US Iran Tensions: ईरान को लेकर अमेरिकी युद्ध सचिव का बयान, बम और बातचीत दोनों पर दिया ऑफर

US Iran Tensions: अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनी तो अमेरिका जरूरत पड़ी तो अमेरिका बमों से बातचीत करेगा।

Update:2026-06-11 12:54 IST

Donald Trump

US Iran Tensions: अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका 'बमों से बातचीत' करेगा। सा‍थ ही ईरान को चेतावनी दी कि जब तक तेहरान परमाणु समझौते के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तें नहीं मानता, तब तक अमेरिकी हमले जारी रह सकते हैं।

बुधवार को (स्थानीय समय) फ्लोरिडा के मैकडिल एयरफोर्स बेस पर स्थित यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) मुख्यालय में हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि और सैन्य कार्रवाइयां पहले से ही योजना में हैं और तब तक जारी रह सकती हैं, जब तक ईरान वाशिंगटन के साथ परमाणु समझौता नहीं कर लेता।

परमाणु समझौते पर ट्रंप की शर्तें और अमेरिकी रुख

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सेंट्रल कमांड आज रात काफी व्यस्त रहेगा, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, ‘हम ईरान पर जबरदस्‍त हमला करेंगे।' हेगसेथ ने कहा, “ईरान के पास एक बहुत अच्छा समझौता करने का मौका है, जो तय हुआ था, उसे पूरा करें। लेकिन वे ऐसा करने को तैयार नहीं दिखे हैं।” हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने बातचीत को बार-बार टाला है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही एक पूरा कूटनीतिक रास्ता दे चुके हैं। वे बार-बार टालमटोल कर रहे हैं। अब अमेरिका की तरफ से ईरान के अहम ठिकानों पर बम गिरेंगे।

प्रोजेक्ट फ्रीडम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीति

हेगसेथ ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' नाम के एक नए ऑपरेशन के बारे में भी बताया, जिसका मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना है, जबकि ईरान के साथ तनाव जारी है। उनके अनुसार, 100 मिलियन से ज्यादा बैरल तेल इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से अमेरिकी सुरक्षा के तहत गुजर चुका है। उन्होंने कहा क‍ि संयुक्त राज्य अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित करता है।

ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई है

हेगसेथ ने दावा किया कि हाल की कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हुई है। उनकी नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और शक्ति दिखाने की क्षमता पर असर पड़ा है। हमें साफ पता है कि ताकत के इस मुकाबले में कौन मजबूत है और कौन नहीं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या आगे चलकर हमले पुलों, बिजली व्यवस्था या अन्य ढांचों पर भी हो सकते हैं, तो उन्होंने ऑपरेशन की जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि अमेरिका बिना सोचे-समझे हमला नहीं करता। उन्होंने कहा, “हम अपने तरीके और अपने चुने हुए लक्ष्यों पर हमला करेंगे, ताकि हमारे ऑपरेशन का माहौल बेहतर हो और ईरान की क्षमता कमजोर हो सके।”

अमेरिका-ईरान परमाणु विवाद की मौजूदा स्थिति

हेगसेथ बार-बार यही बात दोहराते रहे कि ईरान के पास अभी भी समझौता करने का मौका है। राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के सबसे बड़े डील मेकर हैं। वे समझौता करने के लिए तैयार हैं। ईरान को यह मौका लेना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि आगे और सैन्य कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ी तो राष्ट्रपति युद्ध विभाग को आदेश देंगे। अगर हमें बमों के जरिए बातचीत करनी पड़ी, तो हम वही करेंगे। और हम इसमें बहुत अच्छे हैं। दुनिया में हमसे बेहतर कोई नहीं।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उसकी मध्य-पूर्व रणनीति का मुख्य लक्ष्य है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत देने के क्रम को लेकर मतभेदों के कारण बातचीत बार-बार रुक जाती है।

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