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अत्यधिक सेक्स स्वास्थ्य के लिए नॉर्मल या खतरनाक? जानिए कब बन सकता है परेशानी का कारण
Excessive Sex Side Effects: क्या बार-बार सेक्स करने से शरीर कमजोर होता है या किस तरह की परेशनीय या सकती हैं ? जानिए शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में अत्यधिक सेक्स कब सेहत के लिए परेशानी बन सकता है।
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Excessive Sex Side Effects: सेक्स को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं और सवाल मौजूद हैं। इनमें एक सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या ज्यादा सेक्स करने से शरीर कमजोर हो जाता है? क्या बार-बार सेक्स करना पुरुषों या महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इस सवाल का जवाब केवल सेक्स की संख्या गिनकर नहीं दिया जा सकता। Sexual health से जुड़े विशेषज्ञों और उपलब्ध चिकित्सा जानकारी के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए सेक्स की कोई एक तय “सामान्य” संख्या नहीं होती।
शोध और स्वास्थ्य संस्थानों की जानकारी यह बताती है कि सेक्स की frequency से ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना है कि इसका शरीर, मानसिक स्वास्थ्य, रिश्ते और रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है। अगर सेक्स सुरक्षित, सहमति से और बिना किसी शारीरिक परेशानी के हो रहा है तो केवल बार-बार सेक्स करने को अपने आप में शरीर के लिए खतरनाक नहीं माना जाता।
कितनी बार सेक्स करना माना जाता है ज्यादा?
Sexual health experts के अनुसार सेक्स के लिए कोई एक तय संख्या नहीं है, जिसे सभी लोगों के लिए सामान्य या अत्यधिक कहा जा सके। कुछ लोग सप्ताह में कई बार सेक्स करते हैं, कुछ लोग रोजाना सेक्स करना पसंद करते हैं और कुछ लोगों की sexual desire इससे काफी कम होती है। दोनों ही स्थितियां अपने आप में असामान्य नहीं हैं।
Planned Parenthood की sexual health guidance में भी बताया गया है कि सेक्स की कोई निर्धारित “normal” मात्रा नहीं होती। इसकी frequency व्यक्ति की sexual desire, relationship, lifestyle, stress और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए सिर्फ यह कहना कि कोई व्यक्ति सप्ताह में इतने या महीने में इतने बार सेक्स करता है, उसे “अत्यधिक” बताने के लिए पर्याप्त नहीं है।
शरीर कमजोर होने की धारणा कितनी सही?
बार-बार सेक्स करने से शरीर की स्थायी ताकत खत्म हो जाती है या शरीर कमजोर हो जाता है, ऐसी धारणा को चिकित्सा विज्ञान सामान्य नियम के तौर पर स्वीकार नहीं करता। सेक्स के दौरान शरीर ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए इसके बाद कुछ समय के लिए थकान या आराम की जरूरत महसूस होना स्वाभाविक हो सकता है।
इसे शरीर की स्थायी कमजोरी समझना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य पर असर समझने के लिए नींद, खान-पान, शारीरिक गतिविधि, तनाव और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। यानी अगर किसी व्यक्ति को सेक्स के बाद कुछ समय के लिए थकान महसूस होती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी शारीरिक शक्ति कम हो रही है।
कब “ज्यादा सेक्स” परेशानी बन सकता है?
Health experts के नजरिए से समस्या संख्या से ज्यादा उसके असर में छिपी होती है। अगर सेक्स के कारण व्यक्ति की नींद, काम, पढ़ाई, सामाजिक जीवन या दूसरे जरूरी काम प्रभावित होने लगें तो इसे समस्या की तरह देखा जा सकता है।
इसी तरह अगर कोई व्यक्ति शारीरिक दर्द या परेशानी के बावजूद लगातार सेक्स करता रहे तो यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। Sexual activity ऐसी होनी चाहिए जिसमें दोनों पार्टनर सहज और सहमत हों। Sexual health guidance भी healthy sex life को consent, respect, safety और overall well-being से जोड़ती है।
बार-बार सेक्स से दर्द और जलन क्यों हो सकती है?
बहुत कम अंतराल में लगातार सेक्स करने पर कुछ लोगों में genital area में irritation, soreness या दर्द हो सकता है। खासकर तब जब शरीर में पर्याप्त lubrication न हो।
Health guidance के अनुसार vaginal dryness या पर्याप्त lubrication न होने पर सेक्स के दौरान discomfort और irritation बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में water-based lubricant मददगार हो सकता है। अगर dryness लगातार बनी रहे, असामान्य discharge या सेक्स के बाद bleeding हो तो medical advice लेना जरूरी है।
इसलिए शरीर में दर्द या जलन होने के बावजूद केवल frequency बनाए रखने की कोशिश करना सही नहीं है। शरीर को आराम देना और परेशानी का कारण समझना ज्यादा जरूरी है।
संक्रमण का खतरा भी समझना जरूरी
Sex की frequency बढ़ने पर sexual health में protection का महत्व भी बढ़ जाता है। यहां सबसे बड़ा मुद्दा यह नहीं है कि सेक्स कितनी बार किया जा रहा है बल्कि यह है कि सेक्स सुरक्षित तरीके से किया जा रहा है या नहीं।
WHO के अनुसार condoms का सही और लगातार इस्तेमाल HIV समेत कई sexually transmitted infections यानी STIs और अनचाही pregnancy के जोखिम को कम करने में प्रभावी है। इसलिए बार-बार सेक्स करने वाले लोगों के लिए protection, hygiene और जरूरत के अनुसार STI testing पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
क्या पुरुषों की “ताकत” खत्म होती है?
पुरुषों में बार-बार ejaculation को लेकर भी कई तरह की धारणाएं मौजूद हैं। इनमें सबसे आम धारणा यह है कि ejaculation के कारण शरीर की ताकत लगातार कम होती जाती है। लेकिन उपलब्ध sexual health information इस तरह की स्थायी कमजोरी को सामान्य परिणाम के रूप में स्थापित नहीं करती।
Sex के बाद थोड़ी देर के लिए थकान या नींद महसूस हो सकती है। लेकिन इसे स्थायी शारीरिक कमजोरी समझना उचित नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार कमजोरी, असामान्य थकान या दूसरे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो इसका कारण केवल सेक्स मानने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
महिलाओं में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी?
महिलाओं में भी सेक्स की कोई तय संख्या ऐसी नहीं है जिसे हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक कहा जा सके। हालांकि पर्याप्त lubrication न होने पर सेक्स के दौरान दर्द, जलन या irritation हो सकती है।
अगर सेक्स के बाद बार-बार bleeding, unusual discharge, जलन या पेशाब करते समय दर्द जैसी समस्या हो रही है तो इसे केवल “ज्यादा सेक्स” का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे infection या दूसरी medical condition भी हो सकती है। NHS की health guidance के मुताबिक लगातार vaginal dryness, unusual discharge या सेक्स के बाद bleeding होने पर medical advice लेना चाहिए।
सेक्स और मानसिक स्वास्थ्य का कनेक्शन
गौरतलब हो कि Sexual health केवल शरीर तक सीमित नहीं है। WHO के अनुसार sexual health में physical, emotional, mental और social well-being भी शामिल है। यानी किसी व्यक्ति का sexual relationship उसकी मानसिक और सामाजिक well-being से भी जुड़ा हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को सेक्स को लेकर लगातार तनाव, दबाव, guilt या anxiety महसूस हो रही है तो इस पहलू पर भी ध्यान देना जरूरी है। Healthy sexual relationship में दोनों पार्टनर की इच्छा, सहमति और boundaries का सम्मान होना जरूरी है।
क्या रोजाना सेक्स करना खतरनाक है?
जानकार मानते हैं कि अगर दोनों पार्टनर स्वस्थ हैं, सेक्स सहमति से हो रहा है, protection का ध्यान रखा जा रहा है और इससे शरीर या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है तो केवल रोजाना सेक्स करने के आधार पर इसे खतरनाक नहीं कहा जा सकता।
Planned Parenthood की sexual health guidance भी बताती है कि कुछ लोग रोजाना सेक्स करते हैं और कुछ बहुत कम। इसे अपने आप में असामान्य नहीं माना जाता। चिंता तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब sexual activity व्यक्ति की daily life में दखल देने लगे या शारीरिक परेशानी पैदा करे।
शरीर के इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर सेक्स के बाद लगातार दर्द, चोट, जलन, असामान्य bleeding, unusual discharge या पेशाब के दौरान दर्द हो रहा है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इसी तरह अगर सेक्स के कारण नींद पूरी नहीं हो रही, काम या पढ़ाई प्रभावित हो रही है या व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहने लगा है तो sexual activity के pattern पर दोबारा विचार करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या sexual health professional से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।
केवल संख्या के आधार पर परिभाषा संभव नहीं
तो कम मिलकर अत्यधिक सेक्स को केवल संख्या के आधार पर परिभाषित करना सही नहीं है। उपलब्ध health guidance के मुताबिक हर व्यक्ति की sexual desire और frequency अलग हो सकती है। इसलिए यह कहना कि रोजाना या बार-बार सेक्स करने से हर व्यक्ति का शरीर कमजोर हो जाएगा, वैज्ञानिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं है।
हालांकि सेक्स के दौरान safety, consent और hygiene को नजरअंदाज करने पर STI, अनचाही pregnancy, irritation और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। WHO भी sexual health को सुरक्षित, सम्मानजनक और सहमति आधारित sexual experiences से जोड़ता है।
इसलिए सेक्स की संख्या गिनने से ज्यादा जरूरी है शरीर के संकेतों को समझना। अगर शरीर सहज है, दोनों पार्टनर की सहमति है, protection का ध्यान रखा जा रहा है और daily life प्रभावित नहीं हो रही है तो केवल frequency को देखकर इसे “खतरनाक” कहना उचित नहीं होगा।


