UP Politics: सबसे चर्चित 'अजीत सिंह हत्याकांड' के आरोपी की राजनीति में एंट्री! ओपी राजभर ने पहनाया सुभासपा का गमछा

UP Politics: इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और उसके सहयोगी दलों पर सवाल खड़े होना शुरू हो गए हैं।

Update:2026-05-19 14:08 IST

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त हलचल तेज हो गई है। खबर सामने आई है कि योगी सरकार के कार्यकाल के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में शामिल अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) जा दामन थाम लिया है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने खुद प्रदीप सिंह कबूतरा और संजीव सिंह बंटू को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और उसके सहयोगी दलों पर सवाल खड़े होना शुरू हो गए हैं।

2021 में हुए बहुचर्चित केस 

जानकारी के मुताबिक,  प्रदीप सिंह कबूतरा वही शख्स है जिसका नाम वर्ष 2021 में हुए बहुचर्चित 'अजित सिंह मर्डर केस' में सामने आया था। 6 जनवरी 2021 को राजधानी लखनऊ के विभूति खंड इलाके में मऊ के पूर्व ब्लॉक प्रमुख पति अजीत सिंह की दिनदहाड़े फ़ाइरिंग कर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे प्रदेश में जबरदस्त सनसनी फैला दी थी। हत्या के बाद पुलिस जांच में कई बड़े नाम भी सामने आए थे, जिनमें प्रदीप सिंह कबूतरा की भूमिका भी चर्चा में रही।

मामले में प्रदीप सिंह कबूतरा का नाम भी आया सामने 

जांच एजेंसियों के मुताबिक, प्रदीप सिंह कबूतरा पर यह आरोप था कि उसने शूटरों को आर्थिक सहयोग किया था और उन्हें पनाह दी। इतना ही नहीं, उसका नाम कासगंज जेल में बंद कुख्यात अपराधी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह और Lawrence Bishnoi गैंग से जुड़े शार्प शूटर राजन जाट उर्फ कुणाल के साथ भी जोड़ा गया था। इसी कारण से यह मामला उत्तर प्रदेश के सबसे हाई-प्रोफाइल क्रिमिनल केसों में गिना गया।

हत्या के बाद लखनऊ पुलिस ने आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी थी। पुलिस कार्रवाई तेज होने के बाद प्रदीप सिंह कबूतरा ने अप्रैल 2021 में आजमगढ़ की अदालत में सरेंडर कर दिया था। लंबे वक्त तक जेल में रहने के बाद हाल ही में उसकी रिहाई हुई और अब उसने राजनीति में सक्रिय कदम बढ़ाते हुए सुभासपा में शामिल हो गए हैं।

प्रदेश की राजनीति का चढ़ा पारा 

प्रदीप सिंह कबूतरा और संजीव सिंह बंटू की पार्टी में एंट्री के बाद प्रदेश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और उसके सहयोगियों को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं, सुभासपा की तरफ से अभी तक इस पर कोई विस्तृत रूप से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि पार्टी ने किन परिस्थितियों में दोनों नेताओं को सदस्यता दी।

इसे लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में अपराध और राजनीति के गठजोड़ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ सकता है।

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