Varanasi News: वाराणसी में साइबर ठगी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश, 143 लोगों से ₹116.86 करोड़ ठगे; सरगना समेत 4 गिरफ्तार

Varanasi News: वाराणसी में पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का खुलासा किया है। 143 लोगों से ₹116.86 करोड़ की ठगी के मामले में सरगना समेत 4 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।

Update:2026-08-24 22:32 IST

Varanasi News (Image Credit-Social Media)

वाराणसी। वाराणसी की साइबर क्राइम सेल और चेतगंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देशभर के 143 लोगों से 116 करोड़ 86 लाख 58 हजार 321 रुपये की भारी साइबर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना नीतीश कुमार पांडेय समेत चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य फरार साथियों—प्रतीक तिवारी उर्फ बंटी और रोमिल वर्मा—की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और बरामदगी

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:

  • नीतीश कुमार पांडेय (सरगना - मूल निवासी: रोहतास, बिहार)
  • दुष्यंत सिंह (निवासी: दुर्गाकुंड, वाराणसी)
  • हिमांशु झा (निवासी: शिवपुरवा-छित्तूपुर, वाराणसी)
  • मो. रेहान (निवासी: शिवाला, वाराणसी)

पुलिस ने इनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 40 डेबिट कार्ड, 2 क्रेडिट कार्ड, 4 शॉपिंग कार्ड, 1 ग्रीन रेमिट कार्ड, 1 गेमिंग कार्ड, 19 चेकबुक, 6 पासबुक, 48 क्यूआर कोड स्कैनर सहित एक रॉयल एनफील्ड बुलेट और स्कोडा रैपिड कार बरामद की है।

ठगी का मॉडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका)

1. फर्जी फर्म और म्यूल खाते (Mule Accounts): आरोपी भोले-भाले लोगों को कमीशन और त्वरित मुनाफे का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी फर्में और बैंक (करेंट व सेविंग्स) खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद पूरी वेलकम किट, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और सिम कार्ड खुद रख लेते थे।

2. XePay एपीके और ओटीपी बाईपास: एसीपी साइबर क्राइम विनय द्विवेदी के अनुसार, गिरोह 'XePay' नाम की दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) फाइल डाउनलोड कराकर एसएमएस फॉरवर्डिंग चालू करवा देता था, जिससे बैकएंड से सीधे सभी ओटीपी हासिल हो जाते थे।

3. गेमिंग, सट्टेबाजी और हवाला रूट: सट्टेबाजी (Betting), ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए ऐंठी गई रकम को 41 से अधिक बैंक खातों में तेजी से घुमाया जाता था और फिर तुरंत निकाल लिया जाता था।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और तकनीकी पृष्ठभूमि

जांच में सामने आया है कि गिरोह के तार चीन, कंबोडिया और दुबई से संचालित बड़े विदेशी साइबर सिंडिकेट्स से जुड़े हो सकते हैं। आरोपी वर्ष 2021-22 से सक्रिय थे। गिरोह के कई सदस्य उच्च शिक्षित और कंप्यूटर प्रशिक्षित हैं, जिन्होंने बीसीए (BCA) और एमसीए (MCA) जैसी तकनीकी डिग्रियां हासिल कर रखी हैं।

आरोपी दुष्यंत सिंह के खिलाफ इससे पहले भी हरियाणा और वाराणसी के भेलूपुर थाने में साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों पर इतने सारे चालू खाते खोलने में निजी बैंकों के किन-किन कर्मचारियों की मिलीभगत रही है।

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