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Hal chhath Vrat Vidhi:हलछठ व्रत की विधि क्या है, इसमें नहीं खाते ये सब...
Hal chhath Vrat: हलछठ व्रत को हरछठ,ललही छठ बलराम जयंती कहते है। इसे ललही छठ, हरछठ या हलछठ के नाम से भी जाना जाता है, जानिए इसकी पूजा विधि
Hal chhath Vrat Vidhi::हलछठ व्रत विधि क्या है ? भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलछठ व्रत या बलराम जयंती होता है। इसे ललही छठ, हरछठ या हलछठ भी कहते है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शेषनाग ने द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में अवतार लिया था। जानते है इसकी पूजा विधि और महत्व
हलछठ पूजा विधि
इस दिन व्रत में महिलाएं कोई अनाज नहीं खाती हैं। महिलाएं महुआ पेड़ की डाली का दातून, स्नान कर व्रत रखती हैं। इस पूजन की सामग्री में बिना हल जुते हुए जमीन से उगी हुई धान का चावल, महुआ के पत्ते, धान की लाई, भैंस का दूध-दही व घी आदि रखते हैं. सामने एक चौकी या पाटे पर गौरी-गणेश, कलश रखकर हलषष्ठी देवी की मूर्ति या प्रतिमा की पूजा करते हैं. साथ ही बच्चों के खिलौने जैसे-भौरा, बाटी आदि भी रखा जाता है।हलषष्ठी का व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और विशेष रूप से बलराम जी की पूजा-अर्चना करती हैं। व्रत में गाय के दूध और उससे बने पदार्थों का उपयोग किया जाता है। हल से जुड़ी मान्यता के कारण इस दिन हल से जुते अनाज का उपयोग वर्जित होता है।
हलछठ व्रत में नहीं खाए ये सब
हलछठ के दिन तालाब में पैदा हुई चीजें ही खाई जाती हैं, हरछठ व्रत में गाय के दूध से बनी चीजों या हल चलाकर खेत से पैदा हुई चीजें नहीं खाई जाती हैं। तामसिक भोजन जैसे प्याज व लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस व्रत में गाय के दूध, दही या घी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
हलछठ व्रत का महत्व
बलराम जी का जन्म शेषनाग के अवतार के रूप में हुआ था। वह भगवान श्रीकृष्ण के सहायक और संरक्षक माने जाते हैं। हल और मूसल उनके मुख्य अस्त्र हैं, जो कृषि और श्रम के महत्व को दर्शाते हैं। इस दिन महिलाएं बलराम जी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा करती हैं।
साल 2025 में हलषष्ठी व्रत 14 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अपने बच्चों की खुशहाली और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं। यह पर्व मातृ-शक्ति और संतानों के प्रति उनके स्नेह का प्रतीक है।
हलछठ व्रत का शुभ मुहूर्त
बलराम जयंती गुरुवार 14 अगस्त 2025,बलराम जयंती पूजा समय :षष्ठी तिथि शुरू : 04:25 - 14 अगस्त 2025,षष्ठी तिथि ख़त्म : 02:05 - 15 अगस्त 2025कहते हैं कि इस दिन जो भी महिलाएं हलषष्ठी का व्रत नियमों का पालन करते हुए करती हैं उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। संतान ना हो उसे संतान दीर्घायु होती है और उस घर में अकाल मृत्यु नहीं होता है।
निशिता काल पूजा– 11:38 PM से 12:22 AM, अगस्त 15,अभिजीत मुहूर्त - 12:05 PM से 12:56 PM,अमृत काल - 01:35 AM से 03:05 AM,ब्रह्म मुहूर्त - 04:31 AM से 05:19 AM,विजय मुहूर्त- 02:08 AM से 02:59 Aगोधूलि बेला- 06:24 PM से 06:46 PM,सर्वार्थसिद्धि योग - Aug 14 09:06 AM - Aug 15 07:36 AM
नोट : ये जानकारी सामान्य सूचना के लिए दी गई है। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है। सही जानकारी के लिए आस पास के विद्वानों से भी संपर्क कर लें।


