फर्जी परमिट गिरोह का पर्दाफाश, गिट्टी-बालू के अवैध परिवहन को वैध दिखाने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार

Sonbhadra News: सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने फर्जी सिक्योरिटी पेपर और परमिट तैयार कर गिट्टी-बालू के अवैध परिवहन को वैध दिखाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया।

Update:2026-08-11 20:34 IST

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Sonbhadra News: गिट्टी-बालू के अवैध परिवहन को वैध दिखाने के लिए फर्जी सिक्योरिटी पेपर और परमिट तैयार करने वाले गिरोह का रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल HP कंपनी का लैपटॉप, Canon कंपनी का प्रिंटर, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चार्जर, 5,900 रुपये नकद और फर्जी सिक्योरिटी पेपर तैयार करने में प्रयुक्त डिजिटल सामग्री बरामद की गई है। पुलिस की कार्रवाई से अवैध खनिज परिवहन के लिए फर्जी कागजात तैयार करने वाले नेटवर्क में खलबली मच गई है।

पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन में जिले में अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन और फर्जी दस्तावेज तैयार कर राजस्व एवं शासकीय व्यवस्था को क्षति पहुंचाने वाले अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक नगर अनिल कुमार के निर्देशन, क्षेत्राधिकारी पिपरी हर्ष पाण्डेय एवं क्षेत्राधिकारी नगर रणधीर मिश्रा के पर्यवेक्षण में रॉबर्ट्सगंज पुलिस को यह सफलता मिली।मामला थाना रॉबर्ट्सगंज में पंजीकृत मुकदमा अपराध संख्या 555/2026 से जुड़ा है। इसमें धारा 303(2), 317(2), 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस, धारा 4/21 खान एवं खनिज (विकास का विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा धारा 3 सार्वजनिक सम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 के तहत अभियोग दर्ज है। मुकदमे में वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए क्षेत्राधिकारी नगर के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक रॉबर्ट्सगंज रामस्वरूप वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार तलाश कर रही थी।

 मुखबिर की सूचना पर मंदिर परिसर में घेराबंदी

पुलिस टीम चौकी हिन्दुआरी क्षेत्र के तेन्दु नहर के पास वांछित आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मुकदमे से संबंधित आरोपी तेन्दु (मगुरही) स्थित हनुमान जी मंदिर परिसर में एकत्र हैं और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस की अचानक कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। टीम ने मौके से अश्विनी पटेल, उमेश यादव, हिमांशु पाण्डेय और शक्तिमान कुमार को गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ और बरामदगी से फर्जी परमिट तैयार करने के पूरे तरीके का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार आरोपी ब्लैंक सिक्योरिटी पेपर/फार्म-11 को डिजिटल माध्यम से एडिट करते थे। इसके बाद उसमें वाहन संख्या, चालक का नाम-पता, गिट्टी-बालू की मात्रा और अन्य खनिज संबंधी विवरण दर्ज कर फर्जी परमिट तैयार किया जाता था। तैयार दस्तावेजों का इस्तेमाल खनिज लदे वाहनों के परिवहन में किया जाता था।

ब्लैंक पेपर से नकली परमिट तक बंटा था काम

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका तय थी। हिमांशु पाण्डेय ब्लैंक सिक्योरिटी पेपर उपलब्ध कराता था। अश्विनी पटेल और उमेश यादव इन पेपरों को शक्तिमान कुमार के सहज जनसेवा केंद्र पर ले जाते थे। वहां लैपटॉप की मदद से सिक्योरिटी पेपर में जरूरत के अनुसार विवरण एडिट किया जाता था और प्रिंटर से तैयार दस्तावेज निकाले जाते थे।फर्जी परमिट में वाहन संख्या, चालक का नाम-पता, खनिज की मात्रा और परिवहन से संबंधित अन्य जानकारियां दर्ज की जाती थीं। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर गिट्टी-बालू लदे वाहनों का परिवहन कराया जाता था। इस पूरे खेल से आरोपी आर्थिक लाभ कमाते थे और अवैध खनिज परिवहन को कागजों पर वैध दिखाने की कोशिश करते थे।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 16 जून 2026 और 22 जून 2026 को भी फर्जी सिक्योरिटी पेपर तैयार कराए थे। इन दस्तावेजों और इनके माध्यम से कराए गए खनिज परिवहन के संबंध में पुलिस विस्तृत विवेचनात्मक और तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कागजात के सहारे कितने वाहनों का संचालन कराया गया और इस नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

लैपटॉप और प्रिंटर बने अहम सुराग

गिरफ्तार आरोपी शक्तिमान कुमार के कब्जे से HP कंपनी का लैपटॉप और Canon कंपनी का प्रिंटर बरामद हुआ है। पुलिस के अनुसार इन्हीं उपकरणों का इस्तेमाल फर्जी सिक्योरिटी पेपर तैयार करने में किया जाता था। इसके अलावा चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन, लैपटॉप एवं प्रिंटर के चार्जर, 5,900 रुपये नकद तथा फर्जी सिक्योरिटी पेपर तैयार करने में प्रयुक्त डिजिटल सामग्री और उपकरण भी बरामद किए गए हैं।पुलिस बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की तकनीकी जांच भी कर रही है। जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले संपर्कों, इस्तेमाल किए गए डिजिटल डेटा और खनिज परिवहन से जुड़े अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी सामने आ सकती है। पुलिस का मानना है कि तकनीकी जांच से गिरोह के नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

गिरफ्तार आरोपियों में अश्विनी पटेल पुत्र मनोज सिंह पटेल, निवासी ग्राम कूराकला, थाना पन्नूगंज, जनपद सोनभद्र, उम्र करीब 22 वर्ष; उमेश यादव पुत्र संजय, निवासी ग्राम अतरवा शमशेर, थाना नौगढ़, जनपद चंदौली, उम्र करीब 22 वर्ष; हिमांशु पाण्डेय पुत्र राजकुमार पाण्डेय, निवासी प्रीतनगर, थाना चोपन, जनपद सोनभद्र, उम्र करीब 22 वर्ष तथा शक्तिमान कुमार पुत्र धनेश सिंह, निवासी हलिया बांध, थाना चकरघट्टा, जनपद चंदौली, उम्र करीब 28 वर्ष शामिल हैं।चारों आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत/चालान किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों, बरामदगी और विवेचनात्मक तथ्यों के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है।

इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा थाना रॉबर्ट्सगंज, निरीक्षक नागेश सिंह प्रभारी एसओजी जनपद सोनभद्र मय टीम, हेड कांस्टेबल संदीप राय, कांस्टेबल रुपेश कुमार, हेड कांस्टेबल संदीप यादव, हेड कांस्टेबल अवनीश सिंह, कांस्टेबल अभिमन्यु पाण्डेय, कांस्टेबल दीपक सिंह तथा चालक हेड कांस्टेबल नन्दलाल राम शामिल रहे। पुलिस की इस कार्रवाई से फर्जी दस्तावेजों के सहारे खनिज परिवहन के खेल पर बड़ा प्रहार हुआ है। अब जांच की दिशा इस बात पर है कि इस नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं और फर्जी परमिट के जरिए कितने खनिज लदे वाहनों को रास्ता दिया गया।

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