Sonbhadra News: आउटसोर्स पोर्टल बना नई छंटनी का हथियार? संविदाकर्मियों की रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
Sonbhadra News: सोनभद्र में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आउटसोर्स पोर्टल व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। समिति का आरोप है कि इससे हजारों संविदा विद्युतकर्मियों के वेतन और रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है।
Sonbhadra News
Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हजारों संविदा विद्युतकर्मियों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। यहां सोनभद्र में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के उस आदेश पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके तहत जून माह का भुगतान जुलाई से केवल आउटसोर्स पोर्टल के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था लागू की जा रही है। समिति का आरोप है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता के नाम पर संविदाकर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी का नया रास्ता बन सकती है।संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि आदेश के विभिन्न प्रावधानों का अध्ययन करने पर स्पष्ट आशंका पैदा होती है कि पोर्टल पर दर्ज नामों और वास्तविक रूप से कार्यरत कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह की विसंगति को आधार बनाकर हजारों संविदाकर्मियों को भुगतान से वंचित किया जा सकता है या फिर उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
पोर्टल में नाम नहीं तो वेतन भी नहीं!
समिति ने चेतावनी दी है कि जिन कर्मचारियों का नाम किसी कारणवश पोर्टल पर दर्ज नहीं है या जिनकी उपस्थिति तकनीकी कारणों से ऐप में दर्ज नहीं हो पा रही है, उनके सामने वेतन रुकने और नौकरी जाने का खतरा खड़ा हो गया है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है।संघर्ष समिति का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही संविदा कर्मचारियों की भारी कमी है। कई विद्युत उपकेंद्र न्यूनतम मानव संसाधन के सहारे संचालित हो रहे हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ रहा है और कई स्थानों पर कर्मचारियों के साथ अभद्रता तथा मारपीट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
बिजली व्यवस्था दबाव में, फिर भी घटाई जा रही कर्मचारी संख्या
शनिवार को समिति ने सवाल उठाया कि जब बिजली व्यवस्था पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है, तब प्रबंधन आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय संविदाकर्मियों की संख्या और कम करने की दिशा में कदम क्यों बढ़ा रहा है। इससे न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि उपभोक्ताओं की परेशानियां भी बढ़ेंगी। संघर्ष समिति ने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर संविदा कर्मियों की न्यूनतम संख्या तय की गई थी। आज तक उस आदेश में कोई संशोधन नहीं किया गया है, लेकिन मार्च 2023 से लगातार बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों को कार्य से हटाया जाता रहा है।
ऊर्जा मंत्री के सामने हुआ समझौता भी ठंडे बस्ते में
समिति ने आरोप लगाया कि मार्च 2023 में ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में हटाए गए संविदाकर्मियों की बहाली को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं किया गया। हजारों कर्मचारी दो वर्षों से पुनर्बहाली की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। संघर्ष समिति का कहना है कि हटाए गए कर्मचारियों को वापस लेने के बजाय नए प्रशासनिक उपायों के जरिए और अधिक कर्मियों को बाहर करने की तैयारी की जा रही है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
मुख्यमंत्री के निर्देश लागू हों, सभी कर्मी आउटसोर्स सेवा निगम के तहत आएं
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि समस्या का समाधान छंटनी नहीं, बल्कि सभी संविदा कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाना है। इससे श्रमिकों का शोषण रुकेगा, भुगतान व्यवस्था पारदर्शी बनेगी और बिजली विभाग को पर्याप्त मानव संसाधन भी उपलब्ध हो सकेगा। समिति ने मांग की है कि वर्ष 2017 के आदेश के अनुसार आवश्यक संख्या में संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए, मार्च 2023 से हटाए गए सभी कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति की जाए तथा आउटसोर्स सेवा निगम की नियमावली के अनुरूप सभी संविदाकर्मियों को न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन और अन्य निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।संघर्ष समिति ने चेताया है कि यदि संविदा कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और छंटनी की प्रक्रिया जारी रही तो प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है तथा कर्मचारियों में व्यापक असंतोष पैदा हो सकता है।