Mahoba News: भारतीय किसान यूनियन ने किसानों की समस्याओं को लेकर मासिक पंचायत का आयोजन किया
Mahoba News: इस बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और अपनी ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा की।
भारतीय किसान यूनियन ने किसानों की समस्याओं को लेकर मासिक पंचायत का आयोजन किया (photo: social media )
Mahoba News: महोबा जनपद में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में मासिक पंचायत का आयोजन किया। इस बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और अपनी ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा की। बैठक के बाद, भाकियू के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक चार-सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
किसानों की प्रमुख मांगें और समस्याएं
अतिवृष्टि से फसल बर्बादी और मुआवजे की मांग: भाकियू पदाधिकारियों ने बताया कि जनपद के कई क्षेत्रों में भारी बारिश और जलभराव के कारण किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। संगठन ने प्रशासन से प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा प्रदान करने की मांग की ताकि वे अगली फसल की बुवाई कर सकें।
भूमि विवाद में न्याय: ज्ञापन में पनवाड़ी तहसील के ग्राम पनवाड़ी के किसान हरनारायन वारेलाल के भूमि विवाद का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि जमीन पर हरनारायन का अधिकार होने के बावजूद उन्हें कब्जा नहीं मिल पा रहा है। भाकियू ने प्रशासन से आग्रह किया कि पीड़ित किसान को न्याय दिलाते हुए उसकी भूमि पर शीघ्र कब्जा दिलाया जाए।
चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताएं: कुलपहाड़ कस्बा और उसके ग्रामीण क्षेत्रों में हुई चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और घोटालों को लेकर भी आवाज उठाई गई। भाकियू ने आरोप लगाया कि किसानों द्वारा कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन कोई निष्पक्ष जांच या समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने चकबंदी से जुड़ी शिकायतों की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की।
खराब विद्युत लाइन: ज्ञापन में कुलपहाड़ तहसील के ग्राम भुजपुरा परसौटा में 11,000 केवी विद्युत लाइन के खराब होने की शिकायत भी शामिल थी। किसानों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भाकियू ने ग्रामीणों की सुरक्षा और सुविधा के लिए विद्युत लाइन को तुरंत दुरुस्त करने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस मासिक पंचायत में संगठन के पदाधिकारी और क्षेत्रीय किसान बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जो किसानों की एकजुटता और अपनी मांगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।