Uttarakhand News:राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर CM धामी ने उत्कृष्ट बुनकरों और शिल्पकारों को किया सम्मानित

Uttarakhand News: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। जानें उत्तराखंड सरकार की योजनाओं और लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल।

Update:2026-08-07 20:21 IST

Uttarakhand News (Image Credit-Newstrack)

देहरादून। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद की ओर से आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने पारंपरिक बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से बने उत्पादों की खरीद कर स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बुनकर और शिल्पकार अपनी कला, मेहनत और कौशल के जरिए पीढ़ियों से इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को मिल रही नई पहचान



 मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प अपनी विशिष्टता, गुणवत्ता और विविधता के कारण देश-दुनिया में पहचान बना रहे हैं। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से बने उत्पाद प्रदेश की समृद्ध लोक कला और परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की मांग अब राष्ट्रीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। ऐसे में पारंपरिक उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय कारीगरों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ पर जोर


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को बढ़ावा मिल रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने से छोटे बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों को नए अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक परिधानों और हस्तशिल्प को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन जरूरी है। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

278 बुनकरों और शिल्पियों को मिला चार करोड़ से अधिक का ऋण



 मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई है। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से करीब 834 लोगों को रोजगार मिला है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से बुनकरों और शिल्पकारों को आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रशिक्षण और बाजार से जोड़े जा रहे शिल्पकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बुनकरों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन योजना के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है।



  उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मेलों और प्रदर्शनियों के जरिए उत्तराखंड के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के कई पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी विशिष्ट पहचान और मजबूत हुई है।

‘स्थानीय उत्पाद खरीदना किसी परिवार की आजीविका को समर्थन देना’

 


 मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब भी कोई वस्तु खरीदने का अवसर हो, उसके स्थानीय विकल्प पर जरूर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हथकरघा या हस्तशिल्प का कोई उत्पाद खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं है, बल्कि इससे किसी बुनकर परिवार की आजीविका, किसी शिल्पकार के स्वाभिमान और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समर्थन मिलता है।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों की खरीद को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन मिलता है तो इससे रोजगार के साथ-साथ उत्तराखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पांडेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी और महिला शिल्पकार मौजूद रहे।

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