Unnao News: संघ का लक्ष्य भारतमाता को विश्व गुरु बनाना है: अनिल
Unnao News: उन्नाव में संघ शिक्षा वर्ग के समापन पर अनिल ने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और पंच परिवर्तन से भारत विश्व गुरु बनेगा।
संघ का लक्ष्य भारतमाता को विश्व गुरु बनाना है: अनिल (Photo- Newstrack)
Unnao News: उन्नाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का समापन समारोह शनिवार को सम्पन्न हुआ। समापन अवसर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से संगठित, सक्षम और राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा पद्धति व्यक्ति निर्माण का एक प्रभावी माध्यम है, जिसके जरिए समाज जागरण और व्यवस्था परिवर्तन का कार्य निरंतर चल रहा है।
शिक्षा वर्ग से मिलता है त्याग, तपस्या और अनुशासन का संस्कार
अपने उद्बोधन में श्री अनिल जी ने संघ शिक्षा वर्ग के उद्देश्य और महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों को त्याग, तपस्या, समर्पण और अनुशासन का प्रशिक्षण देता है। यह केवल शारीरिक या बौद्धिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्ग में प्राप्त संस्कार स्वयंसेवकों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराते हैं तथा उन्हें समाज जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के साथ चुनौतियों पर भी जताई चिंता
अनिल जी ने कहा कि भारत आज भौतिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। देश में अनेक विकास कार्य हो रहे हैं और विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सामने कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभावना के क्षय, जनसंख्या असंतुलन, अंधाधुंध पाश्चात्य अनुकरण, अत्यधिक भौतिकता और जीवन मूल्यों में गिरावट जैसी समस्याओं को चिंता का विषय बताया। उनका कहना था कि इन चुनौतियों का सामना समाज को सामूहिक रूप से करना होगा।
राष्ट्र को सर्वोपरि मानने की आवश्यकता
मुख्य वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि समाज राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर अपने कर्तव्यों का पालन करे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल भावनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यवहार और आचरण में दिखाई देनी चाहिए। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेगा तभी राष्ट्र सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बन सकेगा।
पंच परिवर्तन से संभव है व्यापक सामाजिक सुधार
अनिल जी ने संघ द्वारा प्रतिपादित “पंच परिवर्तन” की अवधारणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वबोध और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे विषय आज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि समाज इन क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए गंभीर प्रयास करेगा तो राष्ट्र जीवन में व्यापक सुधार संभव होगा।
भारतीय संस्कृति विश्व कल्याण का मार्ग दिखाती है
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार विश्व कल्याण की भावना है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देने वाली भारतीय संस्कृति सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्त और संस्कारित समाज ही विश्व के सामने आदर्श प्रस्तुत कर सकता है। भारतीय जीवन मूल्यों, पारिवारिक व्यवस्था और समरस सामाजिक दृष्टि को अपनाकर न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व का कल्याण किया जा सकता है।
स्वयंसेवकों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान
अनिल जी ने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे वर्ग में प्राप्त प्रशिक्षण और संस्कारों को अपने दैनिक जीवन में उतारें। साथ ही समाज के प्रत्येक वर्ग तक राष्ट्रभक्ति, सेवा और संगठन का संदेश पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि संघ का स्वयंसेवक अपने आचरण, व्यवहार और सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनता है।
भन्ते शील रतन जी ने स्वस्थ समाज और राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदस्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान तथा बुद्धिस्ट सोसायटी फॉर अंजू एंड सोशल वेलफेयर लखनऊ के अध्यक्ष भन्ते श्री शील रतन जी ने भी स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि शरीर स्वस्थ होता है तो मन भी स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत पहले भी विश्व गुरु था और आगे भी विश्व गुरु रहेगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र और समाज परिवर्तन एक दिन में होने वाला कार्य नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक स्वयंसेवक अपने घर और अपनी गली को बेहतर बनाने का संकल्प ले ले तो पूरे भारत में परिवर्तन दिखाई देने लगेगा।
22 मई से चल रहा था प्रशिक्षण वर्ग
संघ शिक्षा वर्ग का आयोजन 22 मई से किया जा रहा था, जिसका समापन शनिवार को हुआ। वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षार्थी रविवार सुबह दीक्षांत समारोह के बाद अपने-अपने घरों के लिए रवाना होंगे। ये शिक्षार्थी अवध प्रांत के विभिन्न जिलों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए उन्नाव पहुंचे थे।
26 जिलों के 334 शिक्षार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
वर्ग में अवध प्रांत के 26 जिलों के 169 खंड और नगरों के 281 स्थानों से कुल 334 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इनमें 24 परास्नातक, 64 स्नातक, 12 शिक्षक और 192 इंटरमीडिएट छात्र शामिल रहे। विभिन्न आयु वर्ग के इन सभी शिक्षार्थियों ने वर्ग का शुल्क, गणवेश तथा अपने निवास स्थान से वर्ग तक आने-जाने का पूरा खर्च स्वयं वहन किया।
1 लाख 20 हजार रोटियों का हुआ संग्रह
वर्ग के दौरान भोजन व्यवस्था में भी समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम और नगर के परिवारों से प्रतिदिन दोनों समय के भोजन के लिए 20-20 रोटियों का संग्रह किया गया। पूरे वर्ग के दौरान कुल 1 लाख 20 हजार रोटियों का संग्रह हुआ, जिससे शिक्षार्थियों के भोजन की व्यवस्था की गई।
बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
समापन समारोह में अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख नवल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी प्रमोद जी, वर्ग कार्यवाह कृष्ण कुमार जी, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद जी, सह व्यवस्था प्रमुख सुशील जी, प्रांत प्रचारक कौशल जी, सह प्रांत प्रचारक संजय जी, प्रांत प्रचारक प्रमुख यशोदा नन्द जी, सह प्रांत कार्यवाह संजय जी, डॉ. अविनाश जी, संपर्क प्रमुख गंगा सिंह जी, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे, सामाजिक समरसता प्रमुख राज किशोर सहित शिक्षक, शिक्षार्थी, बड़ी संख्या में नगर के स्वयंसेवक, गणमान्य नागरिक और वर्ग में सहयोग करने वाले नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के साथ संघ शिक्षा वर्ग का औपचारिक समापन हुआ।