Prayagraj News: विजय मिश्रा को उम्रकैद, 46 साल पुराने कचहरी हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला

Prayagraj News: 46 साल पुराने प्रयागराज कचहरी हत्याकांड में पूर्व विधायक Vijay Mishra समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा। एमपी-एमएलए कोर्ट ने हत्या मामले में सुनाया ऐतिहासिक फैसला।

Update:2026-05-13 17:14 IST

Prayagraj News: कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और इंसाफ की चक्की भले ही धीरे चलती है, लेकिन जब वह पीसती है तो बहुत बारीक पीसती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति और जुर्म की दुनिया में बड़ा नाम रखने वाले पूर्व विधायक विजय मिश्रा के लिए बुधवार का दिन उनके जीवन का सबसे काला दिन साबित हुआ। प्रयागराज की एक अदालत ने करीब साढ़े चार दशक पुराने एक हत्याकांड में विजय मिश्रा समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाकर यह साफ कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, सजा मिलकर ही रहती है। कचहरी परिसर में हुए इस खौफनाक कत्ल की गूंज 46 साल बाद एक बार फिर सुनाई दी, जब दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का आदेश जारी हुआ।

1980 का वो मंजर जब गोलियों की तड़तड़ाहट से दहला था प्रयागराज

यह कहानी शुरू होती है 11 फरवरी 1980 को, जब प्रयागराज का कचहरी परिसर आम दिनों की तरह लोगों की भीड़ से भरा हुआ था। नवाबगंज के हथिगहां गांव के रहने वाले प्रकाश नारायण पांडेय उस दिन अपनी जमानत के सिलसिले में दीवानी परिसर पहुंचे थे। दोपहर का समय था और वे कचहरी के भीतर ही छोटे लाल के होटल पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि मौत उनके ठीक पीछे खड़ी है। अचानक होटल के पिछले रास्ते से पूर्व विधायक विजय मिश्रा अपने साथियों संतराम, बलराम और जीत नारायण के साथ हाथों में असलहे लहराते हुए वहां दाखिल हुए।

होटल में सरेआम सीने पर दागी थी गोलियां

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने वहां पहुंचते ही गाली-गलौज और धमकी देना शुरू कर दिया। इससे पहले कि प्रकाश नारायण पांडेय कुछ समझ पाते या वहां से भागने की कोशिश करते, हमलावरों ने उनके सीने को निशाना बनाकर गोलियां दाग दीं। दिनदहाड़े हुई इस फायरिंग से पूरे कचहरी परिसर में भगदड़ मच गई और कई लोग इस गोलीबारी की चपेट में आकर घायल हो गए। खून से लथपथ प्रकाश को तुरंत स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने उस वक्त के प्रशासन और न्याय व्यवस्था की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि एक सुरक्षित माने जाने वाले कचहरी परिसर में घुसकर विधायक और उनके साथियों ने इस वारदात को अंजाम दिया था।

एमपी एमएलए कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और भारी जुर्माना

इस मामले की कानूनी लड़ाई बेहद लंबी और पेचीदा रही, जिसे प्रकाश के भाई श्याम नारायण पांडेय ने पूरी मजबूती के साथ लड़ा। आखिरकार 46 साल के लंबे इंतजार के बाद एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तृतीय ने मंगलवार को इन सभी को दोषी करार दिया और बुधवार को सजा का ऐलान किया। कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय मिश्रा, संतराम, बलराम और जीत नारायण को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। केवल जेल ही नहीं, बल्कि अदालत ने प्रत्येक दोषी पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है। सरकारी वकील सुशील वैश्य ने बताया कि सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने यह कड़ा फैसला सुनाया, जिससे समाज में एक कड़ा संदेश जाए।

कचहरी में छावनी जैसा माहौल और समर्थकों की भीड़

जब कोर्ट में सजा सुनाई जा रही थी, तब कचहरी परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी क्योंकि पूर्व विधायक के समर्थक और आम जनता बड़ी संख्या में वहां मौजूद थे। दोपहर करीब तीन बजे जैसे ही चारों दोषियों को कोर्ट के सामने पेश किया गया, माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। सजा का ऐलान होते ही पीड़ित परिवार की आंखों में संतोष के आंसू थे, वहीं दोषियों के चेहरे पर हार का डर साफ दिख रहा था। 1980 में शुरू हुआ यह खूनी खेल 2026 में आकर अपने अंजाम तक पहुंचा है, जो यह साबित करता है कि लोकतंत्र में न्याय की जीत हमेशा तय होती है।

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