Obesity In Female: सावधान! ओवरईटिंग नहीं, इस हार्मोनल समस्या से तेजी से बढ़ रहा महिलाओं का मोटापा

Obesity In Female: महिलाओं की अधिकतर समस्याएं हार्मोनल बैलेंस के बिगड़ जाने से शुरू होती हैं। मोटापा भी इसमें शामिल है।

Priya Singh Bisen
Published on: 7 Jun 2026 7:00 AM IST
Obesity In Female
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Obesity In Female: आजकल महिलाओं में बढ़ते वजन की समस्या तेजी से सामने आ रही है। आमतौर पर इसे गलत खानपान, ओवरईटिंग या फिजिकल एक्टिविटी की कमी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में इसका मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन होता है। विशेषकर PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) जैसी स्थिति महिलाओं में मोटापे का एक बड़ा कारण बनती जा रही है।

क्या है PMOS और कैसे बढ़ाता है वजन?

PMOS एक पेचीदा हार्मोनल दिक्कत है, जिसमें शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। साथ ही इंसुलिन रेसिस्टेंस की समस्या भी विकसित हो जाती है, जिससे शरीर में शुगर को ऊर्जा में परिवर्तन की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर असंतुलित हो जाता है। इसके कारण शरीर अतिरिक्त फैट जमा करने लगता है, खासकर पेट और कमर के आसपास। इस स्थिति को सेंट्रल ओबेसिटी (Central Obesity) कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लगभग हर 5 में से एक महिला किसी न किसी रूप में इस तरह की हार्मोनल समस्या से प्रभावित हो सकती है, हालांकि हर केस की गंभीरता अलग होती है।

सामान्य भोजन के बावजूद बढ़ता वजन

PMOS से प्रभावित महिलाओं में एक आम समस्या यह देखी जाती है कि वे सामान्य मात्रा में भोजन करती हैं, फिर भी उनका वजन लगातार बढ़ता रहता है। इसका कारण हार्मोनल असंतुलन है, जो भूख को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है। इस स्थिति में कई महिलाओं को बार-बार भूख लगती है या मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। शरीर के भीतर फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जबकि फैट बर्न करने की क्षमता कम हो जाती है।

इसके अलावा, कई मामलों में फैट शरीर के अंदरूनी भागों जैसे अंगों के आसपास जमा होता है, जिसे विसरल फैट (Visceral Fat) कहा जाता है। यह स्थिति हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।

मोटापा और हार्मोन का कनेक्शन क्या है ?

डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा और PMOS एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं। जैसे-जैसे वजन बढ़ता है, इंसुलिन रेसिस्टेंस और बढ़ जाती है, जिससे हार्मोनल असंतुलन और गंभीर हो जाता है।

इस चक्र के कारण वजन कम करना और भी मुश्किल हो जाता है। शरीर में हल्की सूजन (Inflammation) भी बनी रहती है, जो मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है और फैट तेजी से जमा होने लगता है।

लक्षण जिन्हें अनदेखा न करें

PMOS के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

- अचानक वजन बढ़ना

- पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होना

- चेहरे पर मुंहासे

- अनचाहे बालों की वृद्धि

- बार-बार भूख लगना

- थकान और मूड स्विंग्स

इन लक्षणों को अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों के मुताबिक, PMOS से जुड़ी समस्या केवल डाइट कंट्रोल से ठीक नहीं होती। इसके लिए एक समग्र इलाज (Holistic Approach) जरूरी है।

इसमें शामिल हैं:

- डॉक्टर की सलाह और सही मेडिकल ट्रीटमेंट

- नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग

- संतुलित और पौष्टिक आहार

- पर्याप्त नींद

- तनाव प्रबंधन

जीवनशैली में सुधार करके हार्मोनल असंतुलन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और वजन को भी स्थिर रखा जा सकता है।

बता दे, महिलाओं में बढ़ता मोटापा सिर्फ खानपान या दिनचर्या का नतीजा नहीं है, बल्कि कई बार इसके पीछे हार्मोनल कारण भी जिम्मेदार होते हैं। PMOS जैसी स्थितियों को वक़्त पर पहचानकर सही उपचार और जीवनशैली अपनाने से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

Priya Singh Bisen
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Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen is a Content Writer at Newstrack.com.

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