19 या 20 नवंबर, कब है मार्गशीर्ष अमावस्या? पितरों को प्रसन्न करने का ‘महायोग’; जानें सही तारीख

Margashirsha Amavasya 2025 Date: भगवान श्रीकृष्ण ने भी भगवद्गीता में कहा है कि ‘महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं’। मार्गशीर्ष अमावस्या भगवान श्रीहरि विष्णु और पितरों को समर्पित होता है।

Shishumanjali kharwar
Published on: 8 Nov 2025 12:59 PM IST
Margashirsha Amavasya 2025 Date
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Margashirsha Amavasya 2025 Date

Margashirsha Amavasya 2025 Date: हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष माह का विशेष महत्व है। इस माह की अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या या फिर अगहन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक अमावस्या की तरह ही मार्गशीर्ष अमावस्या का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी भगवद्गीता में कहा है कि ‘महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं’। मार्गशीर्ष अमावस्या भगवान श्रीहरि विष्णु और पितरों को समर्पित होता है। इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं दान-पुण्य का पुण्य लाभ मिलता है। जिससे पितरों को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2025 में मागशीर्ष अमावस्या की तारीख को लेकर कंफ्यूजन है तो फिर आइए बताते हैं कि आखिर कब है मार्गशीर्ष अमावस्या।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 को शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक, मार्गशीर्ष अमावस्या की शुरुआत 19 नवंबर को प्रातःकाल 09.43 बजे पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 20 नवंबर को अपरान्ह 12.16 बजे होगा। पंचांग गणना और उदयातिथि के अनुसार 20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या होगी।

पितरों की शांति

अमावस्या तिथि विशेष रूप से पितरों को ही समर्पित होती है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के नाम से पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से शांति मिलती है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

भगवान विष्णु की पूजा से अक्षय फल की प्राप्ति

मार्गशीर्ष महीने को भगवान श्रीकृष्ण का माह माना जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या पर भगवान श्री हरि और श्रीकृष्ण की पूजा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत कर भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ करना चाहिए। जिससे जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।

स्नान-दान का महत्व

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदियों गंगा, यमुना या अन्य किसी तीर्थ स्थल पर स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर नदी में स्नान करने जाना मुश्किल हो तो फिर घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद दान-पुण्य करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन अन्न, वस्त्र और तिल का दान करना शुभ होता है।

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मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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