Calcium Ki Kami Ke Lakshan: शरीर में कैल्शियम की कमी के शुरुआती संकेत क्या हैं?

Calcium Kami Ke Lakshan: शरीर में कैल्शियम की कमी के शुरुआती संकेत क्या होते हैं? जानिए झुनझुनी, मांसपेशियों में ऐंठन, हाइपोकैल्सीमिया और कैल्शियम की कमी का दिल की धड़कन व ECG पर असर।

Yogesh Mishra
Published on: 30 Sept 2026 7:43 PM IST
Calcium Ki Kami Ke Ke Lakshan
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Calcium Ki Kami Ke Ke Lakshan

Calcium Ki Kami Ke Lakshan: कैल्शियम का नाम आते ही हड्डियां और दांत याद आते हैं, लेकिन शरीर में इसका काम इससे कहीं ज्यादा है। नसों के संदेश, मांसपेशियों की हरकत, रक्त का थक्का और दिल की हर धड़कन तक कैल्शियम से जुड़ी है। इसीलिए जब खून में कैल्शियम बहुत कम हो जाता है तो समस्या केवल हड्डियों तक सीमित नहीं रहती। नसों और मांसपेशियों में असामान्य उत्तेजना बढ़ सकती है और हृदय की विद्युत गतिविधि भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए कि खाने में लंबे समय तक कैल्शियम कम मिलना और रक्त में कैल्शियम कम हो जाना एक ही बात नहीं है।

शरीर खून में कैल्शियम की मात्रा को एक सीमित दायरे में बनाए रखने की कोशिश करता है। अगर खाने से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता तो जरूरत पड़ने पर शरीर हड्डियों में जमा कैल्शियम का इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए लंबे समय तक कैल्शियम कम लेने के बावजूद शुरुआती रक्त जांच सामान्य आ सकती है, जबकि धीरे-धीरे हड्डियों का भंडार कमजोर हो सकता है। दूसरी तरफ, जब खून में कैल्शियम वास्तव में बहुत कम हो जाता है, तो इसे ‘हाइपोकैल्सीमिया’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति नसों, मांसपेशियों और हृदय को प्रभावित कर सकती है।

कैल्शियम की कमी के शुरुआती संकेत क्या हैं?

हल्की कमी में कई लोगों को कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देता। खासकर अगर समस्या लंबे समय से भोजन में कैल्शियम कम मिलने की हो, तो शरीर कुछ समय तक हड्डियों से कैल्शियम लेकर खून में उसका स्तर सामान्य बनाए रख सकता है। लेकिन जब खून में कैल्शियम का लेवल गिरने लगता है, तो नसों और मांसपेशियों की उत्तेजना बढ़ सकती है। इसका शुरुआती संकेत मुंह या होंठों के आसपास झुनझुनी, उंगलियों या पैरों में सुई चुभने जैसा एहसास, मांसपेशियों में खिंचाव, फड़कन या ऐंठन हो सकता है। कमी ज्यादा बढ़ने पर हाथ-पैर की मांसपेशियां अपने आप सिकुड़ सकती हैं। बहुत गंभीर स्थिति में दौरे भी पड़ सकते हैं। गले की मांसपेशियों में तेज ऐंठन होने पर सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए अचानक तेज मांसपेशीय ऐंठन, सांस लेने में दिक्कत, दौरा या चेतना में बदलाव को सिर्फ सामान्य कैल्शियम की कमी मानकर घर पर इलाज करना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।

कैल्शियम कम होने पर झुनझुनी और ऐंठन क्यों होती है?

कैल्शियम शरीर के सेल्स की विद्युत गतिविधि को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। खून में इसका स्तर बहुत गिरने पर नसों और मांसपेशियों की कोशिकाएं सामान्य से ज्यादा आसानी से सक्रिय हो सकती हैं। इसी वजह से शरीर में झुनझुनी, मांसपेशियों का फड़कना, खिंचाव और ऐंठन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यानी कैल्शियम की कमी में होने वाले ये संकेत केवल हड्डियों से जुड़ी समस्या नहीं हैं, बल्कि शरीर की नसों और मांसपेशियों के काम में बदलाव का संकेत भी हो सकते हैं।

क्या कैल्शियम की कमी सिर्फ दूध कम पीने से होती है?

ऐसा नहीं है। खून में कैल्शियम कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने में विटामिन डी, पैराथायरॉइड हार्मोन, किडनी, आंत और हड्डियां मिलकर काम करते हैं। विटामिन डी आंतों से कैल्शियम को शरीर में पहुंचाने में मदद करता है। पैराथायरॉइड ग्रंथियां रक्त में कैल्शियम कम होने पर उसे सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू करती हैं। गुर्दे भी कैल्शियम और दूसरे खनिजों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए विटामिन डी की गंभीर कमी, पैराथायरॉइड ग्रंथियों की समस्या, लंबे समय से चली आ रही किडनी की बीमारी और रक्त में मैग्नीशियम का बहुत कम होना भी कैल्शियम कम होने का कारण बन सकता है। गर्दन की कुछ सर्जरी के बाद पैराथायरॉइड ग्रंथियों को नुकसान पहुंचने पर भी रक्त में कैल्शियम तेजी से गिर सकता है। इसीलिए अगर जांच में कैल्शियम कम आता है तो डॉक्टर सिर्फ कैल्शियम की गोली देने के बजाय उसके पीछे का कारण भी खोज सकता है। जरूरत के अनुसार विटामिन डी, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, पैराथायरॉइड हार्मोन और गुर्दों की कार्यक्षमता की जांच की जा सकती है।

दिल की हर धड़कन में कैल्शियम का क्या काम है?

दिल को सिर्फ एक पंप समझना अधूरा होगा। यह एक ऐसी मांसपेशी है जो विद्युत संकेतों के नियंत्रण में लगातार सिकुड़ती और ढीली होती रहती है। हर धड़कन से पहले हृदय की कोशिकाओं में एक विद्युत संकेत फैलता है। इसके बाद कोशिकाओं के भीतर कैल्शियम का नियंत्रित आना शुरू होता है। कोशिका (cell) के अंदर कैल्शियम बढ़ने पर हृदय की मांसपेशी के सिकुड़ने की प्रक्रिया सक्रिय होती है। फिर कैल्शियम को वापस नियंत्रित किया जाता है और मांसपेशी ढीली पड़ती है। इसके बाद अगली धड़कन के लिए यही प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है। इस तरह कैल्शियम हृदय के विद्युत संकेत और मांसपेशी के सिकुड़ने के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की तरह काम करता है।

कैल्शियम कम होने से दिल की धड़कन पर क्या असर पड़ता है?

जब रक्त में कैल्शियम बहुत कम हो जाता है तो हृदय की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। ईसीजी जांच में ‘क्यूटी अंतराल लंबा’ दिखाई दे सकता है। इसका मतलब है कि हृदय की विद्युत प्रणाली को एक धड़कन के चक्र से सामान्य स्थिति में लौटने में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है। बहुत गंभीर हाइपोकैल्सीमिया में हृदय की धड़कन की लय भी बिगड़ सकती है। कुछ गंभीर मामलों में हृदय की मांसपेशियों की सिकुड़ने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि रक्त में कैल्शियम की गंभीर कमी सिर्फ हड्डियों की समस्या नहीं मानी जाती। यह नसों, मांसपेशियों और हृदय की विद्युत गतिविधि के लिए भी महत्वपूर्ण स्थिति हो सकती है।

क्या कैल्शियम कम होने पर दिल तेज धड़क सकता है?

ऐसा हो सकता है, लेकिन हर बार इसका कारण कैल्शियम की कमी नहीं होता। कुछ लोगों को कैल्शियम बहुत कम होने पर धड़कन असामान्य महसूस हो सकती है। लेकिन दिल की धड़कन तेज या जोर से महसूस होने के पीछे तनाव, ज्यादा कैफीन, पानी की कमी, बुखार, थायरॉयड की समस्या, खून की कमी, पोटैशियम या मैग्नीशियम में बदलाव और हृदय की लय से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को धड़कन महसूस हो रही है तो सिर्फ इसी आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि उसके शरीर में कैल्शियम कम है। अगर धड़कन के साथ सीने में दर्द, बेहोशी, तेज चक्कर, सांस लेने में परेशानी या बहुत ज्यादा कमजोरी हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी है। ऐसे लक्षणों को केवल पोषण की कमी समझना ठीक नहीं है।

लंबे समय तक कैल्शियम कम लेने से क्या होता है?

यहां कैल्शियम और हड्डियों का संबंध सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। शरीर के लिए रक्त में कैल्शियम का स्तर बनाए रखना जरूरी है क्योंकि नसों, मांसपेशियों और हृदय को इसकी लगातार जरूरत होती है। अगर भोजन से कैल्शियम पर्याप्त नहीं मिल रहा है तो शरीर हड्डियों में जमा कैल्शियम का इस्तेमाल कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि किसी व्यक्ति की रक्त जांच सामान्य होने के बावजूद लंबे समय तक कम कैल्शियम लेने से उसकी हड्डियों पर असर पड़ सकता है। इसीलिए सामान्य रक्त कैल्शियम रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि हड्डियां भी पूरी तरह मजबूत हैं। हड्डियों की स्थिति जानने के लिए उम्र, खान-पान, विटामिन डी, शारीरिक गतिविधि, हार्मोन और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों को भी देखा जाता है। कुछ लोगों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार हड्डियों की मजबूती की जांच भी करा सकते हैं।

क्या ज्यादा कैल्शियम लेना दिल के लिए ज्यादा अच्छा है?

ऐसा बिलकुल नहीं है। कैल्शियम में भी संतुलन जरूरी है। खून में कैल्शियम बहुत ज्यादा हो जाने पर कब्ज, कमजोरी, ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में हृदय की विद्युत गतिविधि भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए बिना जरूरत बहुत ज्यादा कैल्शियम की गोलियां लेना सही तरीका नहीं है। आम तौर पर कैल्शियम की जरूरत भोजन से पूरी करना बेहतर माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति को सप्लीमेंट कैल्शियम की जरूरत है तो उसकी मात्रा उम्र, खान-पान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए। कैल्शियम की गोलियों और हृदय रोग के बीच संबंध को लेकर भी वैज्ञानिक अध्ययनों में अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कैल्शियम की गोली अपने आप दिल की बीमारी पैदा करती है। दूसरी तरफ, सिर्फ इस डर से डॉक्टर की सलाह से लिया जा रहा कैल्शियम भी बंद नहीं करना चाहिए।

सबसे जरूरी बात क्या याद रखें?

कैल्शियम की कमी का कोई एक ऐसा लक्षण नहीं है जिसे देखकर पक्का कहा जा सके कि शरीर में कैल्शियम कम है। होंठों या उंगलियों में झुनझुनी, बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन और फड़कन रक्त में कैल्शियम कम होने के संकेत हो सकते हैं, लेकिन इनका कारण कुछ और भी हो सकता है। इसी तरह धड़कन तेज या अनियमित महसूस होने का मतलब अपने आप कैल्शियम की कमी नहीं है। लेकिन गंभीर हाइपोकैल्सीमिया में हृदय की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है और कुछ मामलों में दिल की लय भी बिगड़ सकती है। दूसरी ओर, लंबे समय तक भोजन में कैल्शियम कम मिलने का असर कई बार रक्त की जांच में तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेकर रक्त का स्तर बनाए रखने की कोशिश करता है। ऐसे में नुकसान धीरे-धीरे हड्डियों में दिखाई दे सकता है।

इसलिए कैल्शियम को सिर्फ हड्डियों का खनिज समझना सही नहीं है। यह नसों के संदेश, मांसपेशियों की हरकत और हृदय की धड़कन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में इसकी कमी हो या अधिकता, दोनों स्थितियों में सही कारण जानना जरूरी है। सिर्फ लक्षण देखकर कैल्शियम की गोली शुरू करना या बंद करना सही तरीका नहीं है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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