तीसरे विश्व युद्ध का डर! मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ईरान ने दी खुली चेतावनी; कहा- हर हाल में जंग के लिए तैयार
Iran Israel War: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि देश किसी युद्ध की तैयारी नहीं कर रहा, लेकिन किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
Iran Israel War
Iran Israel War: हाल ही में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया था। इस युद्ध के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा हुई। अब, युद्धविराम को चार महीने बीत चुके हैं और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने देश की रक्षा तैयारियों पर बड़ा बयान दिया है।
ईरान की तैयारी और रुख
अब्बास अराघची ने अमेरिका-आधारित पत्रकार दरियूश सज्जादी को दिए इंटरव्यू में कहा कि आज ईरान की सेना पहले से कहीं ज्यादा तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “युद्ध के लिए तैयार रहना, युद्ध की इच्छा रखना नहीं है।” उन्होंने कहा “अगर आप लड़ने के लिए तैयार हैं, तो कोई हमला करने की हिम्मत नहीं करता। मुझे पूरा विश्वास है कि पिछला अनुभव दोहराया नहीं जाएगा।” इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान किसी नए संघर्ष की तलाश में नहीं है, लेकिन वह किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत कर रहा है।
ईरान-इजराइल युद्ध का पृष्ठभूमि
इस साल जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक भीषण संघर्ष हुआ था। यह युद्ध तब शुरू हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुई पांच दौर की बातचीत किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी। 61वें दिन, यानी 13 जून को समझौता विफल होने के बाद इजराइल ने अचानक सैन्य अभियान छेड़ दिया। 22 जून को अमेरिका ने भी इस्फहान, नतांज और फोर्दो में ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों पर हवाई हमले किए। हालांकि, 24 जून को अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ, लेकिन इस संघर्ष ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक चिंता और बढ़ा दी।
परमाणु कार्यक्रम पर विवाद
युद्ध के बाद एक और गंभीर मुद्दा उठा ईरान के 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम का पता नहीं चल सका। तेहरान ने दावा किया कि यह सामग्री अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के मलबे के नीचे दब गई है। हालांकि, उसने अब तक अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को उन स्थलों तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी है। अराघची ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानूनी है। उन्होंने कहा, “हमारा परमाणु सिद्धांत हथियारों से जुड़ा नहीं है। हम संवर्धन करते हैं क्योंकि यह हमारा अधिकार है, बम बनाने के लिए नहीं।” संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी (IAEA) का मानना है कि इतनी उच्च शुद्धता तक संवर्धन का कोई नागरिक उद्देश्य नहीं हो सकता, जिससे अंतरराष्ट्रीय संदेह और गहरा गया है।
अमेरिका के साथ संबंध और कूटनीति
अराघची ने अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर स्पष्ट कहा कि ईरान ने कई बार संवाद और समझौते की कोशिश की, लेकिन अमेरिका ने हर बार भरोसा तोड़ा।उन्होंने बताया कि सितंबर में UN महासभा के दौरान बातचीत का अवसर था, मगर अमेरिकी पक्ष ने “अव्यावहारिक मांगें” रखीं, जैसे कि 6 महीने की स्नैपबैक अवधि के बदले ईरान को अपने सभी संवर्धित पदार्थ सौंपने होंगे। अराघची ने कहा, “कौन सा समझदार देश ऐसा प्रस्ताव स्वीकार करेगा? इसका ईरान से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि अब अमेरिका पर भरोसे का कोई आधार नहीं बचा, हालांकि ईरान ने यह भी जोड़ा कि वह कूटनीति से पीछे नहीं हटेगा। अगर अमेरिका ईमानदारी और आपसी सम्मान के साथ बातचीत करना चाहता है, तो ईरान भी एक तार्किक और संतुलित समझौते के लिए तैयार है।
ईरान का भविष्य दृष्टिकोण
अराघची ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी कीमत पर अपने राष्ट्रीय अधिकारों और गरिमा से पीछे नहीं हटेगा। देश किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकेगा नहीं, लेकिन यदि कोई निष्पक्ष और न्यायसंगत समाधान सामने आता है, तो तेहरान बातचीत के लिए खुला रहेगा।