Gond Laddu Ke Fayde Kya Hai: क्या गोंद के लड्डू खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं? जानिए सच और मिथक

Gond Laddu Ke Fayde aur Nuksan: गोंद के लड्डू खाने से क्या हड्डियां मजबूत होती हैं? जानिए गोंद के प्रकार, नई मां के लिए फायदे, पोषण, वजन, ब्लड शुगर और वैज्ञानिक प्रमाण।

Yogesh Mishra
Published on: 29 Oct 2026 5:51 PM IST
Gond Laddu Ke Fayde aur Nuksan |Gond Ladoo Benefits Science | Newstrack Hindi News
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Gond Laddu Ke Fayde Kya Hai: सर्दियाँ आते ही घरों में गोंद के लड्डू बनने लगते हैं। कई घरों में इन्हें नई माँ को भी खिलाया जाता है। माना जाता है कि गोंद के लड्डू खाने से शरीर को ताकत मिलती है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं और प्रसव के बाद महिला जल्दी स्वस्थ हो जाती है। लेकिन क्या गोंद सच में हड्डियों को मजबूत बनाता है? क्या यह जोड़ों के दर्द में राहत देता है? और क्या नई माँ के लिए इसे खाना ज़रूरी है?

इन सवालों के जवाब जानने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि गोंद क्या है, इसके कितने प्रकार हैं और शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है।

गोंद क्या होता है?

गोंद एक चिपचिपा पदार्थ है, जो कुछ पेड़ों के तने या शाखाओं से निकलता है। पेड़ की छाल में चोट लगने पर या किसी दूसरे कारण से यह पदार्थ बाहर आ सकता है। हवा में सूखने के बाद यह सख्त हो जाता है।

खाने में इस्तेमाल होने वाला गोंद आम तौर पर पेड़ों से मिलने वाला प्राकृतिक पदार्थ होता है। हालांकि, हर तरह का गोंद खाने योग्य नहीं होता। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि आप किस तरह का गोंद इस्तेमाल कर रहे हैं।आम तौर पर तीन तरह के गोंद की चर्चा होती है।

खाने वाला गोंद: इसे घी में तलकर लड्डू बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। तलने पर यह फूलकर हल्का और कुरकुरा हो जाता है।

गोंद कतीरा: यह पानी में डालने पर फूलकर जेल (gel) जैसा बन जाता है। इसका इस्तेमाल शरबत और कुछ दूसरे खाद्य पदार्थों में किया जाता है। यह सामान्य लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले गोंद से अलग होता है।

गम अरेबिक: यह भी पेड़ों से मिलने वाला गोंद है। इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और दवाओं समेत कई चीज़ों में किया जाता है।

इन तीनों के गुण और इस्तेमाल अलग-अलग हैं। इसलिए इन्हें एक ही चीज़ समझना ठीक नहीं है।

गोंद को घी में तलने पर वह फूल क्यों जाता है?

गोंद के लड्डू बनाने के लिए गोंद को अक्सर घी में तला जाता है। गर्म घी में डालने पर गोंद तेजी से फूलता है और हल्का, कुरकुरा हो जाता है। इसका कारण गोंद के अंदर मौजूद नमी और गर्मी के असर से उसकी बनावट में होने वाला बदलाव है। तलने के दौरान गोंद के अंदर मौजूद थोड़ी-सी नमी भाप बनती है, जिससे वह फूल सकता है।फूलने के बाद गोंद को पीसकर या तोड़कर आटे, मेवे और दूसरे सामान के साथ मिलाया जाता है। फिर इससे लड्डू बनाए जाते हैं। ध्यान रहे कि गोंद का फूलना अपने आप में इस बात का सबूत नहीं है कि उसमें कोई खास औषधीय गुण पैदा हो गए हैं। यह मुख्य रूप से गर्मी से होने वाला बदलाव है।

गोंद के लड्डू सर्दियों में ही क्यों खाए जाते हैं?

सर्दियों में गोंद के लड्डू खाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इन्हें बनाने में आम तौर पर घी, आटा, चीनी या गुड़, मेवे और गोंद का इस्तेमाल होता है। इन चीज़ों से शरीर को ऊर्जा मिलती है। ठंड के मौसम में जब कुछ लोगों की शारीरिक गतिविधि बढ़ जाती है या उन्हें ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है, तब ऐसे खाद्य पदार्थ उनके काम आ सकते हैं। हालांकि, गोंद के लड्डू सिर्फ सर्दियों में ही खाए जा सकते हैं, ऐसा कोई नियम नहीं है। इन्हें दूसरे मौसम में भी खाया जा सकता है। बस मात्रा का ध्यान रखना ज़रूरी है, क्योंकि इनमें कैलोरी और वसा काफी हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति कम शारीरिक मेहनत करता है या उसका वजन पहले से बढ़ा हुआ है, तो उसे रोज़ाना कई लड्डू खाने से बचना चाहिए।

क्या गोंद के लड्डू खाने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं?

गोंद के लड्डुओं को अक्सर हड्डियों और जोड़ों के लिए फायदेमंद बताया जाता है। लेकिन इस दावे को समझना ज़रूरी है। हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम, विटामिन डी, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित शारीरिक गतिविधि की ज़रूरत होती है। गोंद के लड्डुओं में मौजूद मेवे और दूसरे खाद्य पदार्थ कुछ पोषक तत्व दे सकते हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि गोंद खुद हड्डियों को मजबूत करता है। इसी तरह, यह दावा भी पक्के वैज्ञानिक प्रमाणों से साबित नहीं हुआ है कि गोंद के लड्डू खाने से जोड़ों का दर्द या घुटनों की परेशानी ठीक हो जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि लड्डू बेकार हैं। वे संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें हड्डियों की बीमारी का इलाज नहीं मानना चाहिए।

हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित व्यायाम और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह अधिक महत्वपूर्ण हैं।

नई माँ को गोंद के लड्डू क्यों खिलाए जाते हैं?

कई परिवारों में बच्चे के जन्म के बाद माँ को गोंद के लड्डू खिलाने की परंपरा है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि प्रसव के बाद महिला का शरीर थका हुआ होता है और उसे ठीक होने के लिए अच्छे भोजन की ज़रूरत होती है।

इस समय शरीर को पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और दूसरे पोषक तत्व चाहिए होते हैं। घी, मेवे, आटा और गोंद से बने लड्डू ऊर्जा देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि प्रसव के बाद स्वस्थ होने के लिए केवल गोंद के लड्डू खाना काफी नहीं है। दालें, दूध या दही, फल, सब्जियाँ, अनाज और प्रोटीन से भरपूर दूसरे खाद्य पदार्थ भी ज़रूरी हैं। यह भी ध्यान रखें कि हर महिला की ज़रूरत एक जैसी नहीं होती। अगर किसी महिला को मधुमेह है, गर्भावस्था के दौरान शुगर बढ़ी थी या डॉक्टर ने खाने-पीने में कुछ सावधानियाँ बताई हैं, तो उसे लड्डुओं की मात्रा तय करने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

गोंद के लड्डू खाने से प्रसव के बाद शरीर जल्दी ठीक हो जाता है या माँ की ताकत निश्चित रूप से बढ़ जाती है, इस बारे में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इन्हें पौष्टिक भोजन का एक हिस्सा समझना बेहतर है, किसी ज़रूरी दवा की तरह नहीं।

क्या गोंद पेट के लिए फायदेमंद है?

कुछ तरह के गोंद में ऐसे रेशे होते हैं, जो पाचन तंत्र में अलग तरह से काम करते हैं। कुछ रेशे आँतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकते हैं। ऐसे रेशों को प्रीबायोटिक कहा जाता है। लेकिन हर तरह के गोंद में रेशों की मात्रा और उनका असर एक जैसा नहीं होता। इसलिए एक तरह के गोंद के बारे में मिली जानकारी को सभी तरह के गोंद पर लागू नहीं किया जा सकता।

गोंद के लड्डुओं में मौजूद घी, चीनी, आटा और मेवे भी उनके पाचन और शरीर पर पड़ने वाले असर को प्रभावित करते हैं। अगर आपको कब्ज़ या पेट से जुड़ी कोई परेशानी है, तो सिर्फ गोंद के लड्डुओं पर निर्भर न रहें। पर्याप्त पानी पीना, फल-सब्जियाँ खाना और रोज़ाना शारीरिक गतिविधि करना भी ज़रूरी है।

क्या गोंद वजन और ब्लड शुगर को प्रभावित करता है?

इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि गोंद किस प्रकार का है और उसे किस तरह खाया जा रहा है। कुछ प्रकार के गोंद में घुलनशील रेशे होते हैं, जो पाचन और ब्लड शुगर पर असर डाल सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गोंद से बने सभी खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को नियंत्रित करते हैं। गोंद के लड्डुओं में घी, चीनी या गुड़, आटा और मेवे भी होते हैं। इनसे कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित लोगों को इन्हें खाते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इसी तरह, वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों को भी लड्डुओं की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। पौष्टिक होने का मतलब यह नहीं कि कोई चीज़ जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती है।

क्या गोंद त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद है?

गोंद के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसे खाने से त्वचा में चमक आती है, बाल मजबूत होते हैं और शरीर में कोलेजन बनने में मदद मिलती है। कोलेजन शरीर में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो त्वचा, हड्डियों और शरीर के दूसरे ऊतकों की बनावट में भूमिका निभाता है। लेकिन केवल गोंद खाने से शरीर में कोलेजन बढ़ने या त्वचा और बालों की समस्याएँ दूर होने का पक्का प्रमाण नहीं है। त्वचा और बालों की सेहत के लिए पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, खनिज, नींद और संतुलित भोजन महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए गोंद के लड्डुओं को त्वचा या बालों की किसी समस्या का इलाज समझना सही नहीं होगा।

गोंद के लड्डू खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

गोंद के लड्डू स्वादिष्ट और ऊर्जा से भरपूर हो सकते हैं, लेकिन इन्हें खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मात्रा का ध्यान रखें: इनमें घी, चीनी या गुड़ और मेवे होने के कारण कैलोरी अधिक हो सकती है। अपनी ज़रूरत के हिसाब से ही खाएँ।

सही गोंद चुनें: केवल खाने योग्य गोंद का इस्तेमाल करें। हर पेड़ से निकलने वाला गोंद खाने के लिए सुरक्षित नहीं होता।

मधुमेह में सावधानी रखें: चीनी या गुड़ से बने लड्डू ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। अपनी खान-पान की योजना के अनुसार ही इन्हें खाएँ।

एलर्जी का ध्यान रखें: अगर लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले किसी मेवे या दूसरी चीज़ से एलर्जी है, तो उसे खाने से बचें।

पेट की परेशानी को नज़रअंदाज़ न करें: किसी खाद्य पदार्थ को खाने के बाद पेट में परेशानी हो, तो उसे खाना बंद करें और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

इसे इलाज न समझें: गोंद के लड्डू हड्डियों, जोड़ों या प्रसव के बाद होने वाली किसी परेशानी का प्रमाणित इलाज नहीं हैं।

गोंद के लड्डू कैसे बनाए जाते हैं?

गोंद के लड्डुओं की रेसिपी अलग-अलग घरों में अलग हो सकती है। आम तौर पर इन्हें बनाने के लिए खाने योग्य गोंद, घी, आटा, गुड़ या चीनी और अपनी पसंद के मेवों का इस्तेमाल किया जाता है।

सबसे पहले गोंद को घी में तलकर फुलाया जाता है। इसके बाद उसे ठंडा करके छोटे टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है। फिर आटे को घी में भूनकर उसमें गोंद, पिसे हुए मेवे और गुड़ या चीनी मिलाई जाती है। मिश्रण के थोड़ा ठंडा होने पर उससे लड्डू बना लिए जाते हैं। लड्डू बनाते समय घी और मीठे की मात्रा अपनी ज़रूरत के अनुसार रखी जा सकती है। हालांकि, कम चीनी डालने से भी लड्डुओं में मौजूद कैलोरी पूरी तरह कम नहीं हो जाती, क्योंकि घी और मेवे भी ऊर्जा देते हैं।

गोंद के लड्डू कितने फायदेमंद हैं?

गोंद के लड्डू हमारी खान-पान की परंपरा का हिस्सा हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली चीज़ें शरीर को ऊर्जा और कुछ ज़रूरी पोषक तत्व दे सकती हैं। इसी वजह से इन्हें सर्दियों और प्रसव के बाद के समय में खाने का चलन रहा है।

लेकिन इनके बारे में किए जाने वाले हर दावे को सच मान लेना ठीक नहीं है। अभी इस बात के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि गोंद के लड्डू सीधे हड्डियों को मजबूत करते हैं, जोड़ों का दर्द दूर करते हैं या प्रसव के बाद शरीर को जल्दी ठीक कर देते हैं।

सीधी बात यह है कि गोंद के लड्डू पौष्टिक भोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन ये किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। इनका फायदा इस बात पर भी निर्भर करता है कि इन्हें किस मात्रा में खाया जाता है और बाकी भोजन कैसा है। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित भोजन करना, नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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