UPI Mapper हंगामा! PhonePe, Google Pay और Paytm में क्यों मचा बवाल?

भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में नया UPI Mapper नियम PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे ऐप्स में टकराव और यूज़र्स में भ्रम पैदा कर रहा है।

Sonal Girhepunje
Published on: 24 Oct 2025 2:54 PM IST (Updated on: 24 Oct 2025 8:31 PM IST)
UPI Mapper हंगामा! PhonePe, Google Pay और Paytm में क्यों मचा बवाल?
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UPI Mapper: अगर आप रोजाना UPI पेमेंट करते हैं और Google Pay, PhonePe, Paytm जैसी एप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो हाल ही में आया UPI Mapper नियम आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस नए नियम के कारण भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में अचानक हलचल मची। NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने इस नियम को इसलिए लागू किया ताकि यूज़र्स अपनी UPI ID किसी भी पसंदीदा ऐप से जोड़ सकें और पेमेंट करना आसान हो। लेकिन इसके उलट, PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी बड़ी कंपनियों के बीच टकराव शुरू हो गया और यूज़र्स में भ्रम फैल गया। कई लोगों ने बिना समझे प्राइमरी ऐप चुन लिया, जिससे ट्रांजैक्शन में देरी और पेमेंट फेलियर जैसी समस्याएं सामने आईं।

नए नियम का मकसद

NPCI ने UPI Mapper लाया ताकि यूज़र्स अपनी UPI ID किसी भी ऐप से लिंक कर सकें। मतलब अगर आपने पहले Google Pay से UPI बनाई थी, तो अब आप Paytm या BHIM को अपनी प्राइमरी ऐप बना सकते हैं। इसका उद्देश्य था यूज़र्स को ज्यादा आज़ादी देना और नए ऐप्स को बढ़ावा देना।

UPI सिस्टम में बदलाव

पहले मोबाइल नंबर से पेमेंट करते समय ऐप अपने डेटाबेस से रिसीवर पहचानता था। अब NPCI ने आदेश दिया कि हर ट्रांजैक्शन सीधे उनके सर्वर से वेरिफाई होगा। इससे किसी एक ऐप के पास यूज़र डेटा का अधिकार नहीं रहेगा। लेकिन इसके कारण NPCI सर्वर पर बोझ बढ़ गया, जिससे पेमेंट में देरी और फेलियर की समस्या आई।

यूज़र्स और ऐप्स में दिक्कतें

नए नियम के बाद PhonePe, Google Pay और Paytm ने यूज़र्स को बार-बार “Make us your primary UPI app” नोटिफिकेशन भेजना शुरू किया। इससे यूज़र्स में भ्रम फैल गया कि उनका पैसा कहां है और कौन-सा ऐप प्राइमरी है। कई लोग बिना समझे सहमति दे देते हैं, जिससे पेमेंट में और परेशानी आती है। देशभर से शिकायतें आईं कि ट्रांजैक्शन ऐप में नहीं दिख रहा, लेकिन बैंक अकाउंट में पैसा चला गया। इससे UPI सिस्टम पर भरोसा कम हुआ।

NPCI का रुख और सुधार

स्थिति बिगड़ने पर NPCI ने तुरंत आदेश पर रोक लगाई और ऐप्स के बीच अस्थायी समझौता कराया। नया सर्कुलर आया कि अब कोई ऐप यूज़र को नोटिफिकेशन भेजकर प्राइमरी ऐप बदलने को नहीं कहेगा। यह विकल्प केवल ऐप की प्रोफाइल सेटिंग्स में होगा। इससे यूज़र्स का भ्रम कम होगा और पेमेंट सिस्टम सुरक्षित रहेगा।

UPI Mapper लागू क्यों हुआ

PhonePe और Google Pay भारत में UPI ट्रांजैक्शन का लगभग 80% हिस्सा संभालते हैं। नए ऐप्स जैसे Navi, CRED, super.money और BHIM ने NPCI से शिकायत की कि उन्हें बराबरी का मौका नहीं मिल रहा। UPI Mapper छोटे और नए ऐप्स को बढ़त देने के लिए था। लेकिन इसके कारण बड़े ऐप्स और यूज़र्स दोनों को समस्या हुई।

विशेषज्ञों की राय - UPI एक यूज़र-फ्रेंडली डिजिटल उत्पाद है। इसे सिर्फ नियमों से चलाना मुश्किल है। नियम बनाना जरूरी है, लेकिन उसे ऐसे लागू करना चाहिए कि यूज़र्स और ऐप्स आसानी से समझ सकें। इस बार यह पूरी तरह सफल नहीं हुआ।

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Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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