Sonbhadra News: संविदा कर्मियों में गरजी संघर्ष समिति, ‘डाउन साइजिंग’ पर व्यवस्था बिगड़ने की चेतावनी
Sonbhadra News: सोनभद्र में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम में शामिल करने और हटाए गए कर्मचारियों की बहाली की मांग उठाई।
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Sonbhadra News: प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम में शामिल करने और हटाए गए कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा है कि भीषण गर्मी के समय अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाना प्रदेश की बिजली व्यवस्था से खिलवाड़ करने जैसा है। समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों का कहना है कि संविदा कर्मी वर्षों से कम वेतन में कठिन परिस्थितियों के बीच कार्य कर रहे हैं और बिजली व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार शोषण और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
‘डाउन साइजिंग’ के नाम पर कर्मचारियों को हटाने का आरोप
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि “डाउन साइजिंग” के नाम पर मनमाने तरीके से संविदा कर्मचारियों को सेवा से बाहर किया जा रहा है। समिति का कहना है कि इस फैसले से न केवल कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। समिति ने कहा कि गर्मियों के दौरान बिजली की मांग बढ़ जाती है और ऐसे समय में अनुभवी कर्मचारियों को हटाना व्यवस्था को कमजोर करने जैसा कदम है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
आउटसोर्सिंग निगम में शामिल करने की उठाई मांग
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित आउटसोर्सिंग निगम के अंतर्गत ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को तत्काल शामिल करने की मांग की है। समिति का कहना है कि आउटसोर्सिंग निगम की स्थापना का उद्देश्य ही अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों को शोषण से बचाना और उन्हें सुरक्षा व स्थायित्व देना था। समिति ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम प्रबंधन संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम के दायरे से बाहर रखने का प्रयास कर रहा है, जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।
पुराने पत्राचार और आदेशों का दिया हवाला
संघर्ष समिति ने बताया कि दिसंबर 2025 में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने शासन को पत्र लिखकर ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग निगम से बाहर रखने की मांग की थी। वहीं अप्रैल 2026 में आउटसोर्सिंग निगम के महानिदेशक ने स्पष्ट किया था कि ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को इससे बाहर नहीं रखा जा सकता। इसके बावजूद संविदा कर्मियों का उत्पीड़न लगातार जारी है। समिति ने मांग की कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार आंदोलन के कारण बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए।
निजीकरण के विरोध में आंदोलन तेज करने का ऐलान
संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर हुई दमनात्मक कार्रवाइयों को भी समाप्त करने की मांग उठाई। समिति का कहना है कि यदि कर्मचारियों का मनोबल तोड़ा गया तो प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के तहत सोमवार को अयोध्या और देवीपाटन में विरोध सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, रणवीर सिंह, महेंद्र राय और सुहेल आबिद ने संबोधित किया और संविदा कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई को और तेज करने का आह्वान किया।