी सरकार ने बड़ा निर्णय ले लिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में मौजूदा ग्राम प्रधान अब पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में काम करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आज सोमवार शाम तक इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दी हरी झंडी
दरअसल, उत्तर प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायतों के संचालन को लेकर सरकार के सामने नई व्यवस्था लागू करने की चुनौती थी। इसी को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिल गई है।
प्रदेश में पहली बार ग्राम पंचायतों में इस तरह प्रशासक समिति का गठन किया जाएगा। अब तक आमतौर पर ADO पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। इससे पंचायत चुनाव तक गांवों में विकास कार्यों की गति बनी रहेगी और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित नहीं होगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब ?
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की तैयारी है। यही वजह है कि सरकार को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर यह निर्णय लेना पड़ा। पंचायत चुनाव में देरी करने का एक बड़ा कारण है पंचायत वोटर लिस्ट पूरी तरह तैयार न होना। जानकारी के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 10 जून को जारी की जाएगी।
वहीं, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ ने भी सरकार से मांग की थी कि मौजूदा प्रधानों को ही चुनाव तक जिम्मेदारी दी जाए। हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रियाओं और राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के कारण पंचायत चुनाव में लगभग एक वर्ष तक की देरी की संभावना जताई जा रही है।
योगी सरकार के इस फैसले को ग्रामीण प्रशासन में स्थिरता बनाए रखने और विकास कार्यों को निरंतर जारी रखने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।