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FSSAI HFSS Food Rules: स्कूल के 50 मीटर दायरे में नहीं बिकेंगे चिप्स-कोल्ड ड्रिंक? FSSAI ने बढ़ाई सख्ती, जानें पूरा मामला
FSSAI HFSS Food Rules को लेकर बड़ा अपडेट आया है। स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और अन्य HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पहले से मौजूद नियम और नए ड्राफ्ट की पूरी जानकारी जानें।
FSSAI HFSS Food Rules: What Does the 50-Metre School Food Rule Really Mean?
FSSAI HFSS Food Rules: स्कूल की छुट्टी होते ही गेट के बाहर चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक, फ्राइड स्नैक्स और दूसरी पैकेज्ड चीजों की दुकानों पर बच्चों की भीड़ लगना आम बात है। कुछ मिनटों की यह भूख धीरे-धीरे ऐसी आदत में बदल सकती है, जिसमें घर के पौष्टिक खाने की जगह ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाली चीजें ले लेती हैं। बच्चों की इसी बदलती खानपान की आदत को लेकर अब खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI के नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। सबसे खास बात यह है कि स्कूलों के आसपास HFSS यानी High Fat, Sugar and Salt खाद्य पदार्थों को लेकर 50 मीटर का प्रावधान बिल्कुल नया नहीं है। FSSAI के 2020 के ‘Safe Food and Balanced Diets for Children in Schools’ नियमों में स्कूल कैंपस और स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थ बेचने, ऑफर करने या मार्केट करने पर रोक का प्रावधान पहले से मौजूद है।
FSSAI ने अब क्या बदला है?
अगस्त 2026 में FSSAI ने इन नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मकसद यह स्पष्ट करना है कि किसी खाद्य पदार्थ को ‘हाई फैट’, ‘हाई शुगर’ या ‘हाई सॉल्ट’ कब माना जाएगा। ड्राफ्ट में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की 2024 की Dietary Guidelines के आधार पर सीमाएं प्रस्तावित की गई हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 4.2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त फैट और तरल खाद्य पदार्थ में 100 मिलीलीटर पर 1.5 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त फैट को हाई फैट माना जाएगा। इसी तरह ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 3 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी और तरल में 100 मिलीलीटर पर 2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी हाई शुगर की श्रेणी में आएगी। नमक के लिए ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 0.625 ग्राम और तरल खाद्य पदार्थ में 100 मिलीलीटर पर 0.175 ग्राम की सीमा प्रस्तावित है।
चिप्स, कोल्ड ड्रिंक से लेकर बर्गर तक आएंगे दायरे में
HFSS खाद्य पदार्थों में सिर्फ पैकेट वाले चिप्स या कोल्ड ड्रिंक ही शामिल नहीं हैं। FSSAI से जुड़े नियमों और पहले के दिशा-निर्देशों में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले कई खाद्य पदार्थों को बच्चों के लिए सीमित करने की बात कही गई है। इनमें फ्राइड चिप्स, शुगर-स्वीटेंड कार्बोनेटेड ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और कई कन्फेक्शनरी उत्पाद शामिल रहे हैं।
यानी इसका मकसद किसी एक ब्रांड या किसी एक खाद्य पदार्थ को निशाना बनाना नहीं, बल्कि बच्चों के आसपास ऐसे भोजन की उपलब्धता कम करना है जिसमें पोषण की तुलना में नमक, चीनी या फैट की मात्रा अधिक हो।
स्कूल कैंपस में पहले से लागू हैं कई पाबंदियां
FSSAI के 2020 नियमों में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय की गई है। स्कूल कैंपस में हाई फैट, ट्रांस फैट, अतिरिक्त चीनी या सोडियम वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के साथ ऐसे खाद्य पदार्थों के विज्ञापन और मार्केटिंग पर भी रोक है। स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने तथा पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट नहीं, राजस्थान हाई कोर्ट का अहम आदेश
इस मामले में एक और तथ्य ध्यान देने लायक है। 24 अगस्त 2026 को राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूलों में इन मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। अदालत ने राजस्थान में स्कूल गेट से 50 मीटर के भीतर HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने और अधिकारियों को निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर कार्बोनेटेड ड्रिंक, चिप्स, ट्रांस फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य HFSS खाद्य पदार्थों को लेकर अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे देश में 50 मीटर के नियम को लागू करने के लिए अभी सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का इंतजार हो रहा है। मौजूदा FSSAI नियम पहले से मौजूद हैं। अगस्त 2026 का नया कदम मुख्य रूप से HFSS खाद्य पदार्थों की श्रेणी और पोषण सीमा को ज्यादा स्पष्ट करने से जुड़ा है। इसके ड्राफ्ट पर आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं।
बच्चों की सेहत को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
बचपन में खाने की आदतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। अगर स्कूल के आसपास हर दिन मीठे पेय, चिप्स और तले हुए स्नैक्स आसानी से उपलब्ध हों, तो बच्चों के लिए इनका सेवन सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। इसी वजह से स्कूल को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली की आदत विकसित करने वाली जगह के तौर पर भी देखा जा रहा है।
FSSAI का जोर स्कूल कैंटीन और आसपास के खाद्य माहौल को बेहतर बनाने पर है, ताकि बच्चों को फल, पौष्टिक स्नैक्स, संतुलित भोजन और स्थानीय खाद्य विकल्पों की ओर प्रोत्साहित किया जा सके। 2020 के नियमों में स्कूलों को ‘Eat Right Campus’ की दिशा में काम करने और संतुलित भोजन को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।
सिर्फ नियम नहीं, निगरानी भी जरूरी
कागज पर नियम बनने से बच्चों की थाली नहीं बदलती। असली चुनौती इनके प्रभावी पालन की है। राजस्थान हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा कि 2020 के नियम लागू होने के छह साल से ज्यादा समय बाद भी इनके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत बनी हुई है। अदालत ने अधिकारियों को निरीक्षण और अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी है। आने वाले समय में FSSAI के नए ड्राफ्ट पर मिले सुझावों और अंतिम नियमों से यह और स्पष्ट होगा कि स्कूलों और उनके आसपास किन खाद्य पदार्थों पर किस तरह की पाबंदी लागू होगी।


