Raebareli: रायबरेली में दुकानों पर ताला लगाना अधिकारियों को पड़ा भारी, लगा 11,000 का निजी जुर्माना

Raebareli News: रायबरेली के ऊंचाहार में दुकानों पर अवैध रूप से ताला लगाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल पर 11-11 हजार रुपये का निजी जुर्माना लगाया है।

Update:2026-06-08 21:15 IST

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Raebareli News: सरकारी शक्तियों के दुरुपयोग और कानून से परे जाकर काम करने वाले अधिकारियों पर कोर्ट ने सख्त चाबुक चलाया है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार तहसील का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां दुकानों पर अवैध रूप से ताला डालना (सीज करना) तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को भारी पड़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) के माननीय न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने इस कृत्य को पूरी तरह अवैध और 'ब्रश' (मनमाना) करार देते हुए तीनों अधिकारियों पर ₹11,000-₹11,000 का व्यक्तिगत जुर्माना (कॉस्ट) ठोक दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​मामला रायबरेली के तहसील ऊंचाहार के अंतर्गत तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण/अतिक्रमण हटाने से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) का है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (U.P. Revenue Code, 2006) की धारा 67(1) के तहत अतिक्रमण हटाने का आदेश पहले से प्रभावी था। हालांकि, अतिक्रमणकारियों की एक रिट याचिका हाईकोर्ट में लंबित थी, लेकिन उस पर कोर्ट की तरफ से कोई स्थगन आदेश (Interim Order/Stay) नहीं था।​इसके बावजूद, तत्कालीन तहसीलदार सुश्री आकांक्षा दीक्षित, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने के बजाय, निजी रेस्पोंडेंट्स (दुकानदारों) की दुकानों पर सरकारी ताला जड़ दिया।

​कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: "राजस्व अधिकारियों को ताला लगाने का हक नहीं"

​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों के इस कदम को कानून सम्मत मानने से साफ इनकार कर दिया। माननीय कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

​राजस्व संहिता में जब्ती का अधिकार नहीं: कोर्ट ने कहा कि भले ही राजस्व अधिकारियों के पास न्यायिक या अर्ध-न्यायिक शक्तियां हैं, लेकिन यू.पी. राजस्व संहिता, 2006 उन्हें किसी भी नागरिक की संपत्ति पर ताला लगाने (Confiscatory Powers) का अधिकार नहीं देती—चाहे वह जमीन अतिक्रमण की ही क्यों न हो।

​दुरुपयोग रोकने का तर्क खारिज: तहसीलदार ने अपने हलफनामे में सफाई दी थी कि उन्होंने संपत्ति का दुरुपयोग रोकने के लिए 'नेक नियति' (Bonafide Impression) से ताला लगाया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि ताला लगाना या कानून-व्यवस्था बनाए रखना तहसीलदार का कर्तव्य नहीं है।

​कानून का शासन सर्वोपरि: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर कोई जमीन अतिक्रमित है, तो कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार ही अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए। अधिकारियों को मनमाने ढंग से कुछ भी करने की खुली छूट नहीं दी जा सकती।

​सैलरी अकाउंट से कटेगा जुर्माना, पीड़ितों को मिलेगा हर्जाना

​अधिकारियों द्वारा माफी मांगे जाने और अगले 24 घंटे में ताला खोलने के आश्वासन के बावजूद, कोर्ट ने उनके इस गैर-कानूनी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया।तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल, तीनों अधिकारियों को ₹11,000-₹11,000 की राशि का डिमांड ड्राफ्ट (DD) अपने निजी सैलरी अकाउंट (Salary Account) से बनवाकर उन पीड़ित दुकानदारों को भुगतान करना होगा, जिनकी दुकानों पर ताला लगाया गया था। इसके साथ ही, भुगतान की रसीद को कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाना होगा।

​अगली सुनवाई 22 अप्रैल को

​कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अब कानून के दायरे में रहकर आदेश का पालन करें और अगली तारीख तक इसकी ताजा स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल, 2026 को तय की गई है, जिसमें अधिकारियों को तब तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि कोर्ट द्वारा विशेष रूप से न बुलाया जाए।

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