'हिंदुओं ने कभी आक्रमण नहीं किया', फिर माफी क्यों? अमेरिका में RSS का बड़ा बयान
Dattatreya Hosabale RSS: RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने अमेरिका में हिंदू पहचान, संगठन की विचारधारा और वैश्विक स्तर पर RSS की भूमिका पर विस्तार से बात की।
Dattatreya Hosabale RSS
Dattatreya Hosabale RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव Dattatreya Hosabale ने अमेरिका दौरे के दौरान संगठन और हिंदू पहचान को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने Washington DC में Hudson Institute में आयोजित एक चर्चा में कहा कि हिंदुओं का इतिहास आक्रामक नहीं रहा है। उनके अनुसार, “हिंदुओं ने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया और न ही किसी को गुलाम बनाया। इसलिए हिंदुओं को किसी भी बात के लिए माफी मांगने की आवश्यकता नहीं है।”
RSS की विचारधारा और कार्यशैली
होसबाले ने RSS को एक स्वैच्छिक सामाजिक आंदोलन बताते हुए कहा कि यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं और सभ्यतागत मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य ऐसे स्वयंसेवकों को तैयार करना है जिनमें चरित्र, आत्मविश्वास और समाज सेवा की भावना हो। उन्होंने कहा कि RSS नियमित रूप से दैनिक और साप्ताहिक एक घंटे की शाखाएं आयोजित करता है, जिनके माध्यम से जीवन मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाती है। उनका कहना था कि इन गतिविधियों का लक्ष्य समाज में एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करना है।
सामाजिक कार्य और सेवा गतिविधियां
होसबाले ने यह भी बताया कि RSS केवल वैचारिक संगठन नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग बढ़ाने तक, संगठन कई क्षेत्रों में काम करता है। उन्होंने कहा कि RSS से जुड़े स्वयंसेवकों ने करीब 40 नागरिक संस्थाओं की स्थापना की है, जो समाज के विकास में योगदान दे रही हैं।
हिंदू पहचान पर व्यापक दृष्टिकोण
हिंदू पहचान के बारे में पूछे गए सवाल पर होसबाले ने कहा कि RSS इसे धार्मिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत पहचान के रूप में देखता है। उनके अनुसार, यह पहचान सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं से जुड़ी है, न कि किसी एक धर्म तक सीमित है।
उन्होंने भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच तनाव पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार राजनीतिक हितों और इतिहास की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण मतभेद पैदा होते हैं। उनका मानना है कि संवाद और आपसी समझ के जरिए इन समस्याओं को हल किया जा सकता है।
अमेरिका में RSS का उद्देश्य
होसबाले ने स्पष्ट किया कि उनका अमेरिका दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य संगठन के बारे में फैली गलत धारणाओं को दूर करना और उसकी विचारधारा को स्पष्ट करना है। उन्होंने एक कार्यक्रम में यह भी कहा कि भारत में पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें शिक्षा प्रणाली में बदलाव भी शामिल है।