Sonbhadra News: 125 दिन रोजगार गारंटी पर जोर, पंच सम्मेलन में वीबीजी राम जी योजना की जानकारी
Sonbhadra News: सोनभद्र में पंच सम्मेलन के दौरान वीबीजी राम जी योजना की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को दी गई। योजना में ग्रामीण परिवारों के लिए 125 दिन रोजगार, बेरोजगारी भत्ता और गांव की जरूरत के अनुसार विकास कार्यों का प्रावधान बताया गया।
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Sonbhadra News: ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देने के साथ गांवों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को आयोजित पंच सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों को विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबीजी राम जी योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। सम्मेलन में योजना के प्रावधानों, ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियों और ग्रामीणों को मिलने वाले अधिकारों से पंचायत प्रतिनिधियों को अवगत कराया गया।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, म्योरपुर ब्लाक प्रमुख मान सिंह गोंड़, वीबीजी राम जी अधिकारी रविन्द्र वीर सिंह सहित ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
125 दिन के रोजगार पर जोर
सम्मेलन में बताया गया कि योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है। इससे गांवों में काम के अवसर बढ़ने के साथ जरूरतमंद परिवारों की आय को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। काम की मांग करने के बावजूद निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था भी की गई है।मजदूरों को समय से मेहनताना मिले, इस पर भी योजना में विशेष ध्यान दिया गया है। भुगतान में देरी होने पर विलंबित अवधि के लिए मजदूरी के साथ मुआवजा दिए जाने का प्रावधान रखा गया है।योजना के तहत विकास कार्यों के चयन में ग्राम सभा की भूमिका को पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण बनाया गया है। ग्रामीणों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतें विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेंगी। इसमें गांव की प्राथमिक समस्याओं और आवश्यकताओं के आधार पर विकास कार्यों का चयन किया जाएगा।जल संरक्षण, जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, आजीविका के साधनों को बढ़ावा देने तथा मौसम और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई। इससे रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण भी होगा, जिनका लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को मिल सके।
खेती के समय नहीं होंगे योजना के काम
कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए बुवाई और कटाई के प्रमुख समय में श्रमिकों की उपलब्धता बनाए रखने की व्यवस्था भी योजना में की गई है। इसके लिए वर्ष में कुल 60 दिनों की अवधि निर्धारित किए जाने का प्रावधान है, जिसमें योजना के तहत कार्य संचालित नहीं किए जाएंगे। इससे ग्रामीण श्रमिकों को खेती-किसानी के जरूरी कार्यों में पर्याप्त समय मिल सकेगा।योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासनिक मद की सीमा छह प्रतिशत से बढ़ाकर नौ प्रतिशत किए जाने का प्रावधान बताया गया। इससे ग्राम रोजगार सहायकों, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायकों की सेवाओं, प्रशिक्षण और क्षमता विकास के साथ योजना की निगरानी एवं संचालन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।इसके अलावा गांवों में होने वाले विभिन्न विकास कार्यों को राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जोड़ने की व्यवस्था भी बताई गई। इससे अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और एक ही प्रकार के कार्यों की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
मनरेगा के मौजूदा काम चलते रहेंगे
सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों को स्पष्ट किया गया कि मनरेगा के तहत पहले से चल रहे कार्यों पर नए प्रावधानों का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान कार्य पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जारी रहेंगे और नए प्रावधान प्रभावी होने के बाद नियमानुसार नए कार्य शुरू किए जाएंगे।जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल ने कहा कि गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिनिधियों से योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए पात्र परिवारों तक इसकी जानकारी पहुंचाने और ग्राम सभा में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने कहा कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ बेहतर आजीविका सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता बनाए रखने पर जोर दिया।सम्मेलन में योजना के प्रचार-प्रसार को लेकर भी पंचायत प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। ग्राम पंचायत भवनों, ग्राम सभा स्थलों, सरकारी कार्यालयों और सामुदायिक भवनों पर पोस्टर व होर्डिंग लगाने के साथ पैम्फलेट के माध्यम से ग्रामीणों को जानकारी देने को कहा गया, ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक पहुंच सके।