UP: बिजली विभाग में ‘महा-घोटाले’ का भंडाफोड़, एकाउंटेंट ने उड़ाए 7 करोड़, एक गलती से हुआ पर्दाफाश

UP Electricity Department Scam: बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग के एक लेखाकार (अकाउंटेंट) ने कार्यदायी संस्था को भुगतान किए जाने वाले लगभग सात करोड़ रुपये अपने और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए।

Update:2026-06-17 09:51 IST

UP Electricity Department Scam

UP Electricity Department Scam: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग के एक लेखाकार (अकाउंटेंट) ने कार्यदायी संस्था को भुगतान किए जाने वाले लगभग सात करोड़ रुपये अपने और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए। मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी को पहले निलंबित किया गया, फिर गिरफ्तार किया गया और अब विभाग ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच के अनुसार अब तक गबन की गई राशि में से 3 करोड़ 13 लाख 91 हजार रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष 3 करोड़ 76 लाख 65 हजार रुपये की रिकवरी के प्रयास जारी हैं।

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए गोरखपुर के तत्कालीन मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव, उप महाप्रबंधक (लेखा) संतोष कुमार मिश्रा और वरिष्ठ लेखाकार नरेंद्र कुमार पांडेय की एक समिति गठित की गई थी। समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी लेखाकार केशवेंद्र द्विवेदी के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। केशवेंद्र द्विवेदी मूल रूप से प्रयागराज का निवासी बताया जाता है।

कैसे हुआ करोड़ों रुपये का गबन?

जांच में सामने आया कि राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 27 मार्च 2004 को कार्यदायी संस्था मेसर्स एनसीसी लिमिटेड (हैदराबाद) को 6 करोड़ 90 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। लेकिन लेखाकार ने फर्जीवाड़ा करते हुए यह पूरी राशि अपने और अपने परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर दी। एक खाते में अचानक इतनी बड़ी रकम पहुंचने पर बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ। उन्होंने इसकी सूचना पूर्वांचल डिस्कॉम प्रबंधन को दी। इसी दौरान संबंधित कंपनी ने भी भुगतान नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई। जांच में पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।

पूछताछ के दौरान फरार, बाद में किया सरेंडर

घोटाले का खुलासा होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने आरोपी से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान वह अधिकारियों को चकमा देकर फरार हो गया। करीब तीन महीने तक फरार रहने के बाद उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी लगभग आठ महीने तक जेल में रहा और बाद में हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त कर ली। जमानत मिलने के बाद उसने विभाग में दोबारा ज्वाइन नहीं किया और लंबे समय तक लापता रहा।

पत्नी- रिश्तेदारों के खातों में भेजी रकम

जांच में यह भी पता चला कि गबन की गई राशि का बड़ा हिस्सा आरोपी ने अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया था। उसकी पत्नी भी बिजली विभाग में लेखाकार के पद पर कार्यरत है। बताया जाता है कि सबसे अधिक धनराशि उसकी पत्नी के खाते में भेजी गई थी।

घोटाले के पैसों से खरीदी आलीशान संपत्तियां

जांच एजेंसियों को पता चला कि आरोपी ने गबन के पैसों से कई महंगी संपत्तियां खरीदी थीं। शहर के पॉश इलाकों में डुप्लेक्स और फ्लैट खरीदने के साथ-साथ प्रयागराज में भी संपत्ति अर्जित की गई। इसके अलावा वह लग्जरी जीवनशैली का शौकीन था। महंगी घड़ियां, लाखों रुपये के मोबाइल और लैपटॉप तथा एक लग्जरी कार भी उसकी संपत्तियों में शामिल बताई जा रही हैं। अब विभाग शेष राशि की वसूली और आरोपी की संपत्तियों की जांच में जुटा हुआ है।

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