Sonbhadra News: पीआरवी जवानों को मिला सीपीआर प्रशिक्षण, अब कानून-व्यवस्था के साथ बचाएंगे जान

Sonbhadra News: सोनभद्र पुलिस लाइन चुर्क में पीआरवी कर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। जवानों को आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और गोल्डन ऑवर में जीवन बचाने की तकनीक सिखाई गई।

Update:2026-08-08 21:24 IST

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Sonbhadra News: पुलिस की ड्यूटी अब केवल कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क हादसा हो या अचानक किसी की सांस थम जाए, दिल की धड़कन रुकने की स्थिति हो या कोई व्यक्ति बेसुध पड़ा मिले—मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले पीआरवी कर्मी अब तत्काल जीवन रक्षक सहायता देने में भी सक्षम होंगे। इसी उद्देश्य से शनिवार को पुलिस लाइन चुर्क में जनपद के पीआरवी पर तैनात सभी कर्मचारियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और गोल्डन ऑवर के दौरान जीवन बचाने की तकनीक का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

आपात स्थिति में पहला सहारा बनेंगे पीआरवी कर्मी

08 अगस्त को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी भी दुर्घटना अथवा चिकित्सकीय आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में एंबुलेंस या चिकित्सकीय सहायता पहुंचने से पहले मौके पर मौजूद पीआरवी कर्मी की त्वरित कार्रवाई पीड़ित के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें सीपीआर की आवश्यकता, सही प्रक्रिया, सावधानियों और तत्काल प्रतिक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें सीपीआर की प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। हृदय गति रुकने अथवा व्यक्ति के बेहोश होने जैसी परिस्थितियों में किस तरह स्थिति का आकलन करना है और किस प्रकार तत्काल जीवन रक्षक सहायता शुरू करनी है, इसका अभ्यास कराया गया।

गोल्डन ऑवर में हर सेकंड की अहमियत

प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आपात स्थिति में समय गंवाना पीड़ित के लिए भारी पड़ सकता है। पीआरवी कर्मियों को प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता यानी फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है। किसी दुर्घटना की सूचना मिलते ही पीआरवी मौके पर पहुंचती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के पास कानून-व्यवस्था संभालने के साथ ही घायल अथवा अचेत व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक जीवन रक्षक सहायता देने की क्षमता होना बेहद जरूरी है।सीपीआर प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को ऐसी परिस्थितियों के लिए व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है, जिसमें चिकित्सकीय सहायता पहुंचने से पहले पीड़ित की स्थिति को संभालना आवश्यक हो। प्रशिक्षण के दौरान सही तकनीक के साथ-साथ आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी गई, ताकि आपात स्थिति में पुलिसकर्मी आत्मविश्वास के साथ तत्काल कार्रवाई कर सकें।

हादसे से लेकर बेहोशी तक, तत्काल मदद का लक्ष्य

सोनभद्र जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले जिले में पुलिस की पीआरवी व्यवस्था आपातकालीन सहायता की महत्वपूर्ण कड़ी है। सड़क हादसे, अचानक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति अथवा अन्य आकस्मिक घटनाओं में पीआरवी कर्मियों की त्वरित मौजूदगी कई बार बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है। ऐसे में उन्हें जीवन रक्षा से जुड़ी प्राथमिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने से मौके पर मिलने वाली सहायता और अधिक प्रभावी हो सकेगी।प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह भी समझाया गया कि पीड़ित की स्थिति का तत्काल आकलन करने, जरूरत के अनुसार प्राथमिक सहायता शुरू करने और संबंधित चिकित्सा सहायता को सक्रिय कराने में समन्वय बेहद जरूरी है। उद्देश्य यही है कि आपात स्थिति में पुलिस की पहुंच केवल घटनास्थल तक न रहे, बल्कि वहां से जीवन बचाने की कार्रवाई भी तत्काल शुरू हो।

जनसुरक्षा के साथ अब जीवन रक्षा पर भी जोर

सोनभद्र पुलिस की ओर से पुलिसकर्मियों की दक्षता बढ़ाने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पीआरवी कर्मियों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों की फर्स्ट रिस्पॉन्डर क्षमता को मजबूत करने के साथ ही दुर्घटनाओं और अन्य आकस्मिक घटनाओं में मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

पुलिस का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ जनसुरक्षा और जीवन रक्षा को भी अपनी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। आपात स्थिति में मौके पर पहुंचने वाला पुलिसकर्मी यदि शुरुआती महत्वपूर्ण समय में जीवन रक्षक कदम उठा सके तो किसी की जिंदगी बचाने की संभावना काफी बढ़ सकती है। इसी सोच के साथ पीआरवी कर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण देकर उन्हें और अधिक सक्षम बनाया गया है।सोनभद्र पुलिस का यह प्रयास पुलिसिंग को केवल कार्रवाई और नियंत्रण तक सीमित रखने के बजाय जरूरत की घड़ी में नागरिकों के लिए तत्काल सहारा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब पीआरवी की गाड़ी के सायरन के साथ मौके पर पहुंचने वाले जवान कानून-व्यवस्था संभालने के साथ जरूरत पड़ने पर किसी की जिंदगी बचाने की कोशिश भी कर सकेंगे।

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