4 करोड़ का फंड फिर भी काम अधूरे! सम्राट सरकार ने मांगी पूरे बिहार की रिपोर्ट

Mukhyamantri Kshetra Vikas Yojana: मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर बिहार सरकार ने पूरे राज्य से रिपोर्ट मांगी है। जानिए योजना, फंड और लंबित कार्यों से जुड़ी पूरी जानकारी।

Shalni Kumari
Published on: 6 Oct 2026 12:58 PM IST
Mukhyamantri Kshetra Vikas Yojana
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Samrat Choudhary

Mukhyamantri Kshetra Vikas Yojana: बिहार में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की धीमी रफ्तार को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कई विकास योजनाओं के लंबे समय से अधूरे रहने और स्वीकृत राशि का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं होने की शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने अब पूरे बिहार से इस योजना के तहत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। योजना एवं विकास विभाग के स्तर पर अब लंबित और निर्माणाधीन योजनाओं की गहन समीक्षा की जाएगी।

विभागीय स्तर पर कई वर्षों से बड़ी संख्या में योजनाओं के अधूरे रहने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। जनवरी 2026 के विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 17वीं विधानसभा यानी 2021-22 से 2025-26 के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों की ओर से अनुशंसित विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि में से 71.40 फीसदी खर्च हो चुकी है। वहीं करीब 20 फीसदी स्वीकृत योजनाएं अभी अलग-अलग चरणों में क्रियान्वित की जा रही हैं।

आठ साल पुरानी योजनाएं भी अधूरी

विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई क्षेत्रों में आठ वर्ष पहले स्वीकृत राशि से जुड़े काम भी अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। ऐसे में सरकार अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी की वजह क्या है और स्वीकृत राशि का इस्तेमाल समय पर क्यों नहीं हो पाया।

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी CAG की मार्च 2023 की रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। नमूना जांच किए गए 13 प्रमंडलों में उपलब्ध कुल निधि में से 28 से 59 फीसदी तक राशि का इस्तेमाल नहीं हुआ था। इसके चलते पर्सनल लेजर अकाउंट में बड़ी मात्रा में अव्यवहृत राशि पड़ी रही।

2023-24 से बढ़कर चार करोड़ हुआ विधायक फंड

योजना के तहत विकास कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रत्येक विधायक और विधान पार्षद के लिए सालाना अनुशंसा की सीमा तीन करोड़ रुपये से बढ़ाकर चार करोड़ रुपये कर दी गई। आधिकारिक संशोधित मार्गदर्शिका में भी विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों के लिए चार करोड़ रुपये सालाना तक की योजनाओं की अनुशंसा का प्रावधान दर्ज है।

बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में कुल 318 सदस्य हैं। इनमें 243 विधायक और 75 विधान पार्षद शामिल हैं। इस हिसाब से सभी सदस्य मिलकर हर साल कुल 1,272 करोड़ रुपये की योजनाओं की अनुशंसा कर सकते हैं।

इससे पहले योजना के तहत प्रति सदस्य सालाना तीन करोड़ रुपये की सीमा थी। निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तीन करोड़ रुपये में विकास कार्य कराने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए राशि बढ़ाकर चार करोड़ रुपये की गई थी।

क्या है मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना?

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना (Mukhyamantri Kshetra Vikas Yojana) बिहार सरकार की ऐसी बहुआयामी विकास योजना है, जिसे राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से 2011-12 में लागू किया गया था। योजना एवं विकास विभाग के अधीन यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू है। इसका मूल उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जरूरी आधारभूत संरचनाओं (Basic Infrastructure) का विकास करना है।

योजना के तहत विधायक और विधान पार्षद अपने क्षेत्र में जरूरी विकास कार्यों की अनुशंसा करते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित विभागों और एजेंसियों के माध्यम से इन योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाता है।

इस योजना का मकसद केवल किसी एक तरह का निर्माण कराना नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय जरूरत के अनुसार सड़क, सार्वजनिक उपयोग की संरचनाओं और दूसरी आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।

योजना का लक्ष्य क्या है?

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर ऐसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाता है, जिनका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सके।

इस योजना के जरिए विधायकों और विधान पार्षदों को अपने क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों की अनुशंसा करने का अवसर मिलता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य क्षेत्रीय जरूरतों को विकास योजनाओं से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।

अब सरकार की समीक्षा से क्या बदलेगा?

पूरे राज्य से रिपोर्ट मांगने के बाद सरकार के सामने प्रत्येक क्षेत्र में स्वीकृत, पूरी, लंबित और निर्माणाधीन योजनाओं की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। समीक्षा के दौरान यह देखा जा सकता है कि कौन-सी योजनाएं लंबे समय से लंबित हैं, कहां राशि उपलब्ध होने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ और किन स्तरों पर क्रियान्वयन में देरी हुई।

सरकार की नाराजगी का मुख्य केंद्र भी यही है कि योजना के लिए उपलब्ध राशि और स्वीकृत योजनाओं के बावजूद विकास कार्यों की रफ्तार अपेक्षित नहीं रही। इसलिए आगे समीक्षा के बाद लंबित योजनाओं को पूरा करने, राशि के बेहतर इस्तेमाल और योजनाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिए जाने की संभावना है।

राज्य सरकार के स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के डैशबोर्ड पर भी मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना को योजना एवं विकास विभाग के तहत क्रियान्वित योजना के रूप में दर्ज किया गया है। इससे योजनाओं की स्थिति की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था के इस्तेमाल का भी पता चलता है।

पटना समेत इन शहरों में भी योजना का असर

मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, छपरा, सीवान, सासाराम, बेतिया, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, नवादा, औरंगाबाद, बांका, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर, जमुई और लखीसराय समेत कई प्रमुख शहरी क्षेत्र चयनित हैं।

यानी योजना का दायरा केवल राजधानी पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को इससे जोड़ा गया है।

अब पेंडिंग योजनाओं पर होगी नजर

सरकार की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की पुरानी और नई परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। खास तौर पर वर्षों से लंबित योजनाओं, खर्च नहीं हुई राशि और निर्माण की धीमी गति को लेकर विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

इस पूरी कवायद का उद्देश्य उपलब्ध निधि का बेहतर इस्तेमाल करते हुए स्वीकृत विकास योजनाओं को समय पर पूरा कराना और क्षेत्रीय स्तर पर विकास कार्यों की गति बढ़ाना है।

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