ये क्या.. कोविड-19 वैक्सीन थी असुरक्षित? मिसकैरेज का बढ़ा खतरा, 60 हजार महिलाओं की 'इस' स्टडी ने उड़ाई 'अफवाहों' की धज्जियां!

COVID-19 vaccine fertility study: यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल कम्युनिकेशंस मेडिसिन में पब्लिश हुआ है।

Priya Singh Bisen
Published on: 7 Feb 2026 6:30 AM IST
COVID-19 vaccine fertility study
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COVID-19 vaccine fertility study (PHOTO: SOCIAL MEDIA)

COVID-19 vaccine fertility study: कोविड-19 वैक्सीनेशन को लेकर लंबे वक़्त से सोशल मीडिया पर कई तरह की आशंकाएं और अफवाहें फैलती रही हैं। विशेषकर महिलाओं की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को लेकर यह दावा किया गया कि कोविड वैक्सीन गर्भधारण की संभावना को कम कर सकती है। इसे लेकर लेकिन अब एक बड़ी और डिटेल स्टडी ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

स्वीडन की लिंकोपिंग यूनिवर्सिटी में सोशल मेडिसिन के प्रोफेसर टॉमस टिम्पका के नेतृत्व में तकरीबन 60,000 महिलाओं पर किए गए शोध से यह साफ़ हो गया है कि कोविड-19 की MRNS वैक्सीन का प्रजनन क्षमता पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल कम्युनिकेशंस मेडिसिन में पब्लिश हुआ है।

जन्म दर में कमी पर खड़े हुए थे सवाल

महामारी के बाद के सालों तक स्वीडन समेत कुछ देशों में जन्म दर में गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद कुछ समूहों ने यह सवाल भी खड़े किये गए कि क्या नई कोविड वैक्सीन इस कमी का कारण हो सकता है। हालांकि, ताजा अध्ययन के निष्कर्ष इन आशंकाओं को निराधार बताते हैं।

इसे लेकर प्रोफेसर टिम्पका ने कहा, "हमारे विश्लेषण से यह साफ़ है कि कोविड-19 के खिलाफ दी गई MRNS वैक्सीन जन्म दर में आई कमी का कारण नहीं थी। जन्म दर में वैक्सीनेटेड और बिना वैक्सीनेटेड महिलाओं के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।"

गर्भपात के मामलों में भी नहीं दिखा फर्क

शोधकर्ताओं ने सिर्फ जन्म दर ही नहीं, बल्कि गर्भपात (मिसकैरेज) के मामलों का भी विश्लेषण किया। स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं को वैक्सीन लगी थी और जिनको नहीं लगी थी, उनके बीच गर्भपात की दर में भी कोई विशेष अंतर नहीं था।

बता दे, यह अध्ययन 18 से 45 साल की उम्र वाली महिलाओं पर आधारित था, जिनमें से लगभग 75% को साल 2021 से 2024 के बीच एक या दो बार कोविड वैक्सीन दी गई थी। शोध में हेल्थ केयर रिकॉर्ड से जन्म, टीकाकरण, गर्भपात और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों का प्रयोग किया गया।

अन्य कारकों को भी रखा गया ध्यान में

स्टडी की एक सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट करा रहे जोड़ों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि सामान्य आबादी में गर्भाधान और गर्भावस्था से जुड़े मामलों का व्यापक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य कारकों को भी ध्यान में रखा, जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में कोविड वैक्सीन और फर्टिलिटी के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया था। यह नई स्टडी उन निष्कर्षों को और मजबूत करती है।

कोरोना संक्रमण अधिक खतरनाक

कई शोध यह भी बता चुके हैं कि कोविड संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसके मुकाबले वैक्सीनेशन गंभीर बीमारी और जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम करता है।

प्रोफेसर टिम्पका ने कहा, "मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाण स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि कोविड-19 टीके के लाभ संभावित जोखिमों से कहीं ज्यादा हैं।"

बता दे, उन्होंने परिवार शुरू करने की योजना बना रहीं महिलाओं से अपील की कि वे वैक्सीनेशन को लेकर अनावश्यक डर या भ्रम में न रहें। वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित है और यह महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करती।

Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen

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