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Weak Immune System Explained: बार-बार बीमार पड़ना क्या कमजोर इम्युनिटी का संकेत है? जानिए पूरा सच
Weak Immune System Explained: क्या बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण होना कमजोर इम्युनिटी का संकेत है?
Weak Immune System Explained in Hindi
Weak Immune System Explained: साल में कई बार सर्दी-जुकाम हो जाता है, मौसम बदलते ही गला खराब हो जाता है, कभी बुखार तो कभी खांसी और कमजोरी। ऐसे में घर में अक्सर एक ही फैसला सुना दिया जाता है कि तुम्हारी इम्युनिटी बहुत कमजोर है।इसके बाद विटामिन की गोलियां, काढ़े, तरह-तरह के चूर्ण और बाजार में बिकने वाले इम्युनिटी बूस्टर शुरू हो जाते हैं। लेकिन क्या सचमुच बार-बार बीमार पड़ना इस बात का सबूत है कि शरीर की प्रतिरक्षा कमजोर है? यह सवाल जितना सीधा दिखाई देता है, इसका जवाब उतना सीधा नहीं है। हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) कोई ऐसा स्विच नहीं है जिसे कमजोर या मजबूत कहकर समझ लिया जाए। यह शरीर की बेहद जटिल सुरक्षा व्यवस्था है, जिसमें लाखों कोशिकाएं, प्रोटीन, अंग और अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं शामिल होती हैं। इसका काम केवल वायरस और बैक्टीरिया को मारना नहीं, बल्कि यह तय करना भी है कि कब हमला करना है, कितनी ताकत से करना है और हमला खत्म होने के बाद प्रतिक्रिया को कब रोक देना है। बहुत कमजोर प्रतिरक्षा खतरनाक हो सकती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सक्रिय प्रतिरक्षा भी एलर्जी और कुछ स्वप्रतिरक्षी बीमारियों का कारण बन सकती है।
यानी असली सवाल यह नहीं है कि इम्युनिटी कितनी मजबूत है? बल्कि यह है कि इम्युनिटी सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं?
साल में कितनी बार बीमार होना सामान्य है?
सबसे पहले एक भ्रम दूर करना जरूरी है। एक स्वस्थ वयस्क को भी साल में कई बार सर्दी-जुकाम हो सकता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, ज्यादातर वयस्कों को साल में लगभग दो से चार बार सर्दी हो सकती है। इसकी एक वजह यह है कि सामान्य सर्दी के लिए जिम्मेदार वायरस एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों हैं।
यही कारण है कि एक बार सर्दी-जुकाम हो जाने का मतलब यह नहीं कि शरीर की प्रतिरक्षा ने हार मान ली। जरूरी नहीं कि एक वायरस से मिली प्रतिरक्षा आपको दूसरे वायरस से बचाएगी। यहां तक कि एक ही परिवार के वायरस के भी अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं।
इसे ऐसे समझिए - अगर किसी शहर की पुलिस ने एक खास अपराधी को पहचान लिया है तो इसका मतलब यह नहीं कि शहर में आने वाला हर दूसरा अपराधी भी तुरंत पकड़ लिया जाएगा। इम्यून सिस्टम भी कुछ इसी तरह काम करता है। वह अलग-अलग रोगाणुओं को पहचानने और उनके खिलाफ प्रतिक्रिया तैयार करने का काम करता है, लेकिन हर संक्रमण के खिलाफ एक जैसी सुरक्षा नहीं होती।
बार-बार बीमार पड़ने का कारण क्या हो सकता है?
कई बार वजह इम्यूनिटी नहीं, बल्कि इन्फेक्शन का ज्यादा संपर्क होती है। जो व्यक्ति छोटे बच्चों के साथ रहता है, स्कूल या अस्पताल में काम करता है, रोज सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करता है या बहुत से लोगों के बीच रहता है, उसका वायरस और बैक्टीरिया से संपर्क स्वाभाविक रूप से ज्यादा होगा। ऐसे व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की तुलना में ज्यादा संक्रमण हो सकते हैं, भले ही उसकी प्रतिरक्षा सामान्य हो।
मौसम बदलने पर भी यही कहानी दिखाई देती है। सर्दी या बरसात में लोगों का ज्यादा समय बंद जगहों में बीतना, एक-दूसरे के करीब रहना और कुछ वायरस का इन परिस्थितियों में ज्यादा आसानी से फैलना संक्रमण बढ़ा सकता है। इसलिए मौसम बदलते ही बीमार पड़ने को सीधे कमजोर प्रतिरक्षा का प्रमाण मान लेना सही नहीं है।
कभी-कभी समस्या बीमारी नहीं बल्कि लगातार थकान, नींद की कमी, तनाव, खराब भोजन और शरीर को पर्याप्त आराम न देना भी हो सकती है। लंबे समय तक तनाव प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है और संक्रमण की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। इसी तरह पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि हर बार बीमार पड़ने के पीछे तनाव या नींद की कमी ही जिम्मेदार है। बात सिर्फ इतनी है कि कमजोर इम्युनिटी एक बहुत आसान जवाब है, जबकि वास्तविक कारण कई हो सकते हैं।
असली चिंता कब होनी चाहिए?
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है कि बार-बार मामूली सर्दी-जुकाम होना और बार-बार गंभीर संक्रमण होना एक ही बात नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार कान का संक्रमण, साइनस का गंभीर संक्रमण, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, त्वचा के संक्रमण या मुंह में बार-बार फंगल संक्रमण हो रहा है, संक्रमण सामान्य से ज्यादा लंबे समय तक रहता है, इलाज से ठीक नहीं होता या बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत पड़ती है, तब डॉक्टर को इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्या की संभावना पर विचार करना पड़ सकता है। असामान्य रूप से बार-बार होने वाले, लंबे समय तक चलने वाले, गंभीर या इलाज में मुश्किल संक्रमण प्राथमिक प्रतिरक्षा कमी के संकेत हो सकते हैं।
लेकिन यहां भी एक जरूरी सावधानी है। ऐसे लक्षण होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से इम्युनिटी की बीमारी है। शरीर में कई दूसरी समस्याएं भी बार-बार संक्रमण का कारण बन सकती हैं। इसलिए इसका फैसला इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर नहीं, बल्कि डॉक्टर की जांच और जरूरत पड़ने पर रक्त जांच आदि से किया जाता है।
क्या हर समय थकान का मतलब कमजोर इम्युनिटी है?
यह भी एक बड़ा भ्रम है। सुबह उठते ही थकान, शरीर टूटना, काम में मन न लगना या दिनभर सुस्ती महसूस होना अक्सर 'इम्युनिटी डाउन' कह दिया जाता है। लेकिन इन लक्षणों के पीछे नींद की कमी, तनाव, भोजन की कमी, खून की कमी, थायरॉयड जैसी समस्याएं, मानसिक तनाव, जीवनशैली या कई दूसरी वजहें हो सकती हैं।
इसलिए केवल थकान देखकर प्रतिरक्षा कमजोर होने का निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक तरीका नहीं है। इसी तरह हर बार गले में खराश या नाक बहना भी प्रतिरक्षा की कमजोरी नहीं बताता। एलर्जी और दूसरे गैर-संक्रामक कारण भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकते हैं।
सबसे बड़ा भ्रम: इम्युनिटी जितनी ज्यादा, शरीर उतना स्वस्थ
यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन विज्ञान में यह बात इतनी सरल नहीं है। प्रतिरक्षा तंत्र का काम हर चीज पर ज्यादा ताकत से हमला करना नहीं है। उसे सही चीज पर सही प्रतिक्रिया देनी होती है। अगर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा हो जाए तो एलर्जी और कुछ स्वप्रतिरक्षी बीमारियां पैदा हो सकती हैं, जिनमें शरीर की सुरक्षा व्यवस्था गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला करने लगती है। इसलिए 'इम्युनिटी बढ़ाओ' अपने आप में अधूरा वाक्य है। बेहतर सवाल है कि, प्रतिरक्षा तंत्र को स्वस्थ और संतुलित कैसे रखा जाए?
क्या विटामिन और इम्युनिटी बूस्टर सचमुच काम करते हैं?
यहीं से सबसे बड़ा बाजार शुरू होता है। किसी बोतल पर 'इम्युनिटी बूस्टर', किसी गोली पर 'प्रतिरक्षा मजबूत करें' और किसी पेय पर 'रोगों से बचाएं' लिखा मिल जाता है। लेकिन स्वस्थ व्यक्ति के लिए ऐसी चीजें लेने का मतलब यह नहीं कि उसकी प्रतिरक्षा अचानक कई गुना मजबूत हो जाएगी।
अगर शरीर में किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी है तो उसे पूरा करना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन सामान्य स्तर वाले व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा विटामिन या खनिज देने से प्रतिरक्षा उसी अनुपात में मजबूत हो जाएगी, इसका ठोस प्रमाण नहीं है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, सामान्य रूप से स्वस्थ लोगों में किसी खास पूरक पदार्थ से प्रतिरक्षा को इस तरह 'बूस्ट' करने का पुख्ता प्रमाण नहीं है।
विटामिन सी इसका अच्छा उदाहरण है। यह शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन सामान्य लोगों में रोज ज्यादा मात्रा में विटामिन सी लेने से सर्दी-जुकाम रुक जाएगा, ऐसा साबित नहीं हुआ है। कुछ शोधों में बीमारी की अवधि या लक्षणों में मामूली कमी जरूर दिखाई देती है। इसलिए कमी को पूरा करना और जरूरत से ज्यादा लेना दो अलग बातें हैं।
क्या ठंड लगने से इम्युनिटी कमजोर होती है?
'ठंडी हवा लगी और अगले दिन सर्दी हो गई, इसलिए ठंड ने इम्युनिटी गिरा दी।' यह भी पूरी कहानी नहीं है। सर्दी-जुकाम वायरस से होता है। ठंडा मौसम अपने आप किसी व्यक्ति को संक्रमित नहीं करता। सर्दियों में संक्रमण इसलिए ज्यादा दिखाई दे सकता है क्योंकि लोग बंद जगहों में ज्यादा समय बिताते हैं और एक-दूसरे के करीब रहते हैं। कुछ वायरस ठंडे और कम नमी वाले वातावरण में ज्यादा आसानी से फैल सकते हैं। यानी ठंड और बीमारी के बीच संबंध है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ठंडी हवा ने आपकी इम्युनिटी खत्म कर दी।
क्या हर बार एंटीबायोटिक लेने से इम्युनिटी मजबूत होती है?
यहां एक और भ्रम पैदा होता है। सर्दी-जुकाम को देखकर कई लोग एंटीबायोटिक शुरू कर देते हैं। लेकिन सामान्य सर्दी ज्यादातर वायरस के कारण होती है और एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर काम करती है। इसलिए वायरल सर्दी में एंटीबायोटिक लेने से बीमारी का मूल कारण खत्म नहीं होता। बार-बार बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना भी सही आदत नहीं है, क्योंकि इससे दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया में प्रतिरोध पैदा होने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए हर बीमारी में तेज दवा को मजबूत इम्युनिटी का रास्ता समझना गलत है।
क्या मजबूत इम्युनिटी वाला व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ता?
एक स्वस्थ प्रतिरक्षा तंत्र का मतलब यह नहीं कि शरीर में कोई वायरस प्रवेश ही नहीं करेगा। कई बार संक्रमण हो सकता है, लेकिन शरीर उसे नियंत्रित कर लेता है या बीमारी गंभीर नहीं होने देता। टीकों का महत्व भी यहीं समझ आता है। टीका प्रतिरक्षा तंत्र को किसी खास रोगाणु को पहचानने के लिए पहले से तैयार करता है, ताकि वास्तविक संक्रमण आने पर शरीर तेजी से प्रतिक्रिया कर सके। इसलिए बीमार न पड़ना और स्वस्थ प्रतिरक्षा होना एक ही चीज नहीं है। असली लक्ष्य गंभीर संक्रमण से बचाव और बीमारी होने पर प्रभावी प्रतिक्रिया है।
प्रतिरक्षा को स्वस्थ रखने का सबसे भरोसेमंद तरीका क्या है?
इसका जवाब किसी एक गोली या चूर्ण में नहीं है। पर्याप्त और नियमित नींद, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से बचना, जरूरत के अनुसार टीकाकरण, हाथों की सफाई और लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव को कम करना, ये सभी शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा व्यवस्था के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
यहां एक और जरूरी बात है। स्वस्थ भोजन का मतलब कोई एक इम्युनिटी वाला सुपरफूड खाना नहीं है। संतरा, हल्दी, अदरक, लहसुन, तुलसी या कोई दूसरा खाद्य पदार्थ अपने आप प्रतिरक्षा तंत्र को जादुई तरीके से मजबूत नहीं कर देता। शरीर को अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है और इसलिए पूरी भोजन व्यवस्था ज्यादा महत्वपूर्ण है।
शरीर की प्रतिरक्षा को समझने का सबसे आसान तरीका
त्वचा और नाक की अंदरूनी परत पहली दीवार हैं। शरीर के कुछ रसायन और कोशिकाएं शुरुआती सुरक्षा देते हैं। फिर प्रतिरक्षा की विशेष कोशिकाएं किसी हमलावर को पहचानकर उसके खिलाफ ज्यादा लक्षित हमला करती हैं। कुछ कोशिकाएं आगे के लिए उसकी याद भी रखती हैं। इस पूरी व्यवस्था में केवल ताकत महत्वपूर्ण नहीं है। पहचान, गति, संतुलन और याददाश्त भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि इम्युनिटी बढ़ाना वैज्ञानिक भाषा में बहुत सटीक शब्द नहीं है। आप किसी कार की सुरक्षा को सिर्फ यह कहकर नहीं समझ सकते कि उसका इंजन जितना ज्यादा शक्तिशाली हो उतना अच्छा। ब्रेक, पहिए, सेंसर और चालक का तालमेल भी उतना ही जरूरी है। प्रतिरक्षा तंत्र के मामले में भी यही बात लागू होती है।
तो क्या बार-बार बीमार पड़ने वाले व्यक्ति की इम्युनिटी कमजोर है?
अगर आपको साल में कुछ बार सामान्य सर्दी-जुकाम होता है और आप कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, तो यह अपने आप में कमजोर प्रतिरक्षा का प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, अगर संक्रमण असामान्य रूप से बार-बार हो रहे हैं, बहुत गंभीर हैं, लंबे समय तक बने रहते हैं, इलाज में मुश्किल हो रही है या बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है, तब डॉक्टर से जांच कराना समझदारी है।
और शायद सबसे जरूरी बात यह है कि हर बीमारी का दोष इम्युनिटी पर डालना बंद करना चाहिए। कभी समस्या वायरस के ज्यादा संपर्क की होती है, कभी नींद और तनाव की, कभी पोषण की, कभी एलर्जी की और कभी किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की।
अगली बार जब कोई कहे कि तुम बार-बार बीमार पड़ते हो, तुम्हारी इम्युनिटी बहुत कमजोर है, तो तुरंत विटामिन की गोली उठाने से पहले एक सवाल पूछिए: बार-बार बीमार पड़ने की वजह वास्तव में क्या है?
कई बार जवाब इम्युनिटी से कहीं ज्यादा साधारण होता है। और कई बार, अगर संक्रमण का पैटर्न असामान्य हो, तो उसी सवाल की वजह से किसी असली बीमारी का समय पर पता भी चल सकता है।


