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IVF Clinic and Sperm Bank New Rules: स्पर्म बैंक और IVF क्लीनिकों के लिए नए नियम, मरीजों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम
IVF Clinic and Sperm Bank New Rules India 2026: IVF और स्पर्म बैंक पर नए नियम, मरीजों की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम
IVF Clinic and Sperm Bank New Rules India 2026
IVF Clinic and Sperm Bank New Rules India 2026: बदलती जीवन शैली, पर्यावरण प्रदूषण और बड़ी उम्र में विवाह, नशे की लत जैसी खास वजहें मौजूदा समय में संतानोत्पत्ति में असमर्थता की बड़ी वजह बनकर सामने आ रहीं हैं। यही वजह है कि माता-पिता बनने का सपना पूरा करने के लिए आज बड़ी संख्या में लोग इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक का सहारा ले रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में फर्टिलिटी क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वहीं इनके साथ अनियमितताओं और बिना अनुमति चल रहे केंद्रों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने नया आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब केवल उन्हीं फर्टिलिटी क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों को IVF में इस्तेमाल होने वाले जरूरी लैब प्रोडक्ट्स और कंज्यूमेबल्स की सप्लाई की जाएगी, जो सरकार के नियमों के तहत पंजीकृत हैं।
क्या है CDSCO का नया आदेश?
CDSCO ने मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों, आयातकों और सप्लायर्स को निर्देश दिया है कि वे IVF प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले संवेदनशील लैब प्रोडक्ट्स केवल उन्हीं फर्टिलिटी क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों को उपलब्ध कराएं, जो असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी कानूनों के तहत विधिवत पंजीकृत हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि IVF जैसी संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया केवल अधिकृत संस्थानों में ही हो।
क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?
CDSCO के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई गैर-पंजीकृत क्लीनिक भी आसानी से IVF में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल प्रोडक्ट्स खरीद रहे थे। ऐसे संस्थानों में तय मानकों का पालन नहीं होने का खतरा रहता है। जिससे इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सरकार का मानना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए सप्लाई चेन पर ही नियंत्रण लगाने का फैसला लिया गया है।
किन उत्पादों की सप्लाई पर लगेगी रोक?
नए आदेश के तहत बिना रजिस्टर्ड क्लीनिकों को IVF मीडिया, क्रायोप्रिजर्वेशन मीडिया, रिएजेंट्स और अन्य लैब कंज्यूमेबल्स की सप्लाई नहीं की जाएगी। IVF मीडिया वह विशेष घोल होता है जिसमें लैब के अंदर भ्रूण विकसित किया जाता है। वहीं क्रायोप्रिजर्वेशन मीडिया का इस्तेमाल भ्रूण, अंडाणु और शुक्राणु को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके अलावा लैब में होने वाली जांच और प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाले रसायन तथा अन्य जरूरी सामग्री भी केवल अधिकृत केंद्रों को ही उपलब्ध होगी।
इस फैसले से मरीजों को क्या होगा फायदा?
सरकार के इस कदम से IVF कराने वाले दंपतियों को सबसे बड़ा फायदा सुरक्षित और मानक आधारित इलाज के रूप में मिलेगा। इससे गैर-पंजीकृत क्लीनिकों की संख्या कम होगी, इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर भी काफी हद तक रोक लगेगी। साथ ही लैब में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित होने से संक्रमण और तकनीकी गड़बड़ियों का जोखिम भी कम होगा।
क्या कहते हैं ART और सरोगेसी कानून
देश में IVF और फर्टिलिटी सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 लागू किए गए हैं। इन कानूनों के तहत सभी IVF क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों का पंजीकरण अनिवार्य है। साथ ही इनके लिए डॉक्टरों की योग्यता, लैब सुविधाओं, रिकॉर्ड रखने और मरीजों की गोपनीयता से जुड़े स्पष्ट नियम भी तय किए गए हैं।
मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 की क्या भूमिका है?
CDSCO ने स्पष्ट किया है कि IVF में इस्तेमाल होने वाले लैब प्रोडक्ट्स मेडिकल डिवाइसेज रूल्स, 2017 के तहत नियंत्रित किए जाते हैं। इनका निर्माण, आयात और बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त कंपनियां ही कर सकती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार में केवल गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले उत्पाद ही पहुंचें।
भारत में तेजी से बढ़ रही है IVF की मांग
बदलती जीवनशैली, देर से शादी, बढ़ती उम्र में परिवार शुरू करने की योजना, तनाव, हार्मोनल समस्याएं और बांझपन के बढ़ते मामलों के कारण देश में IVF का चलन लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल हजारों दंपती इस तकनीक का सहारा लेते हैं। ऐसे में फर्टिलिटी सेक्टर में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है।
IVF कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, सही क्लीनिक का चुनाव बेहद जरूरी
हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि IVF कराने से पहले मरीजों को संबंधित क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन जरूर जांचना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टरों और एम्ब्रियोलॉजिस्ट की योग्यता, इलाज की पूरी लागत, सफलता दर और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेना भी जरूरी है। केवल अधिकृत और मान्यता प्राप्त फर्टिलिटी सेंटर में ही इलाज कराने से सुरक्षित और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सरकार का यह फैसला केवल गैर-पंजीकृत क्लीनिकों पर कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे IVF सेक्टर को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, गुणवत्ता मानकों का पालन बढ़ेगा और फर्टिलिटी सेवाओं में लोगों का भरोसा मजबूत होगा।


