अमेरिका का भारत पर वज्र प्रहार…लगाई 123 फीसदी ड्यूटी, अब मचेगा हाहाकार!
US Anti-Dumping Duty: अमेरिका ने भारत को सोलर सेक्टर में बड़ा झटका देते हुए भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04 फीसदी की शुरुआती एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। इस फैसले के बाद भारतीय सोलर एक्सपोर्ट के एक अहम बाजार में शिपमेंट पर और ज्यादा दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।
US Anti-Dumping Duty: अमेरिका ने भारत को सोलर सेक्टर में बड़ा झटका देते हुए भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04 फीसदी की शुरुआती एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। इस फैसले के बाद भारतीय सोलर एक्सपोर्ट के एक अहम बाजार में शिपमेंट पर और ज्यादा दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि शुरुआती तौर पर इसका असर सीमित रहने की संभावना भी बताई जा रही है क्योंकि कंपनियों ने पहले से ही अपने कारोबार को अलग अलग देशों में फैलाना शुरू कर दिया था। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है।
जांच में मिले गंभीर हालात का हवाला
अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने अपनी जांच के आधार पर कहा है कि उसे इस मामले में गंभीर परिस्थितियां यानी क्रिटिकल सरकमस्टेंसेज मिले हैं। इस जांच के दायरे में मुंद्रा सोलर एनर्जी, मुंद्रा सोलर पीवी, कोवा और प्रीमियर एनर्जी जैसी कंपनियां शामिल थीं। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कदम जरूरी माना गया।
90 दिन पहले तक के शिपमेंट पर भी असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विभाग ने यह भी साफ किया है कि लिक्विडेशन पर रोक उस आदेश के प्रकाशित होने से 90 दिन पहले तक के शिपमेंट पर भी लागू होगी। इसका मतलब यह है कि पहले भेजे गए माल पर भी इस नए फैसले का असर देखने को मिल सकता है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
इंडस्ट्री की कड़ी प्रतिक्रिया
वहीं भारत की सोलर इंडस्ट्री ने इस फैसले को पूरी तरह गलत बताया है। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने कहा है कि जांच के नतीजे बुनियादी तौर पर गलत और बिना किसी तर्कसंगत आधार के प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन इस फैसले को चुनौती देने के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित मनोहर ने भी इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि इंडस्ट्री इस मामले को आगे भी चुनौती देगी और अंतिम निर्णय तक अपनी बात मजबूती से रखेगी। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि आने वाले फैसले उनके पक्ष में हो सकते हैं।
पहले से ही भारी टैरिफ का दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई ड्यूटी के लागू होने से पहले ही भारतीय सोलर एक्सपोर्ट पर 125 फीसदी से अधिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी का बोझ मौजूद था। अब नई एंटी डंपिंग ड्यूटी जुड़ने के बाद कुल टैरिफ का भार 200 फीसदी से भी ज्यादा हो गया है। इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस स्तर पर टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय सोलर मॉड्यूल की प्रतिस्पर्धा लगभग खत्म हो गई है।
एक इंडस्ट्री अधिकारी के अनुसार इतने भारी टैक्स बोझ के कारण अब अमेरिकी बाजार में भारतीय मॉड्यूल भेजना आर्थिक रूप से फायदे का सौदा नहीं रह गया है।
बाजारों में विस्तार से मिला आंशिक सहारा
हालांकि इस झटके के बावजूद भारतीय एक्सपोर्टर्स ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कारोबार को यूरोप, पश्चिम एशिया और अन्य उभरते बाजारों में फैलाया है। इसी वजह से अमेरिकी फैसले का तत्काल प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखा जा सकता है। विविध बाजारों में उपस्थिति ने कंपनियों को कुछ हद तक स्थिरता प्रदान की है।
व्यापार वार्ता के बीच आया फैसला
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच वॉशिंगटन में तीन दिन की अहम बातचीत भी पूरी हुई है। ऐसे में इस फैसले को व्यापारिक तनाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
शेयर बाजार पर दिखा असर
वहीं इस खबर का असर भारतीय सोलर कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। वारी एनर्जीज के शेयर बीएसई पर 2.7 फीसदी गिरकर 3320 रुपये पर बंद हुए। वहीं विक्रम सोलर के शेयरों में 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि प्रीमियर एनर्जीज के शेयर शुरुआती नुकसान से उबरते हुए एक फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए।