Lucknow News: लखनऊ में डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल, रिटायर्ड FCI अफसर से ठगे ₹42 लाख

Lucknow News: लखनऊ के कैसरबाग में साइबर ठगों ने पुलवामा और मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर रिटायर्ड FCI अफसर से ₹42 लाख ठग लिए। दंपती को 19 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया।

Update:2026-08-19 23:42 IST

Lucknow News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ: राजधानी के कैसरबाग क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग दंपती को झूठे आतंकी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का खौफ दिखाकर 19 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा और जीवनभर की जमा-पूंजी से 42 लाख रुपये ठग लिए। लालबाग निवासी भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सेवानिवृत्त अधिकारी अंसार जमाल अब्बासी की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राथमिकी के अनुसार, ठगी की शुरुआत 23 जुलाई को दोपहर करीब 1:32 बजे हुई जब अंसार जमाल को वॉट्सऐप पर एक अज्ञात ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि पुलवामा आतंकी हमले में पकड़े गए आतंकियों ने जेट एयरवेज से जुड़े मनीष गोयल का नाम लिया है। जालसाज ने दावा किया कि मनीष के पास मिले दस्तावेजों की जांच में अब्बासी के नाम पर जारी सिम कार्ड और कर्नाटक स्थित आईसीआईसीआई बैंक का एक खाता मिला है, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है।

फर्जी दस्तावेज, सीबीआई जांच और जज से बात कराने का बनाया दबाव

जालसाज ने बुजुर्ग को डराते हुए कहा कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं, इसलिए उन्हें सीधे जेल नहीं भेजा जा रहा बल्कि उन्हें और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' किया जा रहा है। इसके बाद पहली ही कॉल में रात 10 बजे तक पूछताछ कर बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और पत्नी के गहनों का पूरा ब्योरा ले लिया गया। विश्वसनीयता दिखाने के लिए वॉट्सऐप पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के फर्जी लेटरहेड और दस्तावेज भी भेजे गए।

अगले दिन सुबह आई वीडियो कॉल में दूसरे जालसाज ने खुद को एटीएस (ATS) पुणे का अधिकारी बताया और कहा कि केस सीबीआई को ट्रांसफर हो गया है तथा जल्द ही हाईकोर्ट के जज भी बात करेंगे। जालसाजों ने दंपती को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए कहा कि उनके मोबाइल फोन पर जैमर लगा दिया गया है और वे किसी रिश्तेदार या परिचित से संपर्क नहीं कर सकते।

23 जुलाई से 10 अगस्त तक चला वसूली का खेल

जमानत और जांच से नाम हटाने का झांसा देकर जालसाजों ने 23 जुलाई से 10 अगस्त के बीच बुजुर्ग दंपती से कई किश्तों में कुल 42 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। 10 अगस्त की रात करीब 10 बजे ठगों ने संपर्क तोड़ दिया। ठगी का अहसास होने पर गहरा सदमा झेल रहे पीड़ित दंपती ने परिजनों के सहयोग से साइबर क्राइम थाने पहुंचकर 14 अगस्त को मामला दर्ज कराया। इंस्पेक्टर आलोक राव के मुताबिक, पुलिस ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच कर रही है और रकम को होल्ड कराने के लिए बैंकों से संपर्क किया गया है।

डिजिटल अरेस्ट से सतर्कता और बचाव के उपाय

कानूनी हकीकत: भारतीय कानून या किसी भी सुरक्षा/जांच एजेंसी (पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी) में 'डिजिटल अरेस्ट' या फोन/वीडियो कॉल पर नजरबंद करने का कोई प्रावधान नहीं है।

अनजान कॉल्स से सतर्कता: अज्ञात नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल्स, विशेषकर वर्दी पहने या आधिकारिक लोगो दिखाने वाले कॉलर्स से सावधान रहें। एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या आर्थिक जानकारी नहीं मांगतीं।

पैसे ट्रांसफर न करें: जांच, सत्यापन या खातों के ऑडिट के नाम पर कभी किसी खाते में धनराशि न भेजें।

तत्काल शिकायत दर्ज कराएं: किसी भी संदिग्ध कॉल या धमकी की स्थिति में बिना डरे तुरंत नजदीकी थाने जाएं, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।

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