Causes Of Hypertension: हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता खतरा, युवाओं में तेजी से फैल रही बीमारी, जानें वजह

Causes Of Hypertension: भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और खराब लाइफस्टाइल के कारण युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ रहा है, जो अब एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा बन चुका है।

Newstrack Network
Published on: 17 May 2026 6:12 PM IST
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Causes Of Hypertension:आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, खराब खानपान और घंटों मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल ने युवाओं को भी गंभीर बीमारियों की तरफ धकेलना शुरू कर दिया है। कभी बढ़ती उम्र की बीमारी माने जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को यह तक पता नहीं होता कि वे उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं।

विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर राजधानी लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से सामने आए आंकड़ों ने खतरे की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग की जांच में पाया गया कि गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे करीब 80 फीसदी मरीज उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। बीते डेढ़ महीने में ओपीडी में पहुंचे करीब छह हजार मरीजों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से लगभग 4,800 मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर पाया गया।

सबसे बड़ी चिंता: मरीजों को बीमारी की जानकारी ही नहीं

डॉक्टरों के अनुसार सबसे खतरनाक बात यह है कि अधिकांश मरीजों को यह पता ही नहीं था कि उनका रक्तचाप लगातार बढ़ा हुआ है। यही वजह है कि विशेषज्ञ हाइपरटेंशन को ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं। यह बीमारी शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती रहती है, लेकिन शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। पीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद के अनुसार बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर दिल, गुर्दे और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेल होने जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि कई बार गुर्दे की बीमारी, थायराइड संबंधी समस्याएं और शरीर में कुछ हार्मोन की अधिकता भी रक्तचाप बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। पीजीआई के बाह्य रोगी विभाग में रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या हाई बीपी से प्रभावित होती है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहे मामले

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में हाइपरटेंशन के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत के मुताबिक पिछले पांच से दस वर्षों में युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 150 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से 50 फीसदी से अधिक मरीज हाइपरटेंशन के होते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज 25 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। यानी अब हाई बीपी केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है।

मोबाइल और लैपटॉप भी बढ़ा रहे खतरा

डॉक्टरों के अनुसार बदलती जीवनशैली युवाओं को तेजी से बीमार बना रही है। घंटों मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन के सामने बैठने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। इसके अलावा कम नींद, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, जंक फूड, देर रात तक जागना, मानसिक तनाव और लगातार बैठे रहने की आदत भी हाई बीपी के खतरे को बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की डिजिटल लाइफस्टाइल धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है।

इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों का कहना है कि यदि शरीर में लगातार कुछ संकेत दिखाई दें तो तुरंत रक्तचाप की जांच करानी चाहिए। लगातार सिर दर्द रहना, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखाई देना, अत्यधिक थकान, बेचैनी और सीने में दर्द जैसे लक्षण हाई बीपी के संकेत हो सकते हैं। हालांकि कई मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते बीमारी का पता चल जाए तो दवा, खानपान और जीवनशैली में सुधार के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

बदलती जीवनशैली पर नियंत्रण जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले वर्षों में युवाओं में हृदय और गुर्दे की बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, नमक का सीमित सेवन, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना हाई बीपी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।

सामान्यतः रक्तचाप को दो संख्याओं में मापा जाता है:

सिस्टोलिक (ऊपरी दबाव) — जब हृदय रक्त पंप करता है

डायस्टोलिक (निचला दबाव) — जब हृदय आराम की स्थिति में होता है

सामान्य रक्तचाप लगभग:

120/80- -text{mmHg}

यदि रक्तचाप लगातार:

140/90- -text{mmHg} या उससे अधिक रहता है, तो इसे उच्च रक्तचाप माना जाता है।

उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण:

अत्यधिक नमक का सेवन

तनाव और चिंता

मोटापा

व्यायाम की कमी

धूम्रपान और शराब

अनियमित नींद

आनुवंशिक कारण

मधुमेह या किडनी संबंधी समस्याएँ

इसी कारण इसे कई बार “Silent Killer” भी कहा जाता है। यदि लंबे समय तक नियंत्रण न हो तो यह:

हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी खराब होना और आंखों की समस्या जैसी गंभीर स्थितियाँ पैदा कर सकता है।

बचाव और नियंत्रण:

नमक कम करें

नियमित व्यायाम करें

वजन नियंत्रित रखें

तनाव कम करें

पर्याप्त नींद लें

नियमित BP जांच कराएं

डॉक्टर द्वारा दी गई दवा नियमित लें

यदि आपका BP अचानक बहुत अधिक हो जाए, जैसे:

180/120- -text{mmHg}

तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार आज दुनिया में लगभग 1.4 अरब लोग उच्च रक्तचाप से प्रभावित हैं। इनमें से बड़ी संख्या को यह पता तक नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी है।

भारत की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है:

भारत में लगभग 18–22 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित माने जाते हैं।

केवल बहुत कम लोगों का BP नियंत्रण में रहता है।

यह बीमारी हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और ब्रेन हेमरेज की बड़ी वजह बन चुकी है।

एक अनुमान के अनुसार:

वर्ष 2017 में उच्च रक्तचाप के कारण भारत में लगभग 15 लाख लोगों की मृत्यु हुई।

वैश्विक स्तर पर इसी कारण एक करोड़ से अधिक मौतें हुईं।

रक्तचाप बढ़ने से धमनियों पर दबाव लगातार बढ़ता है। इसे ऐसे समझ सकते हैं:

-text{Long-term High BP} -rightarrow -text{Heart Damage + Stroke + Kidney Failure}

यानी लंबे समय तक बढ़ा हुआ BP धीरे-धीरे:

दिल को कमजोर करता है

दिमाग की नसें फाड़ सकता है

किडनी खराब कर सकता है

आंखों की रोशनी तक प्रभावित कर सकता है

सबसे डरावनी बात यह है कि अब यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। तनाव, मोबाइल-इंटरनेट आधारित जीवनशैली, कम नींद, जंक फूड और लगातार मानसिक दबाव के कारण युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

डॉक्टरों के अनुसार:

कई लोग बिल्कुल स्वस्थ दिखते हैं

जिम भी जाते हैं

लेकिन अंदर ही अंदर उनका BP खतरनाक स्तर पर होता है

और कई बार अचानक से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोकया अचानक मृत्यु हो जाती है।

WHO की रिपोर्ट कहती है कि यदि समय पर जांच और नियंत्रण हो जाए तो भारत में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

डॉक्टरों का साफ कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है और कई बार मरीज को इसकी जानकारी तब होती है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।

Akriti Pandey

Akriti Pandey

Mail ID - akritipandey7897@gmail.com

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