हर 8वां भारतीय बीमार! 7 साल में दिल की बीमारी 3 गुना - क्या आप भी खतरे में?

NSO 2025 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत में हर 8वां व्यक्ति बीमार, दिल की बीमारियां 3 गुना बढ़ीं। जानिए वजह, आंकड़े और कितना खतरा है युवाओं को।

Newstrack Network
Published on: 1 May 2026 12:36 PM IST
Heart Disease Rise NSO 2025 Report
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Heart Disease Rise NSO 2025 Report

NSO 2025 Report: देश में स्वास्थ्य से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) के ताज़ा सर्वेक्षण ने संकेत दिया है कि भारत अब तेजी से लाइफस्टाइल बीमारियों की गिरफ्त में जा रहा है। संक्रमणजनित रोगों की जगह अब दिल की बीमारियाँ और मेटाबॉलिक समस्याएँ सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन और हृदय रोग मिलकर कुल बीमारियों का लगभग आधा हिस्सा बन चुके हैं, जो बीते एक दशक में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।

सर्वे के मुताबिक, अब देश में हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा है। वर्ष 2025 में 13.1 प्रतिशत लोगों ने पिछले पंद्रह दिनों में बीमार होने की बात कही, जो 2017-18 के मुकाबले लगभग दोगुनी है। यह आंकड़ा सिर्फ गंभीर बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आम लोगों का समग्र स्वास्थ्य स्तर भी तेजी से गिर रहा है और एक व्यक्ति को एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याएँ हो रही हैं।


करीब 1.4 लाख परिवारों पर आधारित इस सर्वे ने देश के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों की वास्तविक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट साफ दर्शाती है कि बीमारी का पैटर्न उम्र के साथ बदल रहा है, बच्चों में संक्रमण अब भी प्रमुख है, लेकिन युवाओं में लाइफस्टाइल बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि बुजुर्गों में क्रॉनिक बीमारियाँ सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं।

बीमा बढ़ा, लेकिन जेब पर बोझ कायम

हालांकि स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार हुआ है, ग्रामीण क्षेत्रों में 47 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 44 प्रतिशत आबादी अब बीमा के दायरे में है, फिर भी इलाज का बड़ा हिस्सा लोगों को अपनी जेब से ही खर्च करना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने का खर्च खासकर दिल, कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों में परिवारों के लिए आर्थिक संकट बनता जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि औसत इलाज खर्च भले ही ज्यादा दिखता हो, लेकिन असलियत में कुछ गंभीर मामलों में अत्यधिक खर्च होने से यह आंकड़ा बढ़ जाता है। यही वजह है कि अचानक आने वाला मेडिकल खर्च कई परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर कर देता है।

दिल की बीमारियाँ: सबसे बड़ा खतरा

NSO के आंकड़ों के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियाँ अब देश में कुल बीमारियों का 25.6 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी हैं, जो किसी भी अन्य श्रेणी से अधिक है। हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण तेजी से आम हो रहे हैं। प्रति एक लाख आबादी में 3,358 लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए हैं। चिंता की बात यह है कि यह खतरा अब युवाओं तक पहुंच चुका है। 15-29 आयु वर्ग में भी दिल की बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में यह आंकड़ा 37.8 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

अस्पतालों में बढ़ती भीड़ और खर्च



दिल की बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। उम्र बढ़ने के साथ यह खतरा तेजी से बढ़ता है, लेकिन युवाओं में भी इसके संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। इलाज की बात करें तो शहरी क्षेत्रों में दिल की बीमारी का औसत खर्च 69,451 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 47,135 रुपये है। यह खर्च अन्य सामान्य बीमारियों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।

बदलती लाइफस्टाइल बनी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे संकट के पीछे बदलती जीवनशैली सबसे बड़ा कारण है। फास्ट फूड, तनाव, शारीरिक गतिविधि में कमी और अनियमित दिनचर्या ने दिल की बीमारियों को तेजी से बढ़ावा दिया है।

यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत एक बड़े कार्डियोवैस्कुलर क्राइसिस की ओर बढ़ रहा है। खासतौर पर युवाओं में बढ़ते मामलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अगर समय रहते खानपान, जीवनशैली और नियमित जांच पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है।


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