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सावन का पहला दिन आज है बेहद खास, ऐसे करें शुरुआज शिव की बरसेगी अपरंपार कृपा
Sawan Ka Pahla Din :सावन मे शिव की पूजा सर्वोत्तम फलदायी है। शिव को दूध-जल, बिल्व पत्र, बेल फल, धतूरे-गेंदे के फूल का भोग लगाकर भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। पहले दिन से कैसे करें शुरुआत..
Sawan Ka Pahla Din सावन मास ( Sawan month) आज से शुरु हो गया है, जहां शिवोपासना, शिवलिंगों की पूजा की जाती है जिससे मनुष्य को अपार धन-वैभव की प्राप्ति होती है। इस माह में बिल्व पत्र, जल, अक्षत और बम-बम बोले का जयकारा लगाकर और शिव चालीसा, शिव आरती, शिव-पार्वती की उपासना से भी आप शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। अगर आपके लिए हर रोज शिव आराधना करना संभव नहीं हो तो सोमवार ( monday) के दिन आप शिव पूजन और व्रत करके शिव भक्ति को प्राप्त कर सकते हैं और इसके लिए सावन माह तो अति उत्तम हैं।
शिव की पूजा सर्वोत्तम फलदायी है। शिव को दूध-जल, बिल्व पत्र, बेल फल, धतूरे-गेंदे के फूल का भोग लगाकर भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। भगवान शंकर को सावन में हर दिन और खासकर सोमवार का दिन प्रिय य है। इस लिए सावन हर सोमवार, पार्थिव शिव पूजा ( shiva worship) अतिफलदायी रहेगा। जानिए आज पहले दिन कैसे करें पूजा
पहले दिन कैसे करें पूजासावन का विशेष महत्व
आदि देव भगवान शिव का यह महीना बड़ा ही महत्वपूर्ण है। सावन मास में प्रत्येक सोमवारी का विशेष महत्व है। सावन में चार सोमवारी होती है, लेकिन सोमवार के पूजन में मनोवाछित फल की कामना हेतू सभी सोमवार की पूजा अलग-अलग मंत्र से करें तो भोले भंडारी की विशेष कृपा बरसेगी।
पहला दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। पूजा क्रिया के बाद शिव भक्तों को 'ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: का मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।
आज महाकालेश्वर शिव की विशेष पूजा करने का विधान है। श्रद्धालु को 'ऊं महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नम: मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 11 मामला जाप करना चाहिए। महाकालेश्वर की पूजा से सुखी गृहस्थ जीवन, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व तांत्रिक दोष से मुक्ति मिलती है।
आज शिवजी को खुश करने के लिए 'ऊं महादेवाय सर्व कार्य सिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना श्रेष्ठ माना गया है। इनकी विशेष पूजन से अखंड सौभाग्य, पूर्ण आयु, संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा, कन्या विवाह, अकाल मृत्यु निवारण व आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है।
पहला दिन दिन कुश के आसन पर बैठकर 'ऊं रुद्राय शत्रु संहाराय क्लीं कार्य सिद्धये महादेवाय फट् मंत्र का जाप 11 माला शिवभक्तों को करनी चाहिए। तंत्रेश्वर शिव की कृपा से समस्त बाधाओं का नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पुराणों में भगवान शिव की उपासना का उल्लेख बताया गया है। शिव की उपासना करते समय पंचाक्षार मंत्र ॐ नम: शिवाय और महामृत्युंजय आदि मंत्र जप बहुत खास है। इन मंत्रों के जप-अनुष्ठान से सभी प्रकार के दुख, भय, रोग, मृत्यु भय आदि दूर होकर मनुष्य को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।भगवान शंकर को सोमवार का दिन प्रिय होने के कारण भी सावन माह भोलेनाथ को अतिप्रिय है। प्रेम से भगवान शिव की चाहे जिस तरह आराधना करें, वे अपने सभी भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं और उनके सारे दुखों का निवारण कर उन्हें सुखी जीवन जीने का वरदान देते हैं। उनका ॐ नम: शिवाय का मंत्र जप हमारे सभी पाप कर्मों को दूर करके, हमें पुण्य के रास्ते पर ले जाता हैं।
शिव पूजा की विधि
सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहन लें।पूजा स्थान को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र करें। शिवलिंग को पहले शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं। अब पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें। फिर से जल से शिवलिंग को धोकर साफ करें। अब बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाएं। चंदन का तिलक करें, धूप-दीप जलाएं। मिठाई या फल अर्पित करें। ओम नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें। अंत में आरती करें और भगवान से अपने परिवार की खुशहाली की कामना करें।
शिव जी के प्रिय मंत्र
ओम नमः शिवाय.
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्..
शिव पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
सावन का पहला दिन भगवान शिव की पूजा का उत्तम दिन है। इस दिन अगर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाए जाएं तो सारे कष्ट दूर होते हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए इस सावन, आसान विधि से भोलेनाथ की पूजा करें और उनका आशीर्वाद पाएं।शिव पूजा में कभी भी तुलसी पत्र का उपयोग न करे। पूजा के समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। बेलपत्र पर तीन पत्ते जरूर हों, कटे-फटे पत्ते न चढ़ाएं. कोशिश करें पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
नोट : ये जानकारियां धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं। Newstrack.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।इसे सामान्य रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है


