Sonbhadra:घघरी की बदहाल सड़क पर उबाल, PWD की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
Sonbhadra News: सोनभद्र के घघरी में 2 किमी कच्ची सड़क से 3 हजार लोग परेशान, IGRS शिकायत के बाद भी समाधान नहीं; ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
Sonbhadra News: नपद के बभनी में घघरी पुनर्वास स्थल के वजूद में आने के दशकों बीत जाने के बाद भी बभनी मुख्य संपर्क जंगल मार्ग पर डामर की एक परत तक नहीं बिछ सकी है। प्रदेश सरकार के त्वरित निस्तारण और जीरो टॉलरेंस के तमाम दावों पर लोक निर्माण विभाग (PWD) का यह ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बेहद भारी पड़ता दिख रहा है।
अफ़सरों का टालमटोल और हवा में उड़ते सरकारी वादे
क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता उमा प्रसाद उर्फ उमंग गुप्ता ने जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर शिकायत (संदर्भ संख्या 40020026014048) दर्ज कराई थी। शासन के सख्त निर्देशों के अनुसार 17 अगस्त तक इस जनहित के मुद्दे का समाधान होना अनिवार्य था। इसके बावजूद अधिशासी अभियंता प्रांतीय खण्ड, सोनभद्र ने तय तारीख बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर कोई समाधान आख्या अपलोड नहीं की। विभागीय अधिकारियों का यह उदासीन और उपेक्षापूर्ण रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें आम जनता की परेशानियों से कोई खास सरोकार नहीं रह गया है।
दो किलोमीटर का कच्चा रास्ता और तीन हजार जिंदगियों की मजबूरी
यह मात्र दो किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग क्षेत्र की करीब 3,000 से अधिक आबादी के लिए मुख्य जीवन रेखा समान है। ब्लॉक मुख्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इंटर कॉलेज और स्थानीय थाने तक पहुँचने का यही सबसे सीधा जरिया है। पक्की सड़क के अभाव में आपातकालीन स्थिति में मरीजों, रोजाना स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और अपनी उपज ले जाने वाले किसानों को मजबूरन 15 से 20 किलोमीटर का बेहद जोखिम भरा और लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।
धरने-प्रदर्शन का असर बेअसर, दफ़्तरी खींचतान में उलझा विकास
सड़क निर्माण की जायज मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा हाल के दिनों में दो बार व्यापक स्तर पर धरना-प्रदर्शन भी किया जा चुका है। प्रशासनिक दफ्तरों में ज्ञापनों और पत्रों का अंबार लग चुका है, पर पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभागों की आपसी खींचतान व हीलाहवाली के कारण कागजी प्रक्रिया धरातल पर उतर ही नहीं पा रही है।
प्रशासन को सीधी चेतावनी और उग्र जनांदोलन की तैयारी
निर्धारित समय-सीमा खत्म होने पर उमंग गुप्ता ने पोर्टल पर कड़ा रिमाइंडर भेजकर लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि विभाग ने जल्द ही संयुक्त स्थलीय मुआयना कर सड़क निर्माण और मरम्मत का काम शुरू नहीं कराया, तो ग्रामीण जन-आंदोलन का रास्ता चुनने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।