Sonbhadra News: सोनभद्र में आंगनबाड़ी विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप, मुख्य सेविका पर वसूली की FIR दर्ज

Sonbhadra News| सोनभद्र में आंगनबाड़ी विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। डीएम के आदेश पर मुख्य सेविका के खिलाफ वसूली और अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज की गई।

Update:2026-05-25 12:22 IST

Sonbhadra News(Photo-Social Media)

Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के चोपन ब्लॉक के आंगनबाड़ी विभाग में भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं से सरकारी धनराशि में अवैध कटौती और वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के निर्देश पर मुख्य सेविका के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। मामले ने पूरे बाल विकास विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

कार्यकत्रियों के हक पर डाका डालने का आरोप

जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने चोपन थाने में दी गई तहरीर में बताया कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के खातों में भेजी गई सरकारी धनराशि से अवैध वसूली की जा रही है। आरोप है कि सीडीपीओ मनोज सिंह के निर्देश पर मुख्य सेविका देवंती देवी ने कार्यकत्रियों और सहायिकाओं से रुपये वसूले। विभागीय जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पुष्टि हुई कि मार्च 2026 में सामुदायिक गतिविधियों के लिए भेजी गई 4500 रुपये की धनराशि में भी कटौती की गई। इतना ही नहीं, नई नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भेजे गए नौ हजार रुपये मानदेय एरियर और हार्ट कुक्ड मील योजना की राशि में भी अवैध वसूली किए जाने के आरोप सही पाए गए।

जांच रिपोर्ट पहुंचते ही प्रशासन में मचा हड़कंप

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पूरी रिपोर्ट निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार को भेजी। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी को भी पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया। शिकायतों और जांच रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए डीएम ने तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश जारी किया। चोपन थाना प्रभारी गोपाल जी गुप्ता ने बताया कि मुख्य सेविका के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह भी खंगाला जा रहा है कि वसूली का यह खेल कब से चल रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

वहीं इस पूरे प्रकरण ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के भरोसे गांवों में पोषण और बच्चों की देखभाल की योजनाएं संचालित होती हैं, उन्हीं के हिस्से की रकम में कथित कटौती ने सरकारी व्यवस्था की साख पर चोट पहुंचाई है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिक गई हैं।

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