समुद्र के बीच 'हंतावायरस' का कहर! डच क्रूज शिप पर मौत का तांडव, 12 देशों में हाई अलर्ट, WHO ने क्या बताया?

WHO Hantavirus alert 2026: डच क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस का खौफ! समुद्र के बीच 3 यात्रियों की मौत के बाद WHO ने 12 देशों में हाई अलर्ट जारी किया। जानिए कितना खतरनाक है यह वायरस, कैसे फैलता है और क्या दुनिया फिर किसी नई महामारी की ओर बढ़ रही है?

Update:2026-05-07 21:26 IST

WHO Hantavirus alert 2026: अर्जेंटीना के तटों से रवाना हुए एक आलीशान डच क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' पर इन दिनों सन्नाटा और खौफ पसरा हुआ है। जिस जहाज पर लोग छुट्टियां मनाने और समुद्र की लहरों का आनंद लेने निकले थे, वहां आज मौत का साया मंडरा रहा है। इस जहाज पर हंतावायरस (Hantavirus) का ऐसा प्रकोप फैला है कि अब तक तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं। इस घटना ने न केवल यात्रियों के परिवारों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि की है कि जहाज से जुड़े अब तक 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें से पांच में वायरस की पुष्टि हो चुकी है।

आखिर क्या है हंतावायरस और कैसे फैला यह खौफ?

हंतावायरस कोई नया नाम नहीं है, लेकिन इसकी मारक क्षमता बेहद खतरनाक है। जानकारों के अनुसार, यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और कृतकों (Rodents) के जरिए फैलता है। चूहों के सलाइवा (लार), उनके पेशाब या मल के संपर्क में आने से इंसान इसकी चपेट में आ सकते हैं। क्रूज शिप जैसे बंद वातावरण में, जहां वेंटिलेशन सीमित होता है, वहां चूहों की मौजूदगी इस वायरस को तेजी से फैला सकती है। डच जहाज पर पहली मौत 11 अप्रैल को हुई थी, जब एक पुरुष यात्री ने दम तोड़ दिया। शुरुआत में इसे सामान्य सांस की बीमारी समझा गया, लेकिन जब जहाज डॉक हुआ और एक संक्रमित व्यक्ति की जोहानसबर्ग में मौत हुई, तब जाकर जांच में हंतावायरस का सच सामने आया।

12 देशों में हाई अलर्ट: WHO ने दी सख्त चेतावनी

इस वायरस की गंभीरता को देखते हुए WHO ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। उन 12 देशों को आधिकारिक तौर पर अलर्ट जारी किया गया है, जिनके नागरिक सेंट हेलेना में इस जहाज से नीचे उतरे थे। इस सूची में ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर जैसे बड़े देश शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल जहाज पर मौजूद अन्य यात्रियों में कोई सक्रिय लक्षण नहीं देखे गए हैं। लेकिन वैज्ञानिकों की चिंता कम नहीं हुई है, क्योंकि इस वायरस की इनक्यूबेशन अवधि (शरीर में पनपने का समय) 6 हफ्ते तक हो सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कुछ और मामले सामने आने का डर बना हुआ है।

क्या यह एक और कोरोना महामारी है? विशेषज्ञों का जवाब

पूरी दुनिया में इस समय एक ही सवाल गूंज रहा है क्या हम एक और 2020 (कोविड-19) जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं? इस पर WHO प्रमुख ने मीडिया ब्रीफिंग में स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह कोरोना वायरस नहीं है और न ही यह कोई महामारी है। यह वैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है, जैसी दुनिया ने छह साल पहले देखी थी।" विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस के ज्यादातर स्ट्रेन इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलते। डॉ. मारिया ने बताया कि यह वायरस कोरोना की तरह हवा के जरिए नहीं, बल्कि शारीरिक संपर्क या बहुत नजदीकी फिजिकल रिलेशन के जरिए ही फैल सकता है। इसलिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कुल जोखिम फिलहाल कम माना जा रहा है।

जहाज पर विशेषज्ञों की टीम और 'मौत के साइलेंट' लक्षण

WHO के विशेषज्ञों की एक टीम नीदरलैंड के डॉक्टरों के साथ फिलहाल काबो वर्दे में जहाज पर सवार हो चुकी है। यह टीम जहाज के कैनेरी द्वीप समूह पहुंचने तक यात्रियों की गहन मेडिकल जांच करेगी। हंतावायरस का हमला बहुत ही शांत लेकिन घातक होता है। शुरुआत में मरीज को हल्का बुखार, बदन दर्द और कमजोरी महसूस होती है, जिसे लोग अक्सर मामूली फ्लू समझ लेते हैं। लेकिन इसके बाद यह फेफड़ों पर हमला करता है। वायरस खून की नसों को इतना कमजोर कर देता है कि तरल पदार्थ फेफड़ों में भर जाता है। मरीज को ऐसी घुटन महसूस होती है जैसे वह पानी के बाहर होकर भी डूब रहा हो। ऐसे हालात में सिर्फ ECMO मशीन ही मरीज की जान बचा सकती है। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां इस संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं।

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