Contact Lens Infection: कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर स्विमिंग करना खतरनाक! आंखों में गंभीर संक्रमण और रोशनी जाने का खतरा

Contact Lens Infection: कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर स्विमिंग, नहाने या सोने से आंखों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। जानें एकैंथअमीबा केराटाइटिस, कॉर्नियल अल्सर के लक्षण और बचाव के तरीके।

Newstrack Network
Published on: 10 Oct 2026 5:52 PM IST (Updated on: 10 Oct 2026 5:53 PM IST)
Swimming With Contact Lenses
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 Swimming With Contact Lenses (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। चश्मे से छुटकारा पाने, खेलकूद में सुविधा या आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोगों के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उभर रहा है। लेंस की सफाई में लापरवाही, उन्हें निर्धारित अवधि से अधिक पहनना, रात में लेंस लगाकर सो जाना और स्विमिंग पूल में लेंस पहनकर उतरना आँखों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), बलरामपुर अस्पताल और निजी नेत्र चिकित्सकों के पास ऐसे मरीज पहुँच रहे हैं जिनकी आँखों को कॉन्टैक्ट लेंस के अनुचित इस्तेमाल से नुकसान पहुँचा है। कुछ मरीजों में संक्रमण इतना गंभीर हो जाता है कि कई सप्ताह या महीनों तक उपचार करना पड़ता है। संक्रमण कॉर्निया की गहरी परतों तक पहुँचने पर स्थायी धब्बे, दृष्टि में कमी और कुछ परिस्थितियों में कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता भी पड़ सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश जोखिमों को सही लेंस चुनकर, स्वच्छता का पालन करके और उपयोग संबंधी निर्देशों को गंभीरता से लेकर कम किया जा सकता है।

गोमतीनगर के 16 वर्षीय हर्षित का मामला इसी खतरे का उदाहरण है। हर्षित कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर तैराकी की कक्षा में गया था। इसके बाद उसकी आँख में जलन, लालिमा और धुँधला दिखाई देने की समस्या शुरू हुई। तकलीफ बढ़ने पर उसे केजीएमयू ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने अमीबा नामक सूक्ष्मजीव से होने वाले आँख के संक्रमण की पहचान की। उपचार और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में लगभग तीन महीने लगे। यह घटना बताती है कि पानी के संपर्क में आने वाले कॉन्टैक्ट लेंस कभी-कभी ऐसे सूक्ष्मजीवों को आँख तक पहुँचा सकते हैं जिनसे होने वाले संक्रमण का उपचार सामान्य जीवाणु संक्रमण की तुलना में अधिक कठिन और लंबा हो सकता है।

हालाँकि, इस एक मामले के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले अधिकांश लोगों को गंभीर संक्रमण हो जाता है। सही तरीके से उपयोग किए जाने पर कॉन्टैक्ट लेंस दृष्टि सुधार का प्रभावी साधन हैं। समस्या मुख्यतः तब बढ़ती है जब इनके उपयोग, सफाई, भंडारण या बदलने के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता।

केजीएमयू में हर महीने चार से पाँच मरीज, निजी अस्पतालों में भी सामने आ रहे मामले

केजीएमयू के नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रो. सिद्धार्थ अग्रवाल के अनुसार, अस्पताल में हर महीने लगभग चार से पाँच ऐसे मरीज आते हैं जिनकी आँखों में कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग से जुड़ी समस्याएँ होती हैं। बलरामपुर अस्पताल में भी प्रतिमाह लगभग इतनी ही संख्या में मामले सामने आने की जानकारी दी गई है, जबकि कुछ निजी नेत्र चिकित्सकों के यहाँ महीने में आठ से दस मरीज पहुँच रहे हैं। इनमें आँखों में जलन, कॉर्निया की सतह पर खरोंच, संक्रमण, सूखापन और अन्य परेशानियाँ शामिल हो सकती हैं।

इन आँकड़ों को पूरे लखनऊ में कॉन्टैक्ट लेंस से होने वाले संक्रमण की दर नहीं माना जा सकता। अलग-अलग अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या, उपचार की सुविधाएँ और रेफरल व्यवस्था अलग होती है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पूर्व वर्षों की तुलना में इन मामलों की संख्या कितनी बढ़ी है। इसलिए उपलब्ध चिकित्सकीय अनुभव समस्या की मौजूदगी और गंभीरता को दर्शाते हैं, लेकिन शहर में संक्रमण बढ़ने की वास्तविक दर निर्धारित करने के लिए तुलनीय और व्यवस्थित आँकड़ों की आवश्यकता होगी।

प्रो. अग्रवाल के अनुसार, लेंस की अनुचित देखभाल से कॉर्निया की सतह पर खरोंच पड़ सकती है। इसे कॉर्नियल एब्रेशन कहा जाता है। कॉर्निया आँख के सामने स्थित पारदर्शी ऊतक है, जिसके माध्यम से प्रकाश आँख के भीतर प्रवेश करता है। इसकी सतह क्षतिग्रस्त होने पर दर्द, पानी आना, लालिमा और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। यदि क्षतिग्रस्त सतह पर संक्रमण हो जाए तो स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। संक्रमण बढ़ने पर कॉर्निया में अल्सर विकसित हो सकता है, जिससे दृष्टि प्रभावित होने का खतरा रहता है।

स्विमिंग पूल का पानी आँखों के लिए क्यों बन सकता है खतरा?

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर तैरना विशेष रूप से जोखिमपूर्ण है। बलरामपुर अस्पताल के नेत्र चिकित्सक डॉ. संजय तेवतिया के अनुसार, पानी में एकैंथअमीबा जैसे सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। ये लेंस और कॉर्निया के बीच फँसकर संक्रमण उत्पन्न कर सकते हैं। एकैंथअमीबा मिट्टी और पानी में पाया जाने वाला सूक्ष्मजीव है। यह स्विमिंग पूल, झील, नदी, नल के पानी और अन्य जलीय वातावरण में मौजूद हो सकता है। अच्छी तरह रखरखाव वाले स्विमिंग पूल में भी इसके संपर्क का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।

एकैंथअमीबा से होने वाले कॉर्निया के संक्रमण को एकैंथअमीबा केराटाइटिस कहा जाता है। यह अपेक्षाकृत दुर्लभ, लेकिन गंभीर नेत्र संक्रमण है। इसमें शुरुआत में लालिमा, जलन, आँसू आना और धुँधला दिखाई देने जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों को आँख में अत्यधिक दर्द महसूस होता है। संक्रमण की पहचान में देरी होने पर कॉर्निया को अधिक नुकसान पहुँच सकता है। उपचार में विशेष प्रकार की संक्रमणरोधी दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करना पड़ सकता है और कुछ गंभीर मामलों में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।

अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) दोनों कॉन्टैक्ट लेंस को पानी से दूर रखने की सलाह देते हैं। इसका अर्थ केवल स्विमिंग पूल से बचना नहीं है। लेंस पहनकर नहाना, शॉवर लेना या गर्म पानी के टब में जाना भी जोखिम बढ़ा सकता है। कॉन्टैक्ट लेंस को नल के पानी से धोना अथवा पानी में रखकर सुरक्षित करने का प्रयास भी अनुचित है। लेंस साफ करने और सुरक्षित रखने के लिए केवल उसके प्रकार के अनुरूप स्वीकृत लेंस सॉल्यूशन का उपयोग किया जाना चाहिए।

रात में लेंस पहनकर सोना क्यों खतरनाक हो सकता है?

कई लोग दिनभर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के बाद थकान के कारण उन्हें उतारे बिना सो जाते हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यदि लेंस मुलायम है और आँख में असुविधा नहीं हो रही, तो उसे रातभर पहने रहने में कोई नुकसान नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार, यह धारणा गलत हो सकती है। कॉर्निया को स्वस्थ रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। कॉन्टैक्ट लेंस की बनावट और उसके पदार्थ के अनुसार कॉर्निया तक पहुँचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित हो सकती है। नींद के दौरान पलकों के बंद रहने से ऑक्सीजन की उपलब्धता स्वाभाविक रूप से कम होती है। ऐसे में सामान्य दैनिक उपयोग वाले लेंस पहनकर सोना संक्रमण और अन्य जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आँख में संक्रमण का जोखिम लगभग छह से आठ गुना तक बढ़ सकता है। यह जोखिम केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है जो नियमित रूप से रातभर लेंस पहनते हैं। कभी-कभार लेंस पहनकर सो जाना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। हालाँकि, कुछ विशेष लेंस चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद रात में या लगातार निर्धारित अवधि तक पहनने के लिए स्वीकृत होते हैं। ऐसे लेंस भी पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं हैं और उनका उपयोग केवल नेत्र विशेषज्ञ के निर्देशानुसार किया जाना चाहिए। 

एक महीने का लेंस कई महीने पहनना भी जोखिमपूर्ण

निजी प्रैक्टिस करने वाले नेत्र चिकित्सक डॉ. संजय सक्सेना के अनुसार, कुछ लोग लेंस की निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त होने के बाद भी उसे बदलते नहीं हैं। दैनिक उपयोग के लिए बनाए गए एक बार इस्तेमाल वाले लेंस को दोबारा पहनना, मासिक लेंस को कई महीनों तक इस्तेमाल करना और क्षतिग्रस्त लेंस को आँख में लगाते रहना संक्रमण तथा चोट के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसके अतिरिक्त लंबे समय तक लगातार लेंस पहनने से आँखों में सूखापन, जलन और असुविधा हो सकती है।

कॉन्टैक्ट लेंस के प्रकार को लेकर अक्सर भ्रम होता है। एक दिन इस्तेमाल करके फेंकने वाले लेंस और ऐसे लेंस जिन्हें प्रतिदिन निकालकर साफ करना होता है, एक जैसे नहीं हैं। दैनिक डिस्पोजेबल लेंस केवल एक बार पहनने के लिए बनाए जाते हैं। इन्हें अगले दिन दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मासिक प्रतिस्थापन वाले लेंस को निर्धारित समय पर बदलना आवश्यक है, भले ही उस अवधि में उन्हें केवल कुछ दिन ही पहना गया हो। मासिक लेंस का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें लगातार तीस दिन आँख में लगाए रखा जा सकता है। उन्हें कितने घंटे पहनना है और रात में उतारना है या नहीं, यह लेंस के प्रकार तथा चिकित्सकीय निर्देशों पर निर्भर करता है। 

कुछ लोग खर्च बचाने के लिए लेंस की उपयोग अवधि बढ़ा देते हैं। लेकिन ऐसा करने से लेंस की सतह पर जमा पदार्थों, सफाई में कमी और सूक्ष्मजीवों के संपर्क से संबंधित जोखिम बढ़ सकते हैं। लेंस ठीक दिखाई दे रहा हो, तब भी उसकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो सकती है। इसलिए लेंस की स्थिति का अनुमान केवल उसकी पारदर्शिता या पहनने में होने वाली सुविधा से नहीं लगाना चाहिए।

लेंस रखने वाला डिब्बा भी बन सकता है संक्रमण का स्रोत

कॉन्टैक्ट लेंस की देखभाल में केवल लेंस को साफ करना पर्याप्त नहीं है। उसे रखने वाला डिब्बा भी संक्रमण का स्रोत बन सकता है। यदि डिब्बे में पुराना घोल छोड़ दिया जाए और उसके ऊपर नया घोल मिला दिया जाए, तो सफाई की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रह सकती। इसी तरह डिब्बे को नल के पानी से धोकर गीला छोड़ देना भी अनुचित है। पानी और नम सतहों पर सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना रहती है।

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, लेंस के डिब्बे में बचा हुआ घोल प्रत्येक उपयोग के बाद फेंक देना चाहिए। लेंस के प्रकार के अनुरूप निर्धारित घोल से डिब्बे की सफाई करके उसे सूखने देना चाहिए। डिब्बे को सामान्यतः तीन महीने में बदलना उचित माना जाता है, अथवा निर्माता और नेत्र विशेषज्ञ के निर्देशों के अनुसार उससे पहले भी बदला जा सकता है। लेंस को साफ करने के लिए लार, नल का पानी, घर में तैयार नमक का घोल या साधारण पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए। 

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी लेंस सॉल्यूशन एक जैसे नहीं होते। कुछ घोल केवल धोने के लिए होते हैं, जबकि अन्य में संक्रमणरोधी गुण होते हैं। साधारण स्टेराइल सलाइन घोल को पूर्ण संक्रमणरोधी लेंस सॉल्यूशन का विकल्प नहीं माना जा सकता। हाइड्रोजन पेरॉक्साइड आधारित विशेष लेंस सॉल्यूशन के उपयोग में भी निर्धारित न्यूट्रलाइजेशन प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। ऐसे घोल को बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए सीधे आँख में डालना हानिकारक हो सकता है।

कॉर्निया में खरोंच से अल्सर तक कैसे पहुँचता है संक्रमण?

कॉर्निया आँख की सबसे बाहरी पारदर्शी संरचना है। सामान्य स्थिति में इसकी सतह संक्रमण पैदा करने वाले अनेक सूक्ष्मजीवों के प्रवेश के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन लेंस के गलत आकार, क्षतिग्रस्त किनारे, गलत तरीके से लगाने या निकालने और अत्यधिक रगड़ के कारण इसकी सतह पर सूक्ष्म चोट लग सकती है। ऐसी चोटों से संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है। यदि जीवाणु, फफूँद या अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीव कॉर्निया को संक्रमित कर दें, तो केराटाइटिस विकसित हो सकता है।

केराटाइटिस का अर्थ कॉर्निया में सूजन है। यह संक्रमणजनित भी हो सकता है और अन्य कारणों से भी। इसलिए प्रत्येक केराटाइटिस को जीवाणु संक्रमण या कॉर्नियल अल्सर के समान नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर संक्रमण की स्थिति में कॉर्निया में अल्सर बन सकता है। इसमें ऊतक को नुकसान पहुँचने के कारण दर्द, लालिमा, प्रकाश से परेशानी और दृष्टि में कमी जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। उपचार में देरी होने पर कॉर्निया पर स्थायी निशान बन सकता है, जिससे दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कॉन्टैक्ट लेंस से जुड़े गंभीर जोखिमों में कॉर्नियल अल्सर, संक्रमण और कुछ मामलों में स्थायी दृष्टिहानि को शामिल किया है। यह जोखिम सभी उपयोगकर्ताओं के लिए समान नहीं होता। सही फिटिंग, उपयुक्त सफाई, निर्धारित समय पर लेंस बदलने और लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने से गंभीर जटिलताओं की आशंका कम की जा सकती है। 

एकैंथअमीबा संक्रमण का इलाज कई महीने क्यों चल सकता है?

एकैंथअमीबा केराटाइटिस सामान्य जीवाणु संक्रमण से अलग हो सकता है। एकैंथअमीबा अपने जीवनचक्र में सक्रिय अवस्था के अतिरिक्त एक ऐसी संरक्षित अवस्था भी बना सकता है जिसे सिस्ट कहा जाता है। यह अवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों में सूक्ष्मजीव को जीवित रहने में सहायता करती है और उपचार को जटिल बना सकती है। कुछ मामलों में संक्रमण की पहचान देर से होती है क्योंकि प्रारंभिक लक्षण अन्य प्रकार के केराटाइटिस से मिलते-जुलते होते हैं।

रोग की पहचान के लिए नेत्र विशेषज्ञ कॉर्निया की जाँच, आवश्यकतानुसार नमूने का परीक्षण और विशेष परिस्थितियों में कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी जैसी तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं। उपचार में चिकित्सकीय निगरानी में विशेष संक्रमणरोधी दवाएँ दी जाती हैं। रोग की गंभीरता के अनुसार उपचार कई महीने तक चल सकता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, कुछ मामलों में उपचार एक वर्ष या उससे अधिक भी चल सकता है। गंभीर क्षति होने पर कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ सकती है। 

हर्षित के मामले में लगभग तीन महीने तक उपचार चलने का विवरण इसी प्रकार के संक्रमण की संभावित जटिलता को समझने में सहायता करता है। हालाँकि, उसकी चिकित्सकीय जाँच की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए संक्रमण की विशिष्ट अवस्था, उपचार में इस्तेमाल की गई दवाओं या उसकी अंतिम दृष्टि क्षमता के बारे में कोई अतिरिक्त निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

आँख लाल हो तो सामान्य जलन समझकर अनदेखा न करें

कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले व्यक्ति की आँख में लालिमा, दर्द, लगातार पानी आना, असामान्य स्राव, प्रकाश सहन न होना या धुँधला दिखाई देना संक्रमण अथवा अन्य जटिलता का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में लेंस तुरंत निकाल देना चाहिए और जल्द से जल्द नेत्र विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए। विशेष रूप से दर्द के साथ दृष्टि प्रभावित होने पर उसी दिन चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है। लक्षणों को छिपाने के लिए स्वयं से दवा डालना या बिना सलाह के एंटीबायोटिक तथा स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप इस्तेमाल करना नुकसान पहुँचा सकता है।

स्टेरॉयड युक्त दवाओं का अनुचित उपयोग कुछ संक्रमणों को गंभीर बना सकता है या उनकी पहचान में देरी कर सकता है। इसलिए पहले इस्तेमाल की गई किसी पुरानी दवा को नए संक्रमण में दोबारा लगाना उचित नहीं है। यदि लेंस पहनकर तैराकी करने या पानी के संपर्क में आने के बाद आँख में तकलीफ शुरू हुई हो, तो चिकित्सक को यह जानकारी अवश्य देनी चाहिए। इससे संक्रमण के संभावित कारणों का मूल्यांकन करने में सहायता मिल सकती है।

रंगीन और सौंदर्य प्रसाधन वाले लेंस भी चिकित्सकीय उपकरण हैं

कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग केवल कमजोर दृष्टि को ठीक करने के लिए नहीं किया जाता। कुछ लोग आँखों का रंग बदलने या किसी विशेष अवसर पर अलग दिखने के लिए भी रंगीन लेंस पहनते हैं। ऐसे लेंस को कई बार सौंदर्य प्रसाधन समझकर बिना उचित जाँच के खरीदा जाता है। लेकिन रंगीन कॉन्टैक्ट लेंस भी सीधे आँख की सतह के संपर्क में आते हैं और गलत फिटिंग या अनुचित देखभाल से वही समस्याएँ पैदा कर सकते हैं जो सामान्य दृष्टि सुधार वाले लेंस से होती हैं।

हर व्यक्ति की आँख की बनावट और कॉर्निया की वक्रता एक जैसी नहीं होती। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति का लेंस पहनना या केवल रंग तथा आकार देखकर लेंस खरीद लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। नेत्र विशेषज्ञ द्वारा उपयुक्त फिटिंग और उपयोग संबंधी सलाह लेना आवश्यक है। किसी मित्र के साथ लेंस साझा करना भी अनुचित है क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है।

सुरक्षित इस्तेमाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

नेत्र विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं की सलाह के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस को छूने से पहले हाथ साबुन से अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से सुखाने चाहिए। लेंस को निर्धारित तरीके से साफ और संक्रमणमुक्त करना चाहिए। उसे नल के पानी, बोतलबंद पानी या लार से कभी नहीं धोना चाहिए। तैरने, नहाने और सोने से पहले सामान्य दैनिक उपयोग वाले लेंस निकाल देने चाहिए। लेंस का घोल हर बार नया इस्तेमाल करना चाहिए और पुराने घोल में नया घोल मिलाने से बचना चाहिए। निर्धारित अवधि समाप्त होने पर लेंस बदल देना चाहिए तथा क्षतिग्रस्त लेंस दोबारा नहीं पहनना चाहिए।

यदि तैराकी या शॉवर के दौरान गलती से लेंस पानी के संपर्क में आ जाए, तो सीडीसी की सलाह है कि उसे यथाशीघ्र निकाल दिया जाए। दैनिक डिस्पोजेबल लेंस को फेंक देना चाहिए। दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले लेंस के लिए उचित संक्रमणरोधी प्रक्रिया आवश्यक है। यदि आँख में दर्द, लालिमा या धुँधलापन हो, तो लेंस दोबारा पहनने के बजाय चिकित्सकीय जाँच करानी चाहिए। तैराकी के दौरान दृष्टि सुधार की आवश्यकता होने पर उपयुक्त नंबर वाले स्विमिंग गॉगल्स एक सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं। 

कॉन्टैक्ट लेंस सुविधाजनक हैं, लेकिन लापरवाही की गुंजाइश नहीं

कॉन्टैक्ट लेंस आधुनिक नेत्र चिकित्सा की उपयोगी सुविधा हैं। वे चश्मे का विकल्प उपलब्ध कराते हैं और अनेक लोगों के लिए खेलकूद, पेशेवर गतिविधियों तथा दैनिक जीवन में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन उनकी सुविधा के साथ नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। लेंस को सामान्य सौंदर्य प्रसाधन समझकर इस्तेमाल करना, कई महीने तक न बदलना या सफाई की प्रक्रिया को अनावश्यक मानना आँखों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

लखनऊ के अस्पतालों में सामने आ रहे मामले इसी आवश्यकता की याद दिलाते हैं। गोमतीनगर के किशोर को तैराकी के दौरान लेंस पहनने के बाद गंभीर संक्रमण हुआ और लगभग तीन महीने उपचार कराना पड़ा। ऐसे अनुभवों का उद्देश्य कॉन्टैक्ट लेंस के प्रति अनावश्यक भय पैदा करना नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आँख में मामूली असुविधा और गंभीर संक्रमण के प्रारंभिक लक्षण कभी-कभी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए समय पर लेंस निकालना, विशेषज्ञ की सलाह लेना और स्वच्छता के नियमों का पालन करना दृष्टि की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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