कर्फ्यू, सेना और हेलिकॉप्टर...नेपाल में 4 दिन से भयंकर बवाल जारी, 3 की मौत, दर्जनों घायल
Nepal Communal Clash Curfew: नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा लगातार चौथे दिन भी जारी है। सुनसरी से शुरू हुआ विवाद अब कई शहरों तक फैल चुका है। हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लागू किया गया है, नेपाली सेना तैनात है और हेलिकॉप्टर से हवाई निगरानी की जा रही है। हिंसा में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है।
Nepal Communal Clash Curfew: नेपाल के सुनसरी जिले से भड़की सांप्रदायिक हिंसा की आग अब देश के कई बड़े और संवेदनशील शहरों में पूरी तरह फैल चुकी है। बीते 4 दिनों के भीतर देश के अलग-अलग क्षेत्रों में आगजनी, पथराव, दुकानों में तोड़फोड़ और सुरक्षा बलों के साथ आमने-सामने की झड़पों ने पूरे देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि स्थानीय प्रशासन को इनरुवा, जनकपुर, सिरहा, गोलबाजार और लहान जैसे प्रमुख व्यापारिक शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू करना पड़ा है। उपद्रवियों पर नजर रखने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए नेपाली सेना की टुकड़ियों ने सड़कों पर मोर्चा संभाल लिया है तथा हेलिकॉप्टरों के माध्यम से आसमान से लगातार हवाई निगरानी रखी जा रही है।
हिंसा और गोलीबारी में 3 लोगों की मौत, दर्जनों घायल
इस भयंकर हिंसा और पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़पों में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों नागरिक और सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों में प्रदर्शनकारी, आम निवासी और कई पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उपद्रवियों ने दर्जनों सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया तथा कई मुख्य बाजारों में व्यापक तोड़फोड़ की है। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आगजनी के कारण करोड़ों रुपये की संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।
राष्ट्रपति की शांति अपील और तनाव की मुख्य वजह
देश में बिगड़ते हालात पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सुनसरी और आसपास के संवेदनशील इलाकों की स्थिति पर भारी चिंता जताई है। उन्होंने देशवासियों से सदियों पुरानी सामाजिक सहिष्णुता, धार्मिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को हर कीमत पर कायम रखने की भावुक अपील की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरा विवाद सुनसरी जिले के देवानगंज में बोलबम कांवड़ यात्रा के दौरान शुरू हुआ था। सार्वजनिक स्थल पर बने मंदिर के पास धार्मिक झंडे को हटाने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ, जिसने देखते ही देखते हिंसक मोड़ ले लिया।
कांवड़ियों पर अचानक हुआ हमला और बढ़ा विवाद
चश्मदीदों का कहना है कि रविवार की देर रात जब श्रद्धालु देवानगंज मैदान से बोलबम यात्रा के लिए जल भरने निकलने वाले थे, तभी अचानक असामाजिक तत्वों ने कांवड़ियों पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए और पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया। अनियंत्रित होती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद यह हिंसा सुनसरी से निकलकर पड़ोसी जिलों तक फैल गई। एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी सीमित कर दी गई हैं।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल और सेना का फ्लैग मार्च
अशांति फैलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की शुरुआती तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि शुरुआत में भीड़ पर सही समय पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका, जिससे स्थिति हाथ से निकल गई। जब स्थिति बहुत अधिक बिगड़ गई तो सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को कमान संभालनी पड़ी। संवेदनशील स्थानों और प्रमुख राजमार्गों पर सेना की बख्तरबंद गाड़ियों ने फ्लैग मार्च किया ताकि असामाजिक तत्वों में डर पैदा हो सके और आम नागरिकों को सुरक्षा का अहसास कराया जा सके।
विपक्ष के निशाने पर PM बालेन शाह की सरकार
इस गंभीर सुरक्षा संकट के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह की अगुवाई वाली सरकार पर राजनीतिक दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार जमीनी स्तर पर कठोर और ठोस कदम उठाने में पूरी तरह असफल रही और केवल कागजी समीक्षा बैठकों तक सीमित रही। हालांकि, सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठकों के माध्यम से हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है और उपद्रव मचाने वाले दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जनजीवन पूरी तरह ठप, आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक
पिछले 4 दिनों से लगातार जारी इस हिंसक माहौल ने नेपाल के तराई क्षेत्रों में आम जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सभी प्रमुख व्यापारिक बाजार बंद हैं, लंबी दूरी की सार्वजनिक परिवहन सेवाएं ठप पड़ी हैं और शिक्षण संस्थानों में ताले लटके हुए हैं। भय और दहशत के माहौल में हजारों परिवार अपने-अपने घरों के भीतर कैद रहने को मजबूर हैं। इस तनाव के कारण नेपाल की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी चपत लग रही है और अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कितनी जल्दी देश में शांति बहाल कर पाती है।