Bhadrasana benefits: मानसिक तनाव और पीरियड्स की परेशानी से दिलाए राहत! जानें भद्रासन के चमत्कारी फायदे

Bhadrasana benefits: आयुष मंत्रालय के अनुसार, शांति में अपना सुकून और ताकत खोजनी चाहिए। भद्रासन ठीक यही संदेश देता है।

Newstrack/IANS
Published on: 28 May 2026 6:33 PM IST (Updated on: 28 May 2026 6:37 PM IST)
Bhadrasana benefits
X

Bhadrasana benefits

Bhadrasana benefits: विश्व योग दिवस (21 जून) अब सिर्फ कुछ हफ्तों की दूरी पर है। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय रोजाना नए-नए योगासन और उसके फायदों की जानकारी साझा कर आम लोगों को योग की ओर प्रेरित कर रहा है। इसी क्रम में मंत्रालय ने भद्रासन के अभ्यास और इसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, शांति में अपना सुकून और ताकत खोजनी चाहिए। भद्रासन ठीक यही संदेश देता है। यह आसान और प्रभावी योगासन उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है जिन्हें मानसिक अस्थिरता, मासिक धर्म की परेशानी या गर्भावस्था के दौरान हल्के सहारे की जरूरत महसूस होती है।

आयुष मंत्रालय का कहना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवनशैली है। रोजाना कुछ समय भद्रासन जैसे आसान आसनों को दिनचर्या में शामिल कर तन-मन दोनों को सेहतमंद रख सकते हैं। इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहेगा, बल्कि मन भी प्रसन्न और स्थिर रहेगा।

मंत्रालय बताता है कि भद्रासन का नियमित अभ्यास मानसिक स्थिरता लाने में मदद करता है। यह मन को शांत रखता है और रोजमर्रा की भागदौड़ में होने वाली बेचैनी को कम करने में सहायक होता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अगर डॉक्टर की सलाह से हल्के सहारे के साथ इसका अभ्यास करें तो इससे शरीर को संतुलन मिलता है और थकान कम होती है। साथ ही मासिक धर्म से जुड़ी तकलीफों जैसे दर्द, ऐंठन और मूड स्विंग्स को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आज की छोटी-छोटी आदतें ही स्वस्थ भविष्य का निर्माण करती हैं। अगर आपको लगातार मानसिक बेचैनी, पीरियड्स के दौरान परेशानी या प्रेग्नेंसी में शरीर को अतिरिक्त सपोर्ट की जरूरत महसूस हो रही है तो यह आपके शरीर के बैलेंस की तलाश का संकेत हो सकता है। भद्रासन ठीक इन्हीं समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर है। यह शरीर के निचले हिस्से, कमर, घुटनों और कूल्हों को मजबूत बनाता है तथा रक्त संचार को बेहतर करता है।

भद्रासन के अभ्यास के लिए सुखासन की मुद्रा में बैठकर तलवों को जोड़ लें और घुटनों को बाहर की ओर खोलें। रीढ़ को सीधा रखते हुए हाथों को घुटनों पर या जांघों पर रखें। आराम की मुद्रा में सांस पर ध्यान केंद्रित करें। इस दौरान शरीर या सांस पर कोी दबाव न डालें। शुरुआती लोग कुछ मिनट से शुरू कर धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं।

Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen

Content Writer Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.com

Priya Singh Bisen is a Content Writer at Newstrack.com.

Next Story