पवित्र कार्तिक मास में मिलेगा अद्भुत लाभ, पूरे एक माह इन कामों से पाएं श्रीकृष्ण का आशीर्वाद

Kartik ka Mahina Kab se Shuru Hai कार्तिक माह 2025, 7 अक्टूबर से शुरू होगा। कार्तिक मास 2025 में करें ये शुभ कार्य, तुलसी पूजा और दीपदान। पूरे महीने पाएं श्रीकृष्ण और लक्ष्मी माता का मिलेगा आशीर्वाद।

Suman  Mishra (Astrologer)
Published on: 6 Oct 2025 9:51 AM IST
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Kartik ka Mahina kab Se Shuru Hai: आश्विन माह के बाद कार्तिक मास आता है।जो हिंदू पंचांग के अनुसार आठवां महीना होता है और इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह भगवान विष्णु, शिव, और देवी लक्ष्मी की पूजा का समय माना जाता है।इस माह में गंगा स्नान, व्रत, और दीपदान करने का विशेष महत्व है।कार्तिक स्नान पूरे महीने में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माना जाता है कि इस दौरान किए गए पुण्य कर्मों से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कार्तिक मास में सुबह सुबह स्नान और सूर्योदय से पहले दीपदान का महत्व है। इस माह में पवित्र नदियों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का बहुत अधिक महत्व होता हैं। इसी मास से चातुर्मास का समापन होता है।इस साल पवित्र कार्तिक महीने की शुरुआत 7 अक्टूबर 2025 से होगी और यह 5 नवंबर 2025 को जाकर पूर्ण होगा। धर्मशास्त्र में पावन मास कार्तिक मास की महिमा बताया गया है।

कार्तिक माह का महत्व

धर्म शास्त्रों में पूरे कार्तिक मास में व्रत व तप का विशेष महत्व है। जो मनुष्य कार्तिक मास में व्रत व तप करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में कहा है कि भगवान नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के सर्वगुण संपन्न माहात्म्य के संदर्भ में बताया है। इस बार 7अक्टूबर 2025 से कार्तिक माह शुरू हो रहा है।

कार्तिक मास जो पापों के नाश का मास और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाला है, यह भगवान विष्णु को अति प्रिय है। कार्तिक मास की शुरुआत के साथ ही धार्मिक कामों की महत्ता बढ़ जाती है। पुराणों में भी कार्तिक मास की चर्चा मासोत्तम मास के रूप में है। कार्तिक मास के समान कोई दूसरा मास नहीं है और सतयुग के समान कोई युग नहीं है। वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगा के समान कोई तीर्थ नदी नहीं है। इसी तरह सभी देवताओं में भगवान विष्णु,तीर्थों में बद्रीनारायण को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस पवित्र मास का महत्व बढ़ जाता है।

मान्यता है कि कार्तिक मास में विधि-विधान से नियम-संयम का पालन करने वाले व्यक्ति पर भगवान श्री विष्णु और उनके पूर्णावतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बरसती है।

कार्तिक मास में नियम

कार्तिक मास में भगवान श्री विष्णु जल में वास करते हैं। किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना आदि में स्नान-दान करने से व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है, यदि आप किसी जलक्षेत्र में जाकर स्नान न कर सकें तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।

कार्तिक मास में कई चीजों का दान करने के साथ दीपदान की बहुत ज्यादा महत्ता मानी गई है, इसलिए इस माह में व्यक्ति को पुण्यफल को पाने के लिए प्र​तिदिन देवस्थान यानि मंदिर और तुलसी के पास सुबह शाम शुद्ध देशी घी का दीया जरूर जलाना चाहिए।

कार्तिक मास में तुलसी की पूजा करने के साथ उनकी परिक्रमा भी करनी चाहिए। श्री कृष्ण की पूजा के लिए कार्तिक मास अत्यंत ही शुभ माना गया है। कृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए इस मास में प्रतिदिन गीता का पाठ करना चाहिए।

कार्तिक मास में भगवान श्री कृष्ण के दामोदर स्वरूप की पूजा और दामोदर अष्टकम् का पाठ करना बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है। गवान श्री कृष्ण का ही एक नाम है, जिसका अर्थ होता है जिसके पेट पर रस्सी बंधी हुई हो। गौरतलब है कि कान्हा की शरारतों से तंग होकर माता यशोदा ने उन्हें ओखल से बांध दिया।

कार्तिक मास में भगवान श्री कृष्ण या फिर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए प्रतिदिन उनके मंत्र का अधिक से अधिक जप करना चाहिए।

कार्तिक मास में भगवान श्री विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है।माता लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए कार्तिक मास में श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र, लक्ष्मी स्तोत्र और श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए.।

नोट : ये जानकारियां धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।इसे सामान्य रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है।

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Suman Mishra (Astrologer)

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मैं वर्तमान में न्यूजट्रैक और अपना भारत के लिए कंटेट राइटिंग कर रही हूं। इससे पहले मैने रांची, झारखंड में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग किया है और ईटीवी में 5 वर्षों का डेस्क पर काम करने का अनुभव है। मैं पत्रकारिता और ज्योतिष विज्ञान में खास रुचि रखती हूं। मेरे नाना जी पंडित ललन त्रिपाठी एक प्रकांड विद्वान थे उनके सानिध्य में मुझे कर्मकांड और ज्योतिष हस्त रेखा का ज्ञान मिला और मैने इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए पढाई कर डिग्री भी ली है

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