UP News: मिडिल ईस्ट संकट का झटका बेअसर! खाड़ी देशों को यूपी के निर्यात में 56% की जोरदार रिकवरी
Uttar Pradesh Export: मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूपी के निर्यात में बड़ी रिकवरी हुई है। 2026 की पहली छमाही में खाड़ी देशों को निर्यात में 56% का उछाल दर्ज हुआ। नए बाजारों ने कारोबार को संभाला।
Uttar Pradesh Export (Image Credit-Social Media)
लखनऊ: मध्य पूर्व एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के हालातों से बेपटरी हुआ उत्तर प्रदेश का विदेशी व्यापार अब तेजी से पटरी पर लौटने लगा है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के साथ व्यापारिक गतिविधियों में आए सुधार और यूपी के निर्यातकों द्वारा नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश की रणनीति रंग लाने लगी है। वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत तक यूपी से खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में 56 प्रतिशत की जोरदार रिकवरी दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व में छिड़े संघर्ष और अनिश्चितता के कारण वर्ष के शुरुआती महीनों—जनवरी से मार्च 2026 के बीच—उत्तर प्रदेश के निर्यात को करारा झटका लगा था। लाल सागर और फारस की खाड़ी के शिपिंग रूट्स पर बढ़ते खतरे व कंटेनर संकट के चलते जीसीसी देशों (संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान) को होने वाले निर्यात में 68.4 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई थी। इस अवधि में महज दो कारोबारी महीनों के भीतर प्रदेश के निर्यातकों को करीब 1,929 करोड़ रुपये के व्यापार का सीधा नुकसान उठाना पड़ा था।
संकट लंबा खिंचने पर उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय निर्यातकों ने नुकसान की भरपाई के लिए आक्रामक बाजार विविधीकरण (मार्केट डायवर्सिफिकेशन) की रणनीति अपनाई। खाड़ी देशों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अफ्रीकी, मध्य एशियाई और गैर-पारंपरिक बाजारों में यूपी के ओडीओपी (ODOP) उत्पादों—जैसे चमड़ा उद्योग, कालीन, पीतल के हस्तशिल्प, परिधान और कृषि उत्पादों—की नई आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार की गईं।
इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक और लॉजिस्टिक माध्यमों से वैकल्पिक समुद्री व हवाई व्यापार मार्ग सक्रिय हुए, जिसके परिणामस्वरूप 30 जून 2026 तक निर्यात में 56 फीसदी का शानदार उछाल देखा गया। हालांकि, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में निर्यात का कुल आंकड़ा अब भी करीब 12 प्रतिशत कम है, लेकिन इसमें लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।
निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अधिकारियों के मुताबिक, आने वाली तिमाहियों में यह 12 फीसदी का घाटा भी पूरी तरह भर जाएगा और वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही तक प्रदेश का कुल निर्यात पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पार करने की स्थिति में होगा। नए देशों के साथ बने कारोबारी रिश्तों और खाड़ी देशों की मांग में आई तेजी ने यूपी के एमएसएमई और निर्यात सेक्टर में नई जान फूंक दी है।